नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से।*
Feb 5, 2026, 21:09 IST

चंबल विकास समिति के राष्ट्रीय संयोजक ठाकुर जोगिंद्र सिंह भदौरिया ने आज दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में आगामी चंबल विकास यात्रा की घोषणा की। यह यात्रा 20 फरवरी 2026 से 1 मार्च 2026 तक चंबल नदी के उद्गम से संगम तक चलेगी, जो मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश – तीनों प्रदेशों से गुजरेगी। यात्रा का उद्देश्य चंबल नदी के संरक्षण, बीहड़ क्षेत्रों के विकास, जल जागरण एवं सांस्कृतिक धरोहरों के प्रचार के माध्यम से जन-जन में पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सद्भाव की भावना जगाना है।
चंबल विकास यात्रा चंबल नदी को देश की जीवन-रेखा के रूप में स्थापित करने का एक व्यावहारिक प्रयास है। यह नदी भारत की एकमात्र प्रमुख अपेक्षाकृत प्रदूषण-मुक्त नदियों में से एक है, जो यमुना में मिलकर गंगा की जलधारा को मजबूत करती है। यात्रा में प्रमुख स्थलों का दौरा, शिव मंदिरों में पूजन, स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों का सम्मान एवं ग्रामीण समुदायों से संवाद शामिल होगा।
चंबल विकास समिति की प्रमुख मांगें एवं संकल्प:
चंबल विकास यात्रा के माध्यम से समिति निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठा रही है:
चंबल नदी बेसिन के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष बजट आवंटन एवं राष्ट्रीय स्तर की नीति निर्माण।
बीहड़ क्षेत्रों में सिंचाई, कृषि, मत्स्य पालन एवं रोजगार सृजन के लिए विशेष योजनाएं एवं परियोजनाएं।
चंबल क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने हेतु आर्थिक विकास पैकेज एवं विशेष पैकेज।
चंबल घाटी में शांति स्थापना, सामाजिक सद्भाव एवं सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य एवं जैव-विविधता संरक्षण के लिए मजबूत कदम।
चंबल क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों (कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल आदि) की स्मृतियों के सम्मान में स्मारक एवं जागरण कार्यक्रम।
तीनों प्रदेशों (मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश) में समन्वय स्थापित कर चंबल बेसिन प्रबंधन को मजबूत बनाना।
यात्रा का संक्षिप्त रूट प्लान एवं प्रमुख हाइलाइट्स:
20 फरवरी 2026: जनापाव कुटी (महू के पास, चंबल उद्गम) से उद्घाटन – शिव अभिषेक, पूजन एवं समारोह। रात्रि विश्राम उज्जैन (महाकालेश्वर मंदिर)।
21 फरवरी: उज्जैन → मंदसौर (पशुपतिनाथ अष्टमुखी शिवलिंग मंदिर) → रतलाम।
22 फरवरी: रतलाम → चित्तौड़गढ़ (गांधी सागर बांध क्षेत्र)।
23 फरवरी: चित्तौड़गढ़ → कोटा (राणा प्रताप सागर एवं जवाहर सागर बांध)।
24 फरवरी: कोटा → करौली (करौली माता दर्शन)।
25 फरवरी: करौली → धौलपुर (चंबल नदी पार) → मुरैना।
26 फरवरी: मुरैना → पोरसा → उसेद घाट के पास ग्राम फुल सहाय का पूरा (रात्रि निवास एवं ग्रामीण संवाद)।
चंबल विकास यात्रा चंबल नदी को देश की जीवन-रेखा के रूप में स्थापित करने का एक व्यावहारिक प्रयास है। यह नदी भारत की एकमात्र प्रमुख अपेक्षाकृत प्रदूषण-मुक्त नदियों में से एक है, जो यमुना में मिलकर गंगा की जलधारा को मजबूत करती है। यात्रा में प्रमुख स्थलों का दौरा, शिव मंदिरों में पूजन, स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों का सम्मान एवं ग्रामीण समुदायों से संवाद शामिल होगा।
चंबल विकास समिति की प्रमुख मांगें एवं संकल्प:
चंबल विकास यात्रा के माध्यम से समिति निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठा रही है:
चंबल नदी बेसिन के संरक्षण एवं विकास के लिए विशेष बजट आवंटन एवं राष्ट्रीय स्तर की नीति निर्माण।
बीहड़ क्षेत्रों में सिंचाई, कृषि, मत्स्य पालन एवं रोजगार सृजन के लिए विशेष योजनाएं एवं परियोजनाएं।
चंबल क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने हेतु आर्थिक विकास पैकेज एवं विशेष पैकेज।
चंबल घाटी में शांति स्थापना, सामाजिक सद्भाव एवं सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य एवं जैव-विविधता संरक्षण के लिए मजबूत कदम।
चंबल क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों (कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल आदि) की स्मृतियों के सम्मान में स्मारक एवं जागरण कार्यक्रम।
तीनों प्रदेशों (मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश) में समन्वय स्थापित कर चंबल बेसिन प्रबंधन को मजबूत बनाना।
यात्रा का संक्षिप्त रूट प्लान एवं प्रमुख हाइलाइट्स:
20 फरवरी 2026: जनापाव कुटी (महू के पास, चंबल उद्गम) से उद्घाटन – शिव अभिषेक, पूजन एवं समारोह। रात्रि विश्राम उज्जैन (महाकालेश्वर मंदिर)।
21 फरवरी: उज्जैन → मंदसौर (पशुपतिनाथ अष्टमुखी शिवलिंग मंदिर) → रतलाम।
22 फरवरी: रतलाम → चित्तौड़गढ़ (गांधी सागर बांध क्षेत्र)।
23 फरवरी: चित्तौड़गढ़ → कोटा (राणा प्रताप सागर एवं जवाहर सागर बांध)।
24 फरवरी: कोटा → करौली (करौली माता दर्शन)।
25 फरवरी: करौली → धौलपुर (चंबल नदी पार) → मुरैना।
26 फरवरी: मुरैना → पोरसा → उसेद घाट के पास ग्राम फुल सहाय का पूरा (रात्रि निवास एवं ग्रामीण संवाद)।

