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अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष

 तंबाकू का हर रूप स्वास्थ्य के लिए घातक, इच्छा शक्ति से छोड़ी जा सकती है यह आदत : डॉ. एम.एम. तलवार
 
 अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष
 सिरसा, 31 मई। अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर पल-पल के प्रधान संपादक सुरेंद्र भाटिया से विशेष बातचीत में सिरसा के वरिष्ठ एवं सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. एम.एम. तलवार ने कहा कि तंबाकू का प्रत्येक रूप मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। चाहे वह गुटका, खैनी, जर्दा, बीड़ी, सिगरेट अथवा अन्य किसी रूप में लिया जाए, इसके लगातार सेवन से व्यक्ति अनेक गंभीर एवं जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ सकता है।
डॉ. तलवार ने बताया कि तंबाकू में पाया जाने वाला निकोटिन एक अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला तत्व है। यही कारण है कि कुछ लोग धीरे-धीरे चेन स्मोकर बन जाते हैं और बार-बार धूम्रपान करने की इच्छा महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि निकोटिन की लत के कारण व्यक्ति चाहकर भी आसानी से तंबाकू नहीं छोड़ पाता, लेकिन आधुनिक चिकित्सा में इसके लिए प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि निकोटिन की लत से छुटकारा दिलाने के लिए निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एनआरटी) तथा अन्य दवाइयों का उपयोग किया जाता है, जिनकी सहायता से धूम्रपान और तंबाकू सेवन छोड़ने में सफलता मिल सकती है। चिकित्सकीय परामर्श और नियमित निगरानी से इस आदत पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
डॉ. तलवार ने कहा कि तंबाकू छोड़ने में मनोविज्ञान और परामर्श (काउंसलिंग) की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। व्यक्ति यदि दृढ़ निश्चय और मजबूत इच्छा शक्ति के साथ प्रयास करे तो वह इस लत से बाहर निकल सकता है। परिवार का सहयोग, सकारात्मक सोच और विशेषज्ञों की सलाह तंबाकू मुक्ति की प्रक्रिया को और अधिक सफल बनाती है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि तंबाकू सेवन से मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, दमा तथा फेफड़ों की कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। गुटका और अन्य चबाने वाले तंबाकू उत्पाद मुंह के कैंसर के प्रमुख कारण हैं, जबकि बीड़ी और सिगरेट फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।
पल-पल से बातचीत में डॉ. तलवार ने कहा कि तंबाकू का दुष्प्रभाव केवल सेवन करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोग भी निष्क्रिय धूम्रपान (पैसिव स्मोकिंग) के कारण प्रभावित होते हैं। विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि तंबाकू के खिलाफ प्रभावी लड़ाई केवल व्यक्तिगत प्रयासों से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए चिकित्सकों, मीडिया, सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों तथा प्रशासन को मिलकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाना होगा। समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आकर लोगों को तंबाकू के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसके सेवन से दूर रखा जा सके।
डॉ. तलवार ने विशेष रूप से हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी अनेक गांवों और सार्वजनिक स्थानों पर हुक्का, बीड़ी और सिगरेट का सेवन सामाजिक रूप से स्वीकार्य माना जाता है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने ग्रामीण समाज से इस प्रवृत्ति को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू सेवन को हतोत्साहित करना समय की आवश्यकता है। यदि समाज इस दिशा में सामूहिक प्रयास करे तो आने वाली पीढ़ियों को तंबाकू की लत से बचाया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तंबाकू सेवन से दूर रहें तथा अपने परिवार और मित्रों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ और नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लेने का अवसर है।
डॉ. तलवार ने अंत में कहा कि यदि व्यक्ति अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत बनाए, चिकित्सकीय सलाह ले और परिवार का सहयोग प्राप्त करे तो तंबाकू जैसी घातक आदत को छोड़ना पूरी तरह संभव है। स्वस्थ जीवन के लिए तंबाकू का पूर्ण त्याग आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
यह संस्करण आपके मूल समाचार को यथावत रखते हुए केवल चिकित्सकों, मीडिया और सामाजिक संस्थाओं द्वारा अभियान चलाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में हुक्का-बीड़ी-सिगरेट की सामाजिक स्वीकृति समाप्त करने संबंधी डॉ. तलवार के विचारों को स्वाभाविक रूप से जोड़कर तैयार किया गया है।