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सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के हाई कोर्ट में लंबित और आरक्षित मामलों पर चिंता जताई

 
  सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के हाई कोर्ट में लंबित और आरक्षित मामलों पर चिंता जताई
नई दिल्ली, 29 मई। उच्चतम न्यायालय ने देश भर के उच्च न्यायालय में लंबित मामलों और फैसलों पर चिंता जताते हुए एक दिशा-निर्देश जारी किया है। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि जिन मामलों में फैसला सुरक्षित हो जाए, उनमें अधिकतम तीन महीने के अंदर फैसला सुना दिया जाए।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जमानत से जुड़े मामलों में आदेश आदर्श रुप से अगले दिन जारी किए जाएं और उसी दिन जेल प्रशासन तक पहुंचाया जाए। उच्चतम न्यायालय ने ये भी कहा कि जिन विचाराधीन कैदियों को जमानत मिल चुकी है, उनकी रिहाई उसी दिन या अधिकतम अगले दिन सुनिश्चित की जानी चाहिए। कोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि कोर्ट पहले अपने आदेश का प्रभावी हिस्सा खुली अदालत में सुनाएगी और विस्तृत कारण सात दिनों के भीतर वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। कोर्ट ने ये भी कहा कि जिस दिन फैसला सुरक्षित रखा गया हो उसकी जानकारी भी संबंधित उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाएगी।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया जाता है, तो मामला किसी दूसरी बेंच को सौंपा जा सकता है। अगर फैसले का कारण 30 दिनों के अंदर अपलोड नहीं किए जाते हैं, तो मामला वापस लेकर नई बेंच के समक्ष भेजा जा सकता है। उच्चतम न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वो इन दिशा-निर्देशों को संबंधित चीफ जस्टिस के समक्ष पेश करें, ताकि उन्हें प्रभावी रुप से अमल में लाया जा सके