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असम में हैंडलूम निर्मित गामोछा, मेखला-चादर और आरनोई की बिक्री पर रोक

 
असम में आज से हैंडलूम निर्मित गामोछा, मेखला-चादर और आरनोई की बिक्री पर रोक
गुवाहाटी, 01 मार्च। राज्य में हैंडलूम को बढ़ावा देने और बुनकरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए असम सरकार ने बुधवार से हैंडलूम से बने असमिया गमछा, मेखला-चादर (असमिया महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला स्थानीय परिधान) और आरनोई (बोडो महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला स्थानीय परिधान) की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसको लेकर कामरूप (ग्रामीण) जिला के रेशम वस्त्र नगरी के रूप में विख्यात सुवालकुची के बुनकरों में काफी खुशी देखी जा रही है। बुनकरों ने सरकार के इस फैसले को लेकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की है।

राज्य में हैंडलूम से बने गामोछा, मेखला-चादर और आरनोई की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस बार रंगाली बिहू के अवसर पर असम में दूसरे राज्यों में पावरलूम से उत्पादित उपरोक्त वस्त्रों की बिक्री कोई भी व्यापारी नहीं कर सकेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में एक मार्च से इस तरह के उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने की घोषणा की थी।

भारत सरकार के 1985 के हस्तशिल्प अधिनियम के अनुसार ये यंत्रीकृत वस्त्र प्रतिबंधित हैं। एक मार्च से प्रभावी मुख्यमंत्री का आदेश संबंधित विभाग को जारी किया गया है। वस्त्रनगरी सुवालकुची के बुनकरों सहित राज्य के विभिन्न दल एवं संगठन लंबे समय से राज्य में दूसरे राज्यों में उत्पादित यंत्रीकृत गामोछा, मेखला-चादर और आरनोई की बिक्री को बंद करने की मांग कर रहे थे।

यंत्रीकृत वस्त्रों पर प्रतिबंध के बाद अब सुवालकुची के बुनकरों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सभी जिला उपायुक्त और जिला पुलिस अधीक्षकों को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई का आदेश जारी किया है।