हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की अवहेलना पर सख्त कार्रवाई:
डीसी सिरसा, सीईओ व बीडीपीओ डबवाली को अवमानना नोटिस, 29 मई को जवाब तलब
May 27, 2026, 15:00 IST

सिरसा 27 मई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एबीपीओ नीरू रानी के मामले में न्यायालय के स्थगन आदेश का पालन न करने पर जिला प्रशासन के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी है। न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल ने उपायुक्त सिरसा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक तथा खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, डबवाली को 29 मई 2026 को प्रात: 10 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।
ये था मामला:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता नीरू रानी को 01 सितंबर 2025 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके विरुद्ध दायर याचिका सीडब्ल्यूपी-27827-2025 में हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2025 को अंतरिम स्थगन आदेश पारित किया था। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि याचिकाकर्ता को सेवा से मुक्त कर दिया गया है तो उसे तत्काल वापस लिया जाए तथा 19 सितंबर 2025 से ड्यूटी ज्वाइन करने दी जाए। न्यायालय के उक्त आदेश की अनुपालना में याचिकाकर्ता को 19 सितंबर 2025 को पुन: कार्यभार ग्रहण करवा दिया गया था। इसके पश्चात 11 दिसंबर 2025 को हुई अगली सुनवाई के बाद भी विभाग द्वारा एक्सटेंशन लेटर जारी कर याचिकाकर्ता को सेवा में बनाए रखा गया।
20 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई में भी माननीय न्यायालय द्वारा अंतरिम स्थगन आदेश को जारी रखा गया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कर्मवीर सिंह बनियाणा ने अवमानना याचिका सीएम-8559-सीडब्ल्यूपी-2026 में कोर्ट को बताया कि इसके बावजूद प्रतिवादी अधिकारियों ने न तो याचिकाकर्ता का अनुबंध बढ़ाने के लिए एक्सटेंशन लेटर जारी किया और न ही उसे ड्यूटी जॉइन करने दी। इसी आधार पर अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। जस्टिस मौदगिल ने अपने 26 मई के आदेश में दर्ज किया कि इस कोर्ट का इरादा स्पष्ट था। उन्होंने तीनों अधिकारियों डीसी सिरसा, सीईओ-कम-डीपीसी एवं बीडीपीओ डबवाली को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ भारत के संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत अवमानना की कार्यवाही आरंभ की जाए।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि तीनों अधिकारी 29 मई को स्पष्ट निदेर्शों एवं स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित हों कि 18.09.2025 के अंतरिम आदेश, जो 20.04.2026 को भी प्रभावी था, का उल्लंघन क्यों किया गया तथा याचिकाकर्ता को सेवा में बने रहने की अनुमति क्यों नहीं दी गई। मामले की सुनवाई अर्जेंट लिस्ट में की जाएगी। यह आदेश स्पष्ट करता है कि एक बार न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश पारित होने के बाद प्रत्येक सुनवाई में उसके जारी रहने तक उसकी निरंतर अनुपालना अनिवार्य है। 19.09.2025 एवं 11.12.2025 को आदेश का पालन करने तथा 20.04.2026 को भी स्टे जारी रहने के बावजूद अनुबंध न बढ़ाना न्यायालय की दृष्टि में गंभीर अवहेलना है। अवमानना सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों को कारावास या आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।
ये था मामला:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता नीरू रानी को 01 सितंबर 2025 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके विरुद्ध दायर याचिका सीडब्ल्यूपी-27827-2025 में हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2025 को अंतरिम स्थगन आदेश पारित किया था। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि याचिकाकर्ता को सेवा से मुक्त कर दिया गया है तो उसे तत्काल वापस लिया जाए तथा 19 सितंबर 2025 से ड्यूटी ज्वाइन करने दी जाए। न्यायालय के उक्त आदेश की अनुपालना में याचिकाकर्ता को 19 सितंबर 2025 को पुन: कार्यभार ग्रहण करवा दिया गया था। इसके पश्चात 11 दिसंबर 2025 को हुई अगली सुनवाई के बाद भी विभाग द्वारा एक्सटेंशन लेटर जारी कर याचिकाकर्ता को सेवा में बनाए रखा गया।
20 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई में भी माननीय न्यायालय द्वारा अंतरिम स्थगन आदेश को जारी रखा गया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कर्मवीर सिंह बनियाणा ने अवमानना याचिका सीएम-8559-सीडब्ल्यूपी-2026 में कोर्ट को बताया कि इसके बावजूद प्रतिवादी अधिकारियों ने न तो याचिकाकर्ता का अनुबंध बढ़ाने के लिए एक्सटेंशन लेटर जारी किया और न ही उसे ड्यूटी जॉइन करने दी। इसी आधार पर अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। जस्टिस मौदगिल ने अपने 26 मई के आदेश में दर्ज किया कि इस कोर्ट का इरादा स्पष्ट था। उन्होंने तीनों अधिकारियों डीसी सिरसा, सीईओ-कम-डीपीसी एवं बीडीपीओ डबवाली को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ भारत के संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत अवमानना की कार्यवाही आरंभ की जाए।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि तीनों अधिकारी 29 मई को स्पष्ट निदेर्शों एवं स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित हों कि 18.09.2025 के अंतरिम आदेश, जो 20.04.2026 को भी प्रभावी था, का उल्लंघन क्यों किया गया तथा याचिकाकर्ता को सेवा में बने रहने की अनुमति क्यों नहीं दी गई। मामले की सुनवाई अर्जेंट लिस्ट में की जाएगी। यह आदेश स्पष्ट करता है कि एक बार न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश पारित होने के बाद प्रत्येक सुनवाई में उसके जारी रहने तक उसकी निरंतर अनुपालना अनिवार्य है। 19.09.2025 एवं 11.12.2025 को आदेश का पालन करने तथा 20.04.2026 को भी स्टे जारी रहने के बावजूद अनुबंध न बढ़ाना न्यायालय की दृष्टि में गंभीर अवहेलना है। अवमानना सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों को कारावास या आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।

