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डीसीडब्ल्यू ने डीयू और पुलिस अधिकारियों को जारी किया समन

 
डीसीडब्ल्यू ने डीयू और पुलिस अधिकारियों को जारी किया समन  
नई दिल्ली, 03 अप्रैल। दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ महिला कॉलेज में हाल में ही कॉलेज फेस्ट के दौरान छात्राओं के साथ हुई छेड़छाड़ और कॉलेज में छात्रों द्वारा घुसकर किए गए हंगामे को लेकर डीयू कुलसचिव को समन जारी किया है।

डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की तरफ से सोमवार को भेजे गए समन में कॉलेज प्रशासन से पूर्व में गार्गी कॉलेज के फेस्ट के दौरान, दिसंबर 2022 में मिरांडा हाउस कॉलेज के फेस्ट के दौरान भी छात्राओं के साथ हुए शोषण पर विश्वविद्यालय द्वारा कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए गए। उसके बाद इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या नियम बनाए गए इसकी रिपोर्ट रिपोर्ट मांगी है। मालीवाल ने डीयू कुलसचिव को छह अप्रैल को दोपहर दो बजे महिला आयोग में तलब किया है। इसके अलावा डीसीडब्ल्यू की ओर से दिल्ली पुलिस को भी नोटिस भेजकर मामले में अभी तक की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई है।

उल्लेखनीय है कि 28 मार्च को इंद्रप्रस्थ महिला कॉलेज में कॉलेज फेस्ट के दौरान बड़ी संख्या में दूसरे कॉलेजों के छात्र उमड़ पड़े थे। छात्र कॉलेज की दीवार से कूदकर अंदर घुस गए थे। इस दौरान छात्रों की छात्राओं से तीखी झड़प हुई थी, जिस कारण कई छात्राऐं घायल हो गई थी। छात्राओं ने अपने साथ छेड़छाड़ और यौन शोषण का आरोप लगाया था। साथ ही दोषी छात्रों पर कार्रवाई की मांग की थी।

मौके पर पहुंचकर पुलिस ने स्थिति को संभाला था। पुलिस की तरफ से आइपी कॉलेज की भी कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया था। जिससे कॉलेज की अन्य छात्राओं ने पुलिस पर दोषियों के बजाय पीड़ितों पर कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन 29 मार्च को दोषी छात्रों पर कार्रवाई करने के लिए वामपंथी छात्र संगठनों ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आईसा) और स्टूडेंट फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआई) द्वारा किया गया था, जिसमें छात्रों ने दिल्ली पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ नारेबाजी की।

वहीं आईपी कॉलेज की छात्राओं ने कॉलेज प्राचार्य प्रोफेसर पूनम कुमरिया पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। सोमवार को भी कॉलेज की छात्राओं द्वारा डीयू के अन्य कॉलेजों के छात्र-छात्राओं से उनके साथ खड़े होने की मांग करते हुए एक मार्च का आयोजन किया गया है। कॉलेज की छात्राओं का आरोप है कि पुलिस उन्हीं सब छात्राओं पर कार्रवाई कर रही है, जिनका शोषण हुआ है। बल्कि शोषण करने वालों पर कोई कारवाई नहीं की जा रही है।