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ट्रांसजेंडर संशोधन कानून पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

 
  ट्रांसजेंडर संशोधन कानून पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
नई दिल्ली, 04 मई  उच्चतम न्यायालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार से संबंधित कानून में संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने ट्रांसजेंडर कानून में संशोधन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह आदेश दिया।
याचिका में कहा गया है कि ट्रांसजेंडर संशोधन कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इस संशोधन के बाद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को खुद से अपने जेंडर की पहचान बताने की बजाय सरकार के वेरिफिकेशन और प्रमाणन की जरुरत होगी। याचिका में कहा गया है कि जेंडर की पहचान किसी व्यक्ति की गरिमा, स्वायत्तता और निजता का एक अहम पहलू है और इसे किसी चिकित्सकीय या प्रशासनिक स्क्रूटनी का मोहताज बनाकर नहीं रखा जा सकता है।
याचिका में उच्चतम न्यायालय के लीगल सर्विसेज अथॉरिटी बनाम केंद्र सरकार के फैसले का जिक्र किया गया है जिसमें उच्चतम न्यायालय ने स्वप्रमाणित जेंडर की पहचान को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए) और 21 के तहत मौलिक अधिकार माना है। याचिका में कहा गया है कि इस संशोधन के जरिए मौलिक कानून से पीछे हटने का काम किया गया है। ये संशोधन बराबरी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अलावा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन है। ट्रांसजेंडर की पहचान की प्रमाणन प्रक्रिया से उन्हें मिलने वाले कल्याणकारी लाभों और कानूनी सुरक्षा से वंचित होना पड़ेगा