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दिल्ली के वित्त मंत्री ने की बजट मामले की जांच की मांग

 
दिल्ली के वित्त मंत्री ने की बजट मामले की जांच की मांग

नई दिल्ली, 21 मार्च। दिल्ली के वित्त मंत्री कैलाश गहलोत ने मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष से बजट मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में अहम जानकारी दिल्ली के मुख्य सचिव और वित्त विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने भी साझा नहीं की।

गहलोत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सोमवार को केंद्र सरकार ने बजट को विधानसभा में पेश होने से रोक दिया। यह सबको पता था कि 21 मार्च को दिल्ली का बजट पेश होना है। उपराज्यपाल को मालूम था कि बजट पेश होना है। 10 मार्च को पूरे बजट का डॉक्यूमेंट के साथ दिल्ली सरकार की तरफ से गृह मंत्रालय को भेज दिया गया था।

गहलोत ने कहा कि बीती रात करीब 9 बजे उन्हें पता चला कि गृह मंत्रालय ने कुछ जानकारी मांगी है। उन्होंने तुरंत मुख्य सचिव से बात की, उसके बाद प्रिंसिपल फाइनेंस सेक्रेट्री से बात की और मैसेज भेजा। इससे पहले सोमवार दोपहर दो बजे से लेकर शाम 6 बजे तक मुख्य सचिव से उन्होंने दो बार, प्रिंसिपल सेक्रेट्री फाइनेंस से करीब तीन बार बात की है। उन्होंने कहा कि जो हमने गृह मंत्रालय को जवाब देने के लिए कहा है उसे भेजें।

सोमवार शाम को 6 बजे जो लेटर आया उसके साथ वह फाइल आई, जिसे हमने देखा। उसमें जो जानकारी मांगी थी उसका जवाब बनाया और मुख्यमंत्री से बात कर रात 9 बजे उसे उपराज्यपाल के पास भेज दिया था। वहां से रात लगभग 10:30 बजे फाइल वापस लौटी।

गहलोत ने कहा कि 10 मार्च को हमने बजट भेजा था, जो लेटर लिखा गया, वह मुख्य सचिव के पास 17 मार्च को आ गया था। 17 मार्च से लेकर 20 मार्च तक सचिव ने दिल्ली के वित्त मंत्री से साझा नहीं किया। मंत्री को यह नहीं पता कि चिट्ठी आई है। इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। मुख्य सचिव को इस तरह के महत्वपूर्ण मेल को संज्ञान में लाना चाहिए था, ताकि जो समय बर्बाद हुआ वो नहीं होता।

कैलाश गहलोत ने विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल से मांग की है कि वह बजट के दस्तावेज को लेकर और गृह मंत्रालय से पत्राचार आदि को लेकर मुख्य सचिव, वित्त विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री ने जो जानकारी साझा नहीं की है। इस पूरे मामले की वह जांच कराएं। वित्त मंत्री के इस मांग का आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने भी समर्थन किया। जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी मांग पर विचार करने की बात कही और सदन की कार्रवाई कुछ देर के लिए स्थगित कर दी।