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बिजली कर्मचारियों का भविष्य अधर में, जनता परेशान; ऐसी नाकाम सरकार को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं

 
 बिजली कर्मचारियों का भविष्य अधर में, जनता परेशान; ऐसी नाकाम सरकार को सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं

 चंडीगढ़/सिरसा, 23 अक्टूबर। 

सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण और बिजली आपूर्ति संकट को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। सांसद ने कहा कि यह बड़ी विडंबना है कि हरियाणा सरकार को खुद नहीं मालूम कि प्रदेश में क्या हो रहा है। सरकार कुछ कहती है और होता कुछ और है। सरकार की कथनी और करनी में भारी विरोधाभास दिखाई दे रहा है, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने का फैसला हो जाता है और सरकार कहती है कि वह इसके खिलाफ अपील करेगी। आखिर सरकार बताए कि वह किसके खिलाफ अपील करेगी? जब उसकी अपनी नीतियों के तहत निजीकरण का रास्ता खुला है तो अब जिम्मेदारी से बचने का प्रयास क्यों किया जा रहा है? भाजपा सरकार को इस पूरे मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

सांसद ने कहा कि बिजली कर्मचारियों को न इधर का छोड़ा जा रहा है, न उधर का। उनके भविष्य और सेवा सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। दूसरी ओर गुरुग्राम, सिरसा, हिसार, जींद, रोहतक, पानीपत, फरीदाबाद, करनाल और अंबाला सहित विभिन्न क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की शिकायतों से आम जनता परेशान है। किसान, व्यापारी, छोटे उद्योग और घरेलू उपभोक्ता इसका खामियाजा भुगत रहे हैं।

कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस बिजली जैसी आवश्यक सेवा को मुनाफे का साधन बनाने के बजाय जनकल्याण की जिम्मेदारी मानती है। सुधार के नाम पर सरकारी बिजली निगमों को कमजोर करना उचित नहीं है। सरकार बताए कि निजीकरण से बिजली दरों, किसानों की रियायतों और गरीब उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा कैसे होगी।

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जो सरकार अपनी नीतियों और फैसलों की जिम्मेदारी नहीं ले सकती, उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं 

सांसद ने मांग की कि सरकार कर्मचारियों से तत्काल बातचीत करे, निजीकरण संबंधी फैसले की समीक्षा करवाए और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करे। कुमारी सैलजा ने कहा कि जो सरकार अपनी नीतियों और फैसलों की जिम्मेदारी नहीं ले सकती, उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। जनता को बिजली चाहिए, भाजपा सरकार की निजीकरण नीति का अंधेरा नहीं।