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यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

 
  यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली, 28 सितंबर । उच्चतम न्यायालय ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से दाे हजार रुपये से अधिक के वाणिज्यिक लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर)शुल्क लगाने के सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर आज केन्द्र, भारतीय रिजर्व बैंक एवं भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम काे नाेटिस जारी करके जवाब तलब किया।
हालांकि उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार के दो हजार रुपये से ज्यादा के लेनदेन के लिए जीरो-मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) वाली कानूनी सुरक्षा को वापस लेने के फैसले पर फिलहाल रोक नहीं लगाई है।
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आज इस संबंध में एक याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम काे नाेटिस जारी करके यह बताने को कहा कि यूपीआई लेनदेन के लिए जीरो-मर्चेंट डिस्काउंट रेट वाली कानूनी सुरक्षा को वापस लेने का आधार क्या है। अदालत ने यह जवाब चार सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि जब रुपे डेबिट कार्ड पर बिना किसी सीमा के निशुल्क लेनदेन की सुविधा जारी है, तो यूपीआई पर शुल्क लगाना भेदभावपूर्ण है।
याचिका वकील अंजनी दत्ता ने दायर की है जिसमें 15 अक्टूबर से प्रभावी होने वाले प्रस्तावित यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का विरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि दो हजार रुपये से ऊपर के यूपीआई भुगतान पर लेवी लगाई गई है, वहीं बिना किसी मौद्रिक सीमा के रुपे संचालित डेबिट कार्ड पर समान नो-चार्ज सुरक्षा जारी रखी गई है। याचिका में देश भर में अनिवार्य भुगतान का बोझ डालने को चुनौती देते हुए कहा गया है, जिसमें लागत से जुड़े शोध, इसके पीछे की कार्यप्रणाली या लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने से रोकने वाले मजबूत सुरक्षा उपायों का खुलासा नहीं किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि भले ही आधिकारिक तौर पर यह कहा गया हो कि व्यापारी इन लागतों का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकते, लेकिन रसीदों पर लगने वाली फीस आखिरकार कीमतों में शामिल हो ही जाएगी। इससे कार्यशील पूंजी कम हो सकती है या कम मार्जिन वाले व्यापारी यूपीआई भुगतान लेने से इनकार कर सकते हैं या लेनदेन को कई हिस्सों में बांट सकते हैं।
सरकार ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का फैसला 15 अक्टूबर से लागू करने का फैसला किया है। दो हजार रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगेगा। यह शुल्क सीधे सरकार के राजस्व में नहीं जाएगा, बल्कि इसे बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर सेवा शुल्क के रूप में वसूलेंगे।
उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग छह वर्षों से यूपीआई भुगतान पूरी तरह निशुल्क थे। सरकार का कहना है कि एमडीआर एक सेवा शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान प्रणाली को टिकाऊ बनाने और बैंकों एवं एग्रीगेटरों की लागत को संतुलित करने के लिए आवश्यक है। नई व्यवस्था में कुछ विशेष क्षेत्रों जैसे रेलवे, बीमा, दूरसंचार, ईंधन और कृषि इनपुट पर केवल 5 रुपए का एकसमान शुल्क लगेगा, जबकि म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज़ में निवेश जैसे लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जिसे 300 रुपए तक सीमित किया गया है। वहीं, व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन और छोटे भुगतान पूरी तरह निशुल्क रहेंगे।