सुप्रीम काेर्ट ने डिजिटल अरेस्ट मामले में सुनवाई एक हफ्ते के लिए टाली
Mar 16, 2026, 13:42 IST

नई दिल्ली, 16 मार्च उच्चतम न्यायालय ने डिजिटल अरेस्ट के मामले पर सोमवार को सुनवाई टाल दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई एक हफ्ते टालने का आदेश दिया।
दरअसल, साेमवार काे केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वो आज ही स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर देंगे। तब कोर्ट ने एक हफ्ते के लिए सुनवाई टालने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने एक दिसंबर 2025 को कहा था कि डिजिटल अरेस्ट फर्जीवाड़े पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। कोर्ट ने इस फर्जीवाड़े से संबंधित दर्ज मामलों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जहां भी साइबर क्राइम में उपयोग किए गए बैंक खातों का पता चलता है, वहां संबंधित बैंकरों की जांच करने के लिए सीबीआई को पूर्ण स्वतंत्रता होगी।
कोर्ट ने रिजर्व बैंक को निर्देश दिया था कि वो कोर्ट को इस निष्कर्ष पर पहुंचने में सहयोग करे कि संदेहास्पद खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज करने के लिए एआई या मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। जिन राज्यों ने सीबीआई जांच की अपने राज्यों में अनुमति नहीं दी है उन राज्यों को निर्देश दिया गया था कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में वे जांच की अनुमति दें।
सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी ने कहा कि तीन तरह के साइबर क्राइम हैं। पहला डिजिटल अरेस्ट, इंवेस्टमेंट फर्जीवाड़ा और पार्ट टाईम जॉब के नाम पर फर्जीवाड़ा। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि ऐसे अपराधों के जरिये पीड़ितों को बड़ी रकम का निवेश करने को कहा जाता है। उच्चतम न्यायालय ने 17 अक्टूबर, 2025 को डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेशों और जजों के हस्ताक्षर की जालसाजी करना न्यायिक संस्थाओं में लोगों के विश्वास और आस्था पर कुठाराघात है।
उच्चतम न्यायालय ने अंबाला के एक बुजुर्ग दंपति को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे एक करोड़ रुपये से ज्यादा की उगाही करने की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया था। बुजुर्ग दंपति ने तत्कालीन चीफ जस्टिस बीआर गवई को पत्र लिखकर इस जालसाजी के बारे में बताया था। कोर्ट ने कहा था कि ये मामला एकमात्र मामला नहीं है। इसे लेकर मीडिया में कई खबरें आ चुकी हैं। कोर्ट ने कहा था कि न्यायिक दस्तावेजों की जालसाजी, निर्दोष लोगों और खासकर वरिष्ठ नागरिकों से जबरन वसूली और लूट से जुड़े आपराधिक कृत्य का खुलासा करने के लिए केंद्र और राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय की जरुरत है।
बुजुर्ग दंपति ने पत्र में कहा था कि 3 से 16 सितंबर के बीच दंपति की गिरफ्तारी और निगरानी की बात करने वाला मुहर लगा एक जाली अदालती आदेश पेश किया गया। इसके बाद कई बैंक लेनदेन के जरिये एक करोड़ रुपये के अधिक की धोखाधड़ी की गई। बुजुर्ग महिला के मुताबिक कुछ लोगों ने ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिये कोर्ट के आदेश दिखाए।
दरअसल, साेमवार काे केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वो आज ही स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर देंगे। तब कोर्ट ने एक हफ्ते के लिए सुनवाई टालने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने एक दिसंबर 2025 को कहा था कि डिजिटल अरेस्ट फर्जीवाड़े पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। कोर्ट ने इस फर्जीवाड़े से संबंधित दर्ज मामलों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जहां भी साइबर क्राइम में उपयोग किए गए बैंक खातों का पता चलता है, वहां संबंधित बैंकरों की जांच करने के लिए सीबीआई को पूर्ण स्वतंत्रता होगी।
कोर्ट ने रिजर्व बैंक को निर्देश दिया था कि वो कोर्ट को इस निष्कर्ष पर पहुंचने में सहयोग करे कि संदेहास्पद खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज करने के लिए एआई या मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। जिन राज्यों ने सीबीआई जांच की अपने राज्यों में अनुमति नहीं दी है उन राज्यों को निर्देश दिया गया था कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में वे जांच की अनुमति दें।
सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी ने कहा कि तीन तरह के साइबर क्राइम हैं। पहला डिजिटल अरेस्ट, इंवेस्टमेंट फर्जीवाड़ा और पार्ट टाईम जॉब के नाम पर फर्जीवाड़ा। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि ऐसे अपराधों के जरिये पीड़ितों को बड़ी रकम का निवेश करने को कहा जाता है। उच्चतम न्यायालय ने 17 अक्टूबर, 2025 को डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेशों और जजों के हस्ताक्षर की जालसाजी करना न्यायिक संस्थाओं में लोगों के विश्वास और आस्था पर कुठाराघात है।
उच्चतम न्यायालय ने अंबाला के एक बुजुर्ग दंपति को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे एक करोड़ रुपये से ज्यादा की उगाही करने की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया था। बुजुर्ग दंपति ने तत्कालीन चीफ जस्टिस बीआर गवई को पत्र लिखकर इस जालसाजी के बारे में बताया था। कोर्ट ने कहा था कि ये मामला एकमात्र मामला नहीं है। इसे लेकर मीडिया में कई खबरें आ चुकी हैं। कोर्ट ने कहा था कि न्यायिक दस्तावेजों की जालसाजी, निर्दोष लोगों और खासकर वरिष्ठ नागरिकों से जबरन वसूली और लूट से जुड़े आपराधिक कृत्य का खुलासा करने के लिए केंद्र और राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय की जरुरत है।
बुजुर्ग दंपति ने पत्र में कहा था कि 3 से 16 सितंबर के बीच दंपति की गिरफ्तारी और निगरानी की बात करने वाला मुहर लगा एक जाली अदालती आदेश पेश किया गया। इसके बाद कई बैंक लेनदेन के जरिये एक करोड़ रुपये के अधिक की धोखाधड़ी की गई। बुजुर्ग महिला के मुताबिक कुछ लोगों ने ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिये कोर्ट के आदेश दिखाए।

