नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट का केंद्र व एनटीए को नोटिस
Updated: May 25, 2026, 14:26 IST

नई दिल्ली, 25 मई उच्चतम न्यायालय ने मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश की परीक्षा नीट-यूजी पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को नोटिस जारी किया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि एनटीए ने पिछली घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया।
कोर्ट ने एनटीए से कहा कि वह हाई पावर्ड कमेटी की सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की तीन दिनों के अंदर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। ये कमेटी 2024 के आदेश के बाद बनाई गई थी, ताकि नीट व्यवस्था को मजबूत करने के सुझाव मिल सकें।
याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अलावा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, डॉ. ध्रुव और हरिशरण देवगन ने दायर की है। याचिका नीट परीक्षा में सुधार और पारदर्शिता को लेकर दाखिल की गई है। याचिका में मेडिकल प्रवेश परीक्षा को पूरे तरीके से बदलने और एनटीए पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि एनटीए को हटाकर एक नई अथॉरिटी का गठन कया जाना चाहिए जिसकी वैधानिक जवाबदेही और न्यायिक निगरानी हो।
याचिका में मांग की गई है कि 21 जून को नीट की होने वाली परीक्षा पेन और पेपर की बजाय कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) हो। याचिका में कहा गया है कि पूरी परीक्षा को सीबीटी में बदलने के लिए समयबद्ध योजना बनायी जानी चाहिए। इसमें साइबर सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों का बुनियादी ढांचा और अभ्यर्थियों की पहुंच का पूरा ब्यौरा शामिल हो। याचिकाओं में नीट 2026 के आयोजन में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के प्रणालीगत विफलता को चुनौती दी गई है। एफएआईएमए ने मामले की निगरानी उच्चतम न्यायालय द्वारा कराने और इसकी जांच उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज की अध्यक्षता में कराने की मांग की गई है।
याचिका में नीट 2026 दोबारा कराने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक हाई-पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी बनाने की मांग की गई है। याचिका में मांग की गई है कि जब तक नई स्वतंत्र परीक्षा संस्था औपचारिक रूप से नहीं बन जाती, तब तक इसी न्यायिक समिति की निगरानी में नीट 2026 की दोबारा परीक्षा कराई जाए।
कोर्ट ने एनटीए से कहा कि वह हाई पावर्ड कमेटी की सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की तीन दिनों के अंदर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। ये कमेटी 2024 के आदेश के बाद बनाई गई थी, ताकि नीट व्यवस्था को मजबूत करने के सुझाव मिल सकें।
याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अलावा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, डॉ. ध्रुव और हरिशरण देवगन ने दायर की है। याचिका नीट परीक्षा में सुधार और पारदर्शिता को लेकर दाखिल की गई है। याचिका में मेडिकल प्रवेश परीक्षा को पूरे तरीके से बदलने और एनटीए पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि एनटीए को हटाकर एक नई अथॉरिटी का गठन कया जाना चाहिए जिसकी वैधानिक जवाबदेही और न्यायिक निगरानी हो।
याचिका में मांग की गई है कि 21 जून को नीट की होने वाली परीक्षा पेन और पेपर की बजाय कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) हो। याचिका में कहा गया है कि पूरी परीक्षा को सीबीटी में बदलने के लिए समयबद्ध योजना बनायी जानी चाहिए। इसमें साइबर सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों का बुनियादी ढांचा और अभ्यर्थियों की पहुंच का पूरा ब्यौरा शामिल हो। याचिकाओं में नीट 2026 के आयोजन में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के प्रणालीगत विफलता को चुनौती दी गई है। एफएआईएमए ने मामले की निगरानी उच्चतम न्यायालय द्वारा कराने और इसकी जांच उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज की अध्यक्षता में कराने की मांग की गई है।
याचिका में नीट 2026 दोबारा कराने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक हाई-पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी बनाने की मांग की गई है। याचिका में मांग की गई है कि जब तक नई स्वतंत्र परीक्षा संस्था औपचारिक रूप से नहीं बन जाती, तब तक इसी न्यायिक समिति की निगरानी में नीट 2026 की दोबारा परीक्षा कराई जाए।

