सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी जमानत
Apr 24, 2026, 13:51 IST

नई दिल्ली, 24 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने 1984 सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया है। सज्जन कुमार का कहना था कि वो 7 से भी ज्यादा सालों से जेल में बंद है। उसकी पत्नी की सेहत बहुत खराब है। वो एक बार भी अपनी पत्नी से नहीं मिल पाया है।
कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय से मिली सजा के खिलाफ सज्जन कुमार की अपील पर हम जुलाई में सुनवाई करेंगे। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने फरवरी, 2005 में सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामला 1 नवंबर 1984 का है, जिसमें पश्चिमी दिल्ली के राज नगर में सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुण दीप सिंह की हत्या कर दी गई थी। शाम को करीब चार-साढ़े चार बजे दंगाइयों की भीड़ ने पीड़ितों के राज नगर इलाके स्थित घर पर लोहे के सरियों और लाठियों से हमला कर दिया। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक इस भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहे थे जो उस समय बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद थे।
एक दूसरे मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 17 दिसंबर, 2018 को सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय ने पूर्व नेवी अधिकारी भागमल के अलावा कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर, गिरधारी लाल और दो अन्य को ट्रायल कोर्ट से मिली सजा को बरकरार रखा था। सज्जन कुमार ने 31 दिसंबर, 2018 को कड़कड़डूमा कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।
सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी हिंसा मामले राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 22 जनवरी को सज्जन कुमार को बरी कर दिया था। जनकपुरी हिंसा मामले में पीड़ित मंजीत कौर ने अपने बयान में कहा था कि मैंने भीड़ के लोगों से सुना था कि सज्जन कुमार भीड़ में शामिल थे, लेकिन सज्जन कुमार को आंखों से नहीं देखा था।
कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय से मिली सजा के खिलाफ सज्जन कुमार की अपील पर हम जुलाई में सुनवाई करेंगे। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने फरवरी, 2005 में सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामला 1 नवंबर 1984 का है, जिसमें पश्चिमी दिल्ली के राज नगर में सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुण दीप सिंह की हत्या कर दी गई थी। शाम को करीब चार-साढ़े चार बजे दंगाइयों की भीड़ ने पीड़ितों के राज नगर इलाके स्थित घर पर लोहे के सरियों और लाठियों से हमला कर दिया। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक इस भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहे थे जो उस समय बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद थे।
एक दूसरे मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 17 दिसंबर, 2018 को सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय ने पूर्व नेवी अधिकारी भागमल के अलावा कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर, गिरधारी लाल और दो अन्य को ट्रायल कोर्ट से मिली सजा को बरकरार रखा था। सज्जन कुमार ने 31 दिसंबर, 2018 को कड़कड़डूमा कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।
सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी हिंसा मामले राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 22 जनवरी को सज्जन कुमार को बरी कर दिया था। जनकपुरी हिंसा मामले में पीड़ित मंजीत कौर ने अपने बयान में कहा था कि मैंने भीड़ के लोगों से सुना था कि सज्जन कुमार भीड़ में शामिल थे, लेकिन सज्जन कुमार को आंखों से नहीं देखा था।

