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साधारण कपड़े को आकर्षक और कलात्मक रूप देने वाली पारंपरिक तकनीकें

 
 साधारण कपड़े को आकर्षक और कलात्मक रूप देने वाली पारंपरिक तकनीकें

 लेखमाला भाग–15

टाई-डाई, बाटिक और ब्लॉक प्रिंटिंग

फैशन डिजाइनिंग में केवल परिधान की कटिंग, सिलाई और फिटिंग ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि कपड़े की सतह को आकर्षक और विशिष्ट बनाना भी डिजाइन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कपड़े पर रंग, आकृति, बनावट और पैटर्न के माध्यम से नया स्वरूप देने की प्रक्रिया को सरफेस डिजाइन कहा जाता है। टाई-डाई, बाटिक और ब्लॉक प्रिंटिंग ऐसी प्रमुख तकनीकें हैं, जिनका भारतीय वस्त्र परंपरा में लंबे समय से उपयोग होता आ रहा है। आधुनिक फैशन में भी इन तकनीकों को नए रंगों और डिजाइन के साथ अपनाया जा रहा है।

टाई-डाई तकनीक

टाई-डाई में कपड़े के कुछ हिस्सों को धागे, रबर बैंड या अन्य माध्यम से कसकर बांधा जाता है और उसके बाद कपड़े को रंगा जाता है। बंधे हुए हिस्सों तक रंग पूरी तरह नहीं पहुंच पाता, जिससे कपड़े पर अलग-अलग आकृतियां और सुंदर पैटर्न बन जाते हैं। कपड़े को मोड़ने, बांधने और रंगों के प्रयोग के तरीके में बदलाव करके अनेक प्रकार के डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं।

राजस्थान और गुजरात की प्रसिद्ध बंधनी तथा राजस्थान का लहरिया इसी कला के लोकप्रिय रूप हैं। आज टाई-डाई का प्रयोग दुपट्टे और साड़ियों तक सीमित नहीं है। कुर्ती, टी-शर्ट, स्कर्ट, बच्चों के परिधान और अन्य फैशन उत्पादों में भी इसका व्यापक प्रयोग किया जा रहा है।

बाटिक तकनीक

बाटिक कपड़े को सजाने की एक विशेष रेजिस्ट-डाइंग तकनीक है। इसमें कपड़े के जिन हिस्सों पर रंग नहीं चढ़ाना होता, वहां गर्म मोम लगाया जाता है। इसके बाद कपड़े को रंग में डुबोया जाता है। रंगाई पूरी होने के बाद मोम हटाने पर रंगे और बिना रंगे हिस्सों के मेल से आकर्षक डिजाइन सामने आता है।

इस प्रक्रिया को अलग-अलग रंगों के साथ दोहराकर बहुरंगी और जटिल डिजाइन भी तैयार किए जा सकते हैं। बाटिक की विशेष पहचान उसमें दिखाई देने वाली महीन दरारों जैसी रेखाएं हैं। यही प्रभाव प्रत्येक बाटिक डिजाइन को एक अलग कलात्मक स्वरूप प्रदान करता है।

ब्लॉक प्रिंटिंग

ब्लॉक प्रिंटिंग वस्त्र सज्जा की अत्यंत प्रसिद्ध पारंपरिक तकनीक है। इसमें लकड़ी के नक्काशीदार ब्लॉक पर रंग लगाकर उसे कपड़े पर दबाया जाता है। फूल-पत्तियां, ज्यामितीय आकृतियां और पारंपरिक रूपांकन इसके प्रमुख डिजाइन होते हैं। एक ही ब्लॉक को निश्चित क्रम में बार-बार छापकर पूरे कपड़े पर सुंदर पैटर्न तैयार किया जाता है।

राजस्थान की सांगानेरी और बगरू प्रिंटिंग भारतीय ब्लॉक प्रिंटिंग की प्रसिद्ध शैलियां हैं। आज पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग को आधुनिक परिधानों, होम फर्निशिंग और फैशन एक्सेसरीज में भी नए प्रयोगों के साथ अपनाया जा रहा है।

फैशन डिजाइनिंग के विद्यार्थियों के लिए इन तीनों तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान विशेष महत्व रखता है। इनके अभ्यास से विद्यार्थी रंग संयोजन, पैटर्न निर्माण, डिजाइन संतुलन और कपड़े की सतह को रचनात्मक रूप देने की कला सीखते हैं। इन तकनीकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विद्यार्थी अपनी कल्पना के अनुसार नए प्रयोग कर सकता है। यही रचनात्मकता एक साधारण कपड़े को विशिष्ट परिधान में बदलती है और भविष्य के डिजाइनर को अपनी अलग पहचान विकसित करने में सहायता करती है।

कंचन मेहता
एम.ए. फैशन डिजाइनिंग
इंस्ट्रक्टर, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा