हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने में विफल हरियाणा सरकार, दूषित पानी से लोगों के स्वास्थ्य पर बढ़ रहा खतरा : कुमारी सैलजा

चंडीगढ़, 30 जुलाई।
सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य कुमारी सैलजा ने हरियाणा में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सामने आई रिपोर्ट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में विफल रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों, विशेषकर सीमावर्ती गांवों से लगातार प्रदूषित पेयजल और पानी की कमी की शिकायतें मिल रही हैं। वर्षा ऋतु के दौरान भी अनेक गांवों में पेयजल संकट बना हुआ है, जो बेहद चिंताजनक है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में जांचे गए प्रत्येक 11वें पेयजल नमूने में गुणवत्ता संबंधी खामियां पाई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार 855 गांवों में पेयजल में बैक्टीरिया तथा 247 गांवों में रासायनिक प्रदूषण मिला है। यह स्थिति प्रदेश की पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दूषित पानी के कारण डायरिया, टाइफाइड, पीलिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा का दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए सरकार को प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए। कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार प्रभावित गांवों की सूची सार्वजनिक करे, जल स्रोतों की नियमित जांच, पाइपलाइन की मरम्मत, क्लोरीनेशन तथा जहां आवश्यक हो वहां वैकल्पिक रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। स्वच्छ पेयजल प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इस विषय पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
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राहुल गांधी के उठाए सवालों का जवाब दे सरकार,
लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाना उचित नहीं : कुमारी सैलजा
सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती सत्ता और विपक्ष दोनों को समान अवसर मिलने में है, यदि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हैं, तो सरकार को तथ्यों के आधार पर स्पष्ट उत्तर देना चाहिए, न कि विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास करना चाहिए। सैलजा ने कहा कि युवाओं और छात्रों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवाद लोकतंत्र की मूल भावना है। सरकार को टकराव के बजाय लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सदन और देश के सामने सभी तथ्यों को स्पष्ट करना चाहिए

