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सर्फेस ऑर्नामेंटेशन एवं एम्ब्रॉयडरी: साधारण कपड़े को आकर्षक बनाने की कला कढ़ाई, एप्लिक, पैचवर्क, बीडवर्क और फैब्रिक पेंटिंग से परिधानों को मिलती है विशिष्ट पहचान

 
  सर्फेस ऑर्नामेंटेशन एवं एम्ब्रॉयडरी: साधारण कपड़े को आकर्षक बनाने की कला  कढ़ाई, एप्लिक, पैचवर्क, बीडवर्क और फैब्रिक पेंटिंग से परिधानों को मिलती है विशिष्ट पहचान

 फैशन डिजाइनिंग लेखमाला – भाग 16

कंचन मेहता
एम.ए. फैशन डिजाइनिंग, इंस्ट्रक्टर, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा

फैशन डिजाइनिंग में कपड़े की बनावट, रंग और सिलाई जितने महत्वपूर्ण होते हैं, उतनी ही अहम उसकी सतही सजावट भी है। सर्फेस ऑर्नामेंटेशन का अर्थ कपड़े की ऊपरी सतह को विभिन्न कलात्मक तकनीकों से आकर्षक बनाना है। इससे साधारण कपड़े को सुंदर, विशिष्ट और मूल्यवान परिधान में बदला जा सकता है। कढ़ाई, एप्लिक, पैचवर्क, बीडवर्क, मिरर वर्क, सीक्विन, फैब्रिक पेंटिंग और ब्लॉक प्रिंटिंग इसकी प्रमुख तकनीकें हैं।

सर्फेस ऑर्नामेंटेशन केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि डिजाइनर की रचनात्मक सोच और कलात्मक अभिव्यक्ति भी है। इसका चुनाव परिधान की शैली, उपयोग, अवसर, कपड़े की प्रकृति और पहनने वाले व्यक्ति को ध्यान में रखकर किया जाता है। संतुलित सजावट परिधान की सुंदरता बढ़ाती है, जबकि आवश्यकता से अधिक सजावट उसे भारी और असंतुलित बना सकती है।

भारतीय परंपरा में विशेष स्थान

भारतीय वस्त्र परंपरा में सतही सजावट का विशेष महत्व रहा है। पंजाब की फुलकारी, उत्तर प्रदेश की चिकनकारी, पश्चिम बंगाल की कांथा, कश्मीर की कशीदाकारी, गुजरात की कच्छ कढ़ाई, कर्नाटक की कसूती और राजस्थान की गोटा-पट्टी देश की समृद्ध शिल्प विरासत का प्रतिनिधित्व करती हैं।

इन तकनीकों में रंगीन धागों, टांकों, शीशों, मोतियों और अन्य सजावटी सामग्री का सुंदर प्रयोग होता है। आधुनिक डिजाइनर पारंपरिक कलाओं से प्रेरणा लेकर नए रंगों, आकृतियों और सामग्री के साथ समकालीन परिधान तैयार कर रहे हैं। इससे स्थानीय कारीगरों और हस्तकलाओं को भी प्रोत्साहन मिलता है।

हाथ और मशीन की कढ़ाई

कढ़ाई सर्फेस ऑर्नामेंटेशन की सर्वाधिक लोकप्रिय तकनीकों में शामिल है। हाथ की कढ़ाई में कपड़े पर डिजाइन बनाकर सुई और रंगीन धागों से विभिन्न टांके लगाए जाते हैं। रनिंग, चेन, सैटिन, स्टेम, हेरिंगबोन, ब्लैंकेट स्टिच और फ्रेंच नॉट इसके प्रमुख टांके हैं। प्रत्येक टांका अलग बनावट और प्रभाव उत्पन्न करता है। बेहतर परिणाम के लिए डिजाइन के अनुरूप सुई, धागे, फ्रेम और कपड़े का चयन आवश्यक है।

मशीन कढ़ाई से कम समय में साफ और एक समान डिजाइन बनाए जा सकते हैं। आधुनिक कम्प्यूटरीकृत मशीनें डिजिटल डिजाइन के आधार पर बड़ी संख्या में समान नमूने तैयार करती हैं। फिर भी हाथ की कढ़ाई की कलात्मकता और विशिष्ट पहचान अलग होती है।

एप्लिक, पैचवर्क और बीडवर्क

एप्लिक में एक कपड़े से काटी गई आकृति को दूसरे कपड़े पर सजावटी सिलाई अथवा फ्यूजिंग से जोड़ा जाता है। पैचवर्क में अलग-अलग रंगों, प्रिंटों और बनावट वाले कपड़ों के छोटे टुकड़े जोड़कर नया डिजाइन बनाया जाता है। बचे हुए कपड़ों के उपयोग के कारण पैचवर्क टिकाऊ फैशन और अपसाइक्लिंग को भी बढ़ावा देता है।

बीडवर्क में मोतियों के साथ सीक्विन, स्टोन और क्रिस्टल आदि कपड़े पर लगाए जाते हैं। मिरर वर्क में छोटे शीशों को सजावटी टांकों से स्थिर किया जाता है। इन तकनीकों का प्रयोग ब्राइडल वियर, पार्टी वियर, साड़ियों, लहंगों और दुपट्टों में प्रमुखता से होता है। सजावट का वजन कपड़े की क्षमता के अनुरूप होना चाहिए।

फैब्रिक पेंटिंग और डिजाइन संतुलन

फैब्रिक पेंटिंग में विशेष रंगों और ब्रश से फ्रीहैंड, स्टेंसिल, स्पंज अथवा ब्लॉक तकनीक द्वारा डिजाइन बनाए जाते हैं। रंग लगाने से पहले कपड़े को धोकर और प्रेस करके तैयार करना चाहिए। ब्लॉक प्रिंटिंग में रंग लगे ब्लॉक को निश्चित क्रम में कपड़े पर छापकर आकर्षक पैटर्न तैयार किया जाता है।

सजावट करते समय रंग, रेखा, आकार, बनावट, अनुपात, लय और सामंजस्य का ध्यान रखना जरूरी है। गले, आस्तीन, बॉर्डर, पल्लू, जेब, कफ और कमर के आसपास की गई सजावट परिधान के महत्वपूर्ण हिस्सों को उभार सकती है।

विद्यार्थियों को छोटे नमूनों पर इन तकनीकों का अभ्यास कर स्वैच फाइल अथवा पोर्टफोलियो तैयार करना चाहिए। यह ज्ञान डिजाइनर वियर, ब्राइडल वियर, घरेलू सजावट, हस्तशिल्प, बुटीक और निर्यात इकाइयों में रोजगार के अवसर देता है। सही तकनीक, सामग्री और संतुलित डिजाइन से साधारण कपड़े को आकर्षक तथा कलात्मक परिधान में बदला जा सकता है