एसआईआर से बंगाल चुनाव के नतीजों पर असर के तृणमूल के दावों पर सुप्रीम कोर्ट ने नई याचिकाएं दाखिल करने को दी मंजूरी
May 11, 2026, 20:21 IST

नई दिल्ली, 11 मई उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान वोटर हटाए जाने के कारण विधानसभा चुनाव का परिणाम प्रभावित करने के दावों पर नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं।
सोमवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण का असर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों पर हुआ है।
सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी ने कहा कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से कम था, जिनके नाम विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। कल्याण बनर्जी ने एक सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां उनकी पार्टी का उम्मीदवार सिर्फ 862 वोटों से हारा था जबकि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान उस निर्वाचन क्षेत्र से पांच हजार से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे।
कल्याण बनर्जी ने कहा कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कुल वोटों का अंतर लगभग 32 लाख था, जबकि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों के खिलाफ दायर अपीलों की संख्या 35 लाख से ज्यादा है। बनर्जी ने कहा कि इन अपीलों के निपटारे में कई साल लग सकते हैं जो चिंता की बात है। तब उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में जीत का अंतर वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों की संख्या से कम है तो संबंधित पक्ष याचिका दायर कर सकते हैं।
सोमवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण का असर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों पर हुआ है।
सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी ने कहा कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से कम था, जिनके नाम विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। कल्याण बनर्जी ने एक सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां उनकी पार्टी का उम्मीदवार सिर्फ 862 वोटों से हारा था जबकि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान उस निर्वाचन क्षेत्र से पांच हजार से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे।
कल्याण बनर्जी ने कहा कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कुल वोटों का अंतर लगभग 32 लाख था, जबकि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों के खिलाफ दायर अपीलों की संख्या 35 लाख से ज्यादा है। बनर्जी ने कहा कि इन अपीलों के निपटारे में कई साल लग सकते हैं जो चिंता की बात है। तब उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में जीत का अंतर वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों की संख्या से कम है तो संबंधित पक्ष याचिका दायर कर सकते हैं।

