छात्र को नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सीजेआई सूर्यकांत ने बोले- मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत कैसे हुई?

नई दिल्ली, 09 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के चलते ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किए जाने पर सख्त नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का आदेश एकदम स्पष्ट था कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत कैसे हुई कि वो नोटिस जारी करे। कोई मजिस्ट्रेट कैसे हमारे आदेश का उल्लंघन कर सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट मजिस्ट्रेट से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगेगा। यह नोटिस गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को चार सितंबर को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 130 के तहत जारी किया गया था। यह कार्रवाई सहायक पुलिस आयुक्त की ओर से शुरू की गई कार्रवाई के बाद की गई।
नोटिस में कहा गया था कि अक्षत त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों को काकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा कर रहे थे और पुलिस के मुताबिक, सरकार विरोधी और भ्रामक सूचनाएं फैला रहे थे।
अक्षत को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया था कि क्यों उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने का आदेश न दिया जाए और इसके लिए उनसे पांच लाख रुपये का निजी मुचलका तथा इतनी ही राशि के दो स्थानीय जमानतदार पेश करने को कहा जाए।
अक्षत त्रिपाठी की ओर से पेश वकील ने मुख्य न्यायाधीश के सामने मामला रखते हुए कहा कि हालांकि, इस नोटिस को वापस ले लिया गया है, लेकिन कोर्ट के आदेश को धता बताकर नोटिस जारी करना अपने आप में कोर्ट की अवमानना है।

