एमसीडी मेयर चुनाव स्थगित होने पर आप ने जताई कड़ी आपत्ति
Feb 6, 2023, 18:56 IST

नई दिल्ली, 06 फरवरी। आम आदमी पार्टी ने भाजपा पार्षदों के हंगामे के बाद पीठासीन अधिकारी द्वारा एमसीडी के मेयर, डिप्टी मेयर और स्थाई समिति का चुनाव स्थगित करने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह, विधायक दुर्गेश पाठक, विधायक आतिशी और विधायक सौरभ भारद्वाज ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। संजय सिंह ने कहा कि आज दिल्ली के लोगों ने एक बार फिर देखा कि भाजपा ने लोकतंत्र, संविधान और डीएमसी एक्ट का गला घोंटते हुए एमसीडी के मेयर, डिप्टी मेयर और स्थाई समिति का चुनाव नहीं होने दिया। ‘आप’ के पास 151 वोट हैं और भाजपा के पास मात्र 105 वोट हैं। पीठासीन अधिकारी को सिर्फ मेयर का चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है। पीठासीन अधिकारी अब कह रही हैं कि एल्डरमैन भी वोट डालेंगे।
उन्होंने कहा कि यह संविधान और डीएमसी एक्ट के अनुसार गलत है। मेयर, डिप्टी मेयर और स्थाई समिति तीनों चुनाव एक साथ कराने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि यह एजेंडे में कहीं नहीं था। क्या दिल्ली के एलजी के आदेश का कोई मतलब है या वो भाजपा के साथ मिलकर पूरा खेल कर रहे हैं। क्या भारत के संविधान का कोई मतलब है या संविधान का इसी तरह गला घोंटा जाएगा। क्या इस देश में, लोकतंत्र में चुनाव का कोई महत्व है या दिल्ली की जनता के जनादेश का इसी तरह से गला घोंटा जाएगा। इसकी कोई जवाबदेही नहीं है।
वहीं विधायक दुर्गेश पाठक ने कहा कि भाजपा की कोई दिलचस्पी नहीं है कि दिल्ली की जनता ने एमसीडी में जिस पार्टी को जनादेश दिया है, उसकी सरकार चले। पूरी दिल्ली को पता है कि आम आदमी पार्टी को भारी बहुमत है। उसके बाद भी मेयर, डिप्टी मेयर और स्थाई समिति का चुनाव नहीं होने दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कल यह खबर प्रचारित की जा रही थी कि आम आदमी पार्टी के 20 पार्षद भाजपा में शामिल हो रहे हैं। वहीं, आज भाजपा प्रेस वार्ता कर कह रही है कि आम आदमी पार्टी वाले भाजपा के पार्षदों को तोड़ रहे हैं। सुबह 11 बजे चुनाव का समय था, लेकिन प्रोटेम स्पीकर 11.45 बजे आईं और कहीं कि एल्डरमैन भी वोट करेंगे। हमारे सदन के नेता ने उनसे पूछा कि किस एक्ट के तहत एल्डरमैन वोट करेंगे।
इस बीच विधायक आतिशी ने कहा कि हमारी मांग है कि समयबद्ध तरीके से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मेयर का चुनाव हो और एल्डरमैन को वोट न डालने दिया जाए। क्योंकि संविधान और कानून भी यही कहता है कि एल्डरमैन के पास वोट डालने का अधिकार नहीं है। हम सुप्रीम कोर्ट से अपील करेंगे कि उनकी निगरानी में हफ्ते-दस दिन में मेयर का चुनाव हो जाए। सत्या शर्मा ने मजाक बना दिया है। वो आधे घंटे में ही सदन को स्थगित कर देती हैं। वो आधे घंटे का ब्रेक के लिए भी कह सकती थीं और उसके बाद वोटिंग करा सकती थीं। सदन में हंगामा कर वोट नहीं होने देने का भाजपा का पहले से प्लान था।
वहीं ‘आप’ के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ऐसी बेईमानी कभी नहीं देखी गई। पीठासीन अधिकारी, जो 2-3 घंटे की मेयर होती हैं, वो कह रही है कि मनोनित पार्षद भी वोट डालेंगे। पहली बेईमानी तो यह है। दूसरी बेईमानी यह है कि मेयर, डिप्टी मेयर और स्टेंडिंग कमेटी के चुनाव एक साथ करवाने के लिए कह रहे हैं। यह एक बहुत बड़ी बेईमानी है। यह बेईमानी सोचकर बीजेपी आज अपने घर से आई थी। पूरा देश देख रहा है कि पीठासीन अधिकारी एक तरह से तानाशाही चला रही हैं। सदन में नामित विधायकों का वोटिंग का अधिकार यह कहकर रद किया जा रहा है कि इन पर मुकदमे हैं। अगर हिंदुस्तान में अब अलग-अलग राज्यों में सरकारें बनेगी, वहां एक दिन का अस्थाई मेयर या स्पीकर बनता है तो वो अपनी मर्जी से किसी की भी वोटिंग खारिज करेगा। ऐसे में सरकार और चुनाव का कोई महत्व ही नहीं बचा।
ऐसे में आप तानाशाही से जहां पर जो सरकार बनाना चाहेंगे, वो बनाएंगे। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही इस देश के लिए बहुत बड़ा खतरा है। अब हम सड़क पर, सदन और कोर्ट में इस लड़ाई को लेकर जाएंगे। दिल्ली की जनता को न्याय दिलाने की कोशिश करेंगे। मेयर के चुनाव में मनोनीत सदस्य वोट नहीं दे सकते। यह बात संविधान, आर्टिकल 243आर और डीएमसी एक्ट के सेक्शन-3 में है। आज भाजपा एक छोटे से चुनाव में इतनी बड़ी बेईमानी कर रही हैं। पीठासीन अधिकारी एक साथ तीनों चुनाव अपने तरीके से कराकर एमसीडी में बीजेपी का शासन स्थापित करना चाहते है। जबकि दिल्लीवालों ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया है।
आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह, विधायक दुर्गेश पाठक, विधायक आतिशी और विधायक सौरभ भारद्वाज ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। संजय सिंह ने कहा कि आज दिल्ली के लोगों ने एक बार फिर देखा कि भाजपा ने लोकतंत्र, संविधान और डीएमसी एक्ट का गला घोंटते हुए एमसीडी के मेयर, डिप्टी मेयर और स्थाई समिति का चुनाव नहीं होने दिया। ‘आप’ के पास 151 वोट हैं और भाजपा के पास मात्र 105 वोट हैं। पीठासीन अधिकारी को सिर्फ मेयर का चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है। पीठासीन अधिकारी अब कह रही हैं कि एल्डरमैन भी वोट डालेंगे।
उन्होंने कहा कि यह संविधान और डीएमसी एक्ट के अनुसार गलत है। मेयर, डिप्टी मेयर और स्थाई समिति तीनों चुनाव एक साथ कराने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि यह एजेंडे में कहीं नहीं था। क्या दिल्ली के एलजी के आदेश का कोई मतलब है या वो भाजपा के साथ मिलकर पूरा खेल कर रहे हैं। क्या भारत के संविधान का कोई मतलब है या संविधान का इसी तरह गला घोंटा जाएगा। क्या इस देश में, लोकतंत्र में चुनाव का कोई महत्व है या दिल्ली की जनता के जनादेश का इसी तरह से गला घोंटा जाएगा। इसकी कोई जवाबदेही नहीं है।
वहीं विधायक दुर्गेश पाठक ने कहा कि भाजपा की कोई दिलचस्पी नहीं है कि दिल्ली की जनता ने एमसीडी में जिस पार्टी को जनादेश दिया है, उसकी सरकार चले। पूरी दिल्ली को पता है कि आम आदमी पार्टी को भारी बहुमत है। उसके बाद भी मेयर, डिप्टी मेयर और स्थाई समिति का चुनाव नहीं होने दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कल यह खबर प्रचारित की जा रही थी कि आम आदमी पार्टी के 20 पार्षद भाजपा में शामिल हो रहे हैं। वहीं, आज भाजपा प्रेस वार्ता कर कह रही है कि आम आदमी पार्टी वाले भाजपा के पार्षदों को तोड़ रहे हैं। सुबह 11 बजे चुनाव का समय था, लेकिन प्रोटेम स्पीकर 11.45 बजे आईं और कहीं कि एल्डरमैन भी वोट करेंगे। हमारे सदन के नेता ने उनसे पूछा कि किस एक्ट के तहत एल्डरमैन वोट करेंगे।
इस बीच विधायक आतिशी ने कहा कि हमारी मांग है कि समयबद्ध तरीके से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मेयर का चुनाव हो और एल्डरमैन को वोट न डालने दिया जाए। क्योंकि संविधान और कानून भी यही कहता है कि एल्डरमैन के पास वोट डालने का अधिकार नहीं है। हम सुप्रीम कोर्ट से अपील करेंगे कि उनकी निगरानी में हफ्ते-दस दिन में मेयर का चुनाव हो जाए। सत्या शर्मा ने मजाक बना दिया है। वो आधे घंटे में ही सदन को स्थगित कर देती हैं। वो आधे घंटे का ब्रेक के लिए भी कह सकती थीं और उसके बाद वोटिंग करा सकती थीं। सदन में हंगामा कर वोट नहीं होने देने का भाजपा का पहले से प्लान था।
वहीं ‘आप’ के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ऐसी बेईमानी कभी नहीं देखी गई। पीठासीन अधिकारी, जो 2-3 घंटे की मेयर होती हैं, वो कह रही है कि मनोनित पार्षद भी वोट डालेंगे। पहली बेईमानी तो यह है। दूसरी बेईमानी यह है कि मेयर, डिप्टी मेयर और स्टेंडिंग कमेटी के चुनाव एक साथ करवाने के लिए कह रहे हैं। यह एक बहुत बड़ी बेईमानी है। यह बेईमानी सोचकर बीजेपी आज अपने घर से आई थी। पूरा देश देख रहा है कि पीठासीन अधिकारी एक तरह से तानाशाही चला रही हैं। सदन में नामित विधायकों का वोटिंग का अधिकार यह कहकर रद किया जा रहा है कि इन पर मुकदमे हैं। अगर हिंदुस्तान में अब अलग-अलग राज्यों में सरकारें बनेगी, वहां एक दिन का अस्थाई मेयर या स्पीकर बनता है तो वो अपनी मर्जी से किसी की भी वोटिंग खारिज करेगा। ऐसे में सरकार और चुनाव का कोई महत्व ही नहीं बचा।
ऐसे में आप तानाशाही से जहां पर जो सरकार बनाना चाहेंगे, वो बनाएंगे। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही इस देश के लिए बहुत बड़ा खतरा है। अब हम सड़क पर, सदन और कोर्ट में इस लड़ाई को लेकर जाएंगे। दिल्ली की जनता को न्याय दिलाने की कोशिश करेंगे। मेयर के चुनाव में मनोनीत सदस्य वोट नहीं दे सकते। यह बात संविधान, आर्टिकल 243आर और डीएमसी एक्ट के सेक्शन-3 में है। आज भाजपा एक छोटे से चुनाव में इतनी बड़ी बेईमानी कर रही हैं। पीठासीन अधिकारी एक साथ तीनों चुनाव अपने तरीके से कराकर एमसीडी में बीजेपी का शासन स्थापित करना चाहते है। जबकि दिल्लीवालों ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया है।

