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दिल्ली में हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा 19-20 नवंबर को हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन

देश के 8 राज्यों के 45 से अधिक संगठन लेंगे सहभाग; हिन्दू राष्ट्र संसद के माध्यम से होगी हिन्दू हित की चर्चा 
 
दिल्ली में हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा 19-20 नवंबर को हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन

नई दिल्ली - हिन्दू राष्ट्र स्थापना हेतु वैचारिक, संवैधानिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर मंथन हो, हिन्दू समाज का नेतृत्व करनेवाले हिन्दू संगठनों का महासंगठन बने, हिन्दू धर्म पर हो रहे आघातों के विषय में एक समान कृति कार्यक्रम निश्चित कर हिन्दू राष्ट्र स्थापना की मांग प्रबल हो, इस उद्देश्य से हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा राजधानी देहली में 19 तथा 20 नवंबर 2022 को ‘उत्तर भारत हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ का आयोजन किया गया है। अधिवेशन में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से पधारे प्रबुद्धजनों का उद्बोधन होगा । धर्मरक्षा का कार्य करते समय आने वाली बाधाएं एवं किए प्रयासों पर संगठन अपना अनुभव सबके समक्ष रखेंगे । साथ ही गुटचर्चा के माध्यम से समान सूत्री कार्यक्रम तय किया जाएगा । इस अधिवेशन हेतु उत्तर भारत के पूर्व उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, देहली, राजस्थान एवं मध्यप्रदेश आदि 8 राज्यों से 300 मान्यवरों को आमंत्रित किया गया है । जिसमें हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के पदाधिकारी, मंदिर विश्वस्त, अधिवक्ता, विचारक इनका समावेश हैं । 

अधिवेशन हेतु हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे जी, 'सुदर्शन वाहिनी' के मुख्य संपादक श्री. सुरेश चव्हाणके, ‘ज्ञानवापी’ मुक्ति के लिए लडने वाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, हिंदू इकोसिस्टम के संस्थापक अध्यक्ष श्री. कपिल मिश्रा जी, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे तथा सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस इनके साथ अनेक मान्यवरों का उद्बोधन होगा ।  

विश्व के अधिकांश देश अपने बहुसंख्यक समाज का धर्म, संस्कृति, भाषा एवं हित को संरक्षण देते है । इसके विपरीत भारत में इस्लाम, इसाई तथा अन्य अल्पसंख्यक पंथों को 'अनुच्छेद 29' एवं 'अनुच्छेद 30' द्वारा विशेष संरक्षण दिया गया है । हिन्दू धर्म पर हो रहे आघात रोकने के साथ सनातन धर्म की रक्षा के लिए भारत हिन्दू राष्ट्र घोषित होना आवश्यक है । इस दृष्टी से इस अधिवेशन में मंदिर मुक्ति, हलाल जिहाद का विरोध, ‘धर्मांतरण प्रतिबंधक’ कानून, विस्थापित कश्मीरी हिन्दुओं का पुनर्वसन; पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के हिन्दुओं पर हुए अत्याचार एवं उनकी सुरक्षा, जैसे विभिन्न ज्वलंत विषयों पर मंथन होगा । 

हिन्दू राष्ट्र संसद के 2 विशेष सत्र इस अधिवेशन में होंगे । जिसमें मंदिर रक्षा एवं संवर्धन तथा नर्इ शिक्षा नीती, इन विषयों पर यह सत्र रहेंगे । जिसमें सहभागी प्रतिनिधी इन विषयों को लेकर अपने प्रस्ताव हिन्दू राष्ट्र संसद में रखेंगे । इस दो दिवसीय अधिवेशन के उपरान्त हिन्दू समाज की मांगे प्रस्ताव के रूप में सरकार के समक्ष रखी जाएगी । 

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