सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को इच्छामृत्यु देने की पिता की अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखा
Updated: Jan 15, 2026, 20:07 IST

नई दिल्ली, 15 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने बेटे को इच्छामृत्यु देने के लिए पिता की अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। 31 वर्षीय बेटा पिछले 12 साल से अधिक समय से कोमा में है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
यह याचिका अशोक राणा ने दायर की है। 2013 में याचिकाकर्ता का बेटा हरीश राणा अपने पीजी हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गया था। गिरने के बाद से वो कोमा में है। हरीश राणा चंडीगढ़ में बीटेक कर रहा था। याचिका में कहा गया है कि एक मेडिकल बोर्ड बनाकर इसका पता लगाया जाए कि क्या जीवन रक्षक प्रणाली धीरे-धीरे हटायी जा सकती है।
इसके पहले याचिकाकर्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी थी। उच्चतम न्यायालय ने 2024 में याचिकाकर्ता को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि अगर आगे कोई दिशा-निर्देश की जरुरत हो, तो वो कोर्ट आ सकते हैं। 2024 के बाद याचिकाकर्ता के बेटे की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। तब याचिकाकर्ता ने दोबारा उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
यह याचिका अशोक राणा ने दायर की है। 2013 में याचिकाकर्ता का बेटा हरीश राणा अपने पीजी हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गया था। गिरने के बाद से वो कोमा में है। हरीश राणा चंडीगढ़ में बीटेक कर रहा था। याचिका में कहा गया है कि एक मेडिकल बोर्ड बनाकर इसका पता लगाया जाए कि क्या जीवन रक्षक प्रणाली धीरे-धीरे हटायी जा सकती है।
इसके पहले याचिकाकर्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी थी। उच्चतम न्यायालय ने 2024 में याचिकाकर्ता को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि अगर आगे कोई दिशा-निर्देश की जरुरत हो, तो वो कोर्ट आ सकते हैं। 2024 के बाद याचिकाकर्ता के बेटे की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। तब याचिकाकर्ता ने दोबारा उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

