परिधानों में फैब्रिक फॉल एवं टेक्सचर दिखाने की कला

फैशन इलस्ट्रेशन केवल परिधान की आकृति बनाने तक सीमित नहीं है। एक प्रभावशाली फैशन स्केच वही माना जाता है, जिसमें कपड़े की प्रकृति, उसकी गिरावट, मोटाई, चमक और सतह स्पष्ट दिखाई दे। फैब्रिक फॉल और टेक्सचर का सही चित्रण साधारण डिजाइन को भी जीवंत एवं आकर्षक बना देता है। इसे देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि तैयार परिधान शरीर पर कैसा दिखाई देगा।
फैब्रिक फॉल का अर्थ
फैब्रिक फॉल से आशय है कि कोई कपड़ा शरीर या ड्रेस फॉर्म पर किस प्रकार गिरता, मुड़ता और आकार ग्रहण करता है। प्रत्येक कपड़े का वजन, मोटाई, लचीलापन और बुनावट अलग होती है। इसलिए उसके गिरने का स्वरूप भी अलग दिखाई देता है।
शिफॉन, जॉर्जेट और क्रेप जैसे हल्के कपड़ों में मुलायम तथा लहरदार फॉल दिखाई देती है। कॉटन और लिनन में अपेक्षाकृत स्पष्ट सिलवटें बनती हैं, जबकि सिल्क और साटन में चमक के साथ प्रवाहपूर्ण गिरावट दिखाई देती है। डेनिम, खादी और ऊनी कपड़े मोटे होते हैं, इसलिए उनकी फोल्ड अधिक गहरी, चौड़ी और स्पष्ट बनाई जाती हैं।
फोल्ड और सिलवटों का महत्व
परिधान की फोल्ड बनाते समय यह समझना आवश्यक है कि कपड़े पर खिंचाव कहां से पड़ रहा है। कंधे, कमर, कोहनी, घुटने और बैठने की मुद्रा वाले हिस्सों में सिलवटें अधिक बनती हैं। सभी सिलवटों को एक जैसा बनाने से परिधान अस्वाभाविक दिखाई देता है।
हल्के कपड़े की फोल्ड के लिए पतली और प्रवाहपूर्ण रेखाओं का प्रयोग करना चाहिए। भारी कपड़े में मजबूत, गहरी तथा कम संख्या में रेखाएं बनाई जाती हैं। जहां प्रकाश पड़ता है, वह भाग हल्का और उभरा हुआ दिखाया जाता है, जबकि अंदर की ओर मुड़ी फोल्ड को गहरे शेड से दर्शाया जाता है। प्रकाश और छाया का उचित प्रयोग परिधान को त्रि-आयामी रूप देता है।
टेक्सचर दिखाने की तकनीक
टेक्सचर का अर्थ कपड़े की सतह और स्पर्श संबंधी विशेषता से है। फैशन इलस्ट्रेशन में टेक्सचर दिखाते समय पूरे परिधान पर अनावश्यक रेखाएं बनाने के बजाय उसके प्रमुख हिस्सों पर संकेतात्मक चित्रण करना अधिक प्रभावी रहता है।
डेनिम दिखाने के लिए हल्की खुरदरी रेखाएं, जेबों की सिलाई और गहरे-हल्के नीले शेड प्रयोग किए जा सकते हैं। ऊन के लिए छोटी, घुमावदार और मुलायम रेखाएं उपयोगी रहती हैं। साटन और सिल्क की चमक दिखाने के लिए गहरे रंग के साथ कुछ सफेद स्थान छोड़े जाते हैं। नेट और लेस के लिए महीन जाली, फूल या पारदर्शी पैटर्न बनाए जाते हैं। वेलवेट में गहरे रंग तथा नियंत्रित हाइलाइट उसकी मुलायम और घनी सतह को दर्शाते हैं।
कढ़ाई, सीक्विन और बीडवर्क को छोटे चमकीले बिंदुओं एवं सीमित हाइलाइट से दिखाया जा सकता है। प्रिंटेड फैब्रिक बनाते समय डिजाइन की दिशा और आकार का ध्यान रखना चाहिए। शरीर की गोलाई तथा परिधान की फोल्ड के अनुसार प्रिंट भी मुड़ता हुआ दिखाई देना चाहिए।
रंग माध्यम का सही चयन
फैब्रिक रेंडरिंग के लिए रंगीन पेंसिल, वॉटर कलर, मार्कर, पेस्टल और डिजिटल सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा सकता है। वॉटर कलर शिफॉन और जॉर्जेट जैसे पारदर्शी कपड़ों के लिए उपयोगी है। मार्कर से गहरे और साफ रंग मिलते हैं, जबकि रंगीन पेंसिल से महीन टेक्सचर तथा कढ़ाई आसानी से बनाई जा सकती है।
विद्यार्थियों को अलग-अलग कपड़ों के वास्तविक नमूनों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना चाहिए। कपड़े को मोड़कर उस पर पड़ने वाले प्रकाश, छाया और सिलवटों को देखकर अभ्यास करने से फैब्रिक फॉल तथा टेक्सचर के चित्रण में निखार आता है। निरंतर अभ्यास से ही डिजाइनर अपने स्केच में कपड़े की वास्तविक सुंदरता, गति और उपयोगिता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सकता है।
कंचन मेहता
एम.ए. फैशन डिजाइनिंग, इंस्ट्रक्टर, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा।

