शैक्षणिक गतिविधियों को चुनावी महत्वाकांक्षाओं की भेंट नहीं चढ़ने देंगे : हाई कोर्ट
Nov 14, 2025, 19:48 IST

चंडीगढ़, 14 नवंबर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब विश्वविद्यालय में सीनेट चुनाव की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि शैक्षणिक व्यवस्था "चुनावी आकांक्षाओं की वेदी पर बलिदान" नहीं की जा सकती। चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने लंबे समय से लंबित सीनेट चुनाव कार्यक्रम की घोषणा को लेकर दायर याचिका का शुक्रवार काे निपटारा करते हुए उम्मीद जताई कि चुनाव "यथाशीघ्र" कराए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान पीठ ने छात्रों को याद दिलाया कि उनका प्राथमिक उद्देश्य निर्बाध शिक्षा प्राप्त करना है। अदालत ने कहा कि छात्र अपने माता-पिता के प्रयासों से विश्वविद्यालय में पढऩे आते हैं। इसलिए ज्ञान अर्जित करना ही उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य चुनाव नहीं बल्कि शिक्षा है, और शैक्षणिक गतिविधियों को चुनावी आकांक्षा के कारण बाधित नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस ने छात्रों से कहा कि वह अपनी कक्षाओं में जाएं, कम से कम सात दिन नियमित रूप से पढ़ाई करें, फिर हम इस मामले की सुनवाई करेंगे। कोर्ट को बताया गया था कि छात्र आंदोलन के चलते कैंपस में पढ़ाई बाधित हो रही है।
कोर्ट में बताया गया कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक निकाय को राजनीतिक अखाड़ा बना दिया गया है, तो चीफ जस्टिस ने पूछा, "हम एक शैक्षणिक संस्था की बात कर रहे हैं या राजनीतिक संस्था की?" कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा देना है और यह मकसद धीरे-धीरे पीछे छूटता दिखाई दे रहा है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने छात्रों को याद दिलाया कि उनका प्राथमिक उद्देश्य निर्बाध शिक्षा प्राप्त करना है। अदालत ने कहा कि छात्र अपने माता-पिता के प्रयासों से विश्वविद्यालय में पढऩे आते हैं। इसलिए ज्ञान अर्जित करना ही उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय का मूल उद्देश्य चुनाव नहीं बल्कि शिक्षा है, और शैक्षणिक गतिविधियों को चुनावी आकांक्षा के कारण बाधित नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस ने छात्रों से कहा कि वह अपनी कक्षाओं में जाएं, कम से कम सात दिन नियमित रूप से पढ़ाई करें, फिर हम इस मामले की सुनवाई करेंगे। कोर्ट को बताया गया था कि छात्र आंदोलन के चलते कैंपस में पढ़ाई बाधित हो रही है।
कोर्ट में बताया गया कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक निकाय को राजनीतिक अखाड़ा बना दिया गया है, तो चीफ जस्टिस ने पूछा, "हम एक शैक्षणिक संस्था की बात कर रहे हैं या राजनीतिक संस्था की?" कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा देना है और यह मकसद धीरे-धीरे पीछे छूटता दिखाई दे रहा है।

