Pal Pal India

*न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से*

 
  *न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से*

23-1-26 नई दिल्ली
सर्वोच्च न्यायालय में बैठे भैरव की सवारी कुत्ते और हिन्दुत्व विरोधी गिरोह के विनाश के लिये भैरव मन्दिर में प्रार्थना। झूठ की बुनियाद पर जजों ने स्वतः संज्ञान लेकर कुत्तों को मारने की साजिश रची- हिन्दू संगठन

राजधानी दिल्ली के हिन्दू संगठनों ने भैरों मन्दिर में प्रर्थाना कि भैरव देव कुत्तों पर अत्याचार करने वाले सर्वोच्च न्यायालय में घुसपैठ जमाये बैठे हिन्दुत्व विरोधी गिरोह का विनाश करें।
भैंरों देव से प्रार्थना करते हुए अटल जन शक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बम बम महाराज ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में हिन्दू विरोधी जजों, वकीलों और रजिस्ट्रार अधिकारियों का गिरोह बैठा हुआ है। यह गिरोह हिन्दुओं के धार्मिक मामलों में बिना वजह हस्तक्षेप करता है। सर्वोच्च न्यायालय में अभय श्री निवास ओका और जे बी पारदीवाला जैसे हिन्दू विरोधी, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त बेईमान जजों की भरमार है। जो दिवाली के पटाखों में किसी भी प्रकार का प्रदूषण न होने के बावजूद भी स्वतः संज्ञान लेकर दीवाली के पटाखों पर रोक लगाते हैं। छबि शर्मा नामक लड़की की मौत रैबिज से न होने के बावजूद उसे रैबिज से मरा बताने का झूठ बोलकर स्वतः संज्ञान लेकर कुत्तों के खिलाफ मुहिम चलाते हैं। इसी 20 जनवरी को कई वकीलों द्वारा बच्ची के रैबिज से न मरने का मामला न्यायालय में उठाये जाने पर सर्वोच्च न्यायालय की पीठ द्वारा ढीठता पूर्वक यह कहना की हमें इस बारे में कुछ नहीं सुनना, साबित करता है कि सर्वोच्च न्यायालय में कानून का नहीं मनमर्जी और जबरदस्ती कानून से खिलवाड़ का राज चल रहा है। इस मामले में इनके द्वारा दिये आदेश न केवल विस्फोटक नियम 2008 और पशु जन्म नियन्त्रण कानून की अवहेलना करते हैं बल्कि देश की अर्थ व्यवस्था को भी तबाह करने वाले होते हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री के आर्थिक मामलों के सलाहकार ने भी सर्वोच्च न्यायालय के जजों को विकसित भारत बनाने में सबसे बड़ी बाधा बताया था वहीं कानून मंत्री श्री किरण रिजिजू ने इनका राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त होना बताया था। 

भैरों मन्दिर में प्रार्थना करते हुए दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री भी देश के दुश्मनों के हाथों में खेल रही है। जहां तीस्ता सीतलवाड़ और प्रशान्त भूषण जैसे सी आई ए के ऐजेन्टों की याचिका पर तुरन्त सुनवाई करायी जाती है। वहीं हमारी पटाखों के और कुत्तों के समर्थन में लगायी याचिकाओं में लगातार खोट निकालकर उन्हें सुनवाई से रोका जाता है। जबकि संविधान का अनुच्छेद 39क आर्थिक या अन्य किसी निर्योग्याता के आधार पर किसी भी नागरिक को न्याय से वंचित न करने का आदेश देता है। जिससें लगता है कि इस सबके लिये इन्हें मोटा चढ़ावा मिलता है। श्री जैन ने बताया कि सामुदायिक पशु कुत्तों के मामलें में हमने इसी 17 तारीख को सर्वोच्च न्यायालय में अन्तरवर्ती आवेदन संख्या 17504/26 लगाकर 20 जनवरी की सुनवाई में भाग लेने का अनुरोध किया था। किन्तु रजिस्ट्री ने हमें सुनवाई में भाग लेना तो दूर न्यायालय में प्रवेश करके कार्यवाही भी नहीं देखने दी। इतना ही नहीं जो पी आई एल 22 जनवरी की शाम तक हमारी याचिका में भी कोई खोट नही निकाल सकी उसने हमें जानबूझकर साजिशन सुनवाई में भाग लेने से रोका। 
 

हिन्दू संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश श्री सूर्यकान्त शर्मा जी से अनुरोध किया कि वें सर्वोच्च न्यायालय और उसकी रजिस्ट्री पर कब्जा जमाये बैठी हिन्दू विरोधी लाबी पर वक्त रहते लगाम लगाकर इन्हें दण्डित करें। हिन्दू संगठनों का मानना है कि यह गिरोह देश की अर्थ व्यवस्था को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के लिए बिना साक्ष्य सबूत के झूठे मुद्दे बनाकर उन पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कराता है। यह गिरोह जानबूझकर हिन्दू समाज को सड़कों पर उतारकर मोदी सरकार को गिराने की देशद्राही साजिश में भी लिप्त है।  हिन्दू संगठनों ने इस मामले में दोषी न्यायधीशों और रजिस्ट्री के अधिकारियों के खिलाफ लोकपाल, सी बी आई, ईडी और एन आई ए से भी कार्यवाही करने का अनुरोध किया है।