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मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- अपराधियों को माफ करने की भी सीमा होनी चाहिए

 
  मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- अपराधियों को माफ करने की भी सीमा होनी चाहिए

नई दिल्ली, 08 अक्टूबर । उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को गंभीर अपराधों में मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने के मामलों पर कड़ी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि अपराधियों को 'माफ' करने की एक सीमा होनी चाहिए। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि हर बार नरमी दिखाने और माफ करने की प्रवृत्ति पर कहीं न कहीं तो रोक लगनी चाहिए।
न्यायालय ने कहा कि हमारे पास माफ करने के रवैये और 'सबसे दुर्लभ मामलों' (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) के सिद्धांत का बार-बार लाभ दिए जाने के कारण देश में अपराध की स्थिति पर असर पड़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि एक समय हत्या के मामलों में 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' सिद्धांत इसलिए लागू होता था, क्योंकि उस समय हत्या के अपराध भी अपेक्षाकृत दुर्लभ थे लेकिन आज स्थिति वैसी नहीं है।
एक पुराने केस का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि एक पिता ने अपनी बड़ी बेटी के साथ दुष्कर्म किया और बाद में हत्या कर दी। मां की गवाही पर उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई, लेकिन बाद में वह पैरोल पर बाहर निकला और पत्नी को मौत के घाट उतार दिया। न्यायालय ने कहा कि इस बार गवाह उसकी छोटी बेटी थी, जिसके आधार पर उसे मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि, बाद में उच्चतम न्यायालय ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। तर्क दिया गया कि उसने छोटी बेटी की हत्या नहीं की थी। न्यायालय ने कहा कि इस प्रवृत्ति पर रोक तो लगानी होगी।