एसआईआर : प्रवासी श्रमिकों और बाहर पढ़ रहे छात्रों को सुनवाई में बड़ी राहत
Jan 7, 2026, 14:49 IST

कोलकाता, 07 जनवरी पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव काे लेकर चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)
के दौरान भारत निर्वाचन आयोग ने प्रवासी श्रमिकों और राज्य से बाहर पढ़ाई कर रहे छात्रों को बड़ी राहत दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं, उन्हें सुनवाई के लिए शारीरिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं होगा।
निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ऐसे प्रवासी श्रमिक जो रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में रह रहे हैं तथा वे छात्र जो पश्चिम बंगाल से बाहर पढ़ रहे हैं, उनके परिवार के सदस्य उनकी ओर से सुनवाई केंद्र पर पहुंचकर आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकेंगे। इन दस्तावेजों के आधार पर आयोग को मतदाता से जुड़े संदेहों का समाधान किया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल से बाहर काम करने वाले श्रमिकों और अन्य राज्यों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या काफी अधिक है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने नियमों में यह व्यावहारिक ढील देने का फैसला किया है, ताकि वास्तविक मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस बीच, बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) जब मतदाताओं के घर नोटिस देने पहुंचेंगे, तब वे मतदाता या उनके परिवार के सदस्यों को यह भी समझाएंगे कि ‘प्रोजेनी मैपिंग’ प्रक्रिया के दौरान उनके नाम को किस कारण से ‘तार्किक विसंगति’ के रूप में चिन्हित किया गया है।
निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार के कर्मचारियों से भी एक घोषणा पत्र मांगा है, जिसमें उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि वे दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूचियों में पंजीकृत नहीं हैं। आयोग का उद्देश्य दोहरे मतदाता पंजीकरण की किसी भी संभावना को समाप्त करना है।
आयोग सूत्रों के अनुसार, ‘अनमैप्ड’ श्रेणी के मतदाताओं की सुनवाई प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। राज्य में ऐसे मतदाताओं की संख्या 30 लाख से अधिक बताई जा रही है। वहीं, ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी में चिन्हित मतदाताओं की संख्या करीब 92 लाख है।
इन ‘तार्किक विसंगति’ मामलों की सुनवाई 13 जनवरी से शुरू होगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। इसका मतलब है कि आयोग को एक महीने से भी कम समय में इन सभी मामलों की सुनवाई पूरी करनी होगी।
ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद जल्द ही भारतीय निर्वाचन आयोग का पूर्ण पीठ कोलकाता आएगा और पूरी स्थिति की समीक्षा करेगा। इसके बाद ही इस साल होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों की मतदान तिथियों की घोषणा की जाएगी।
के दौरान भारत निर्वाचन आयोग ने प्रवासी श्रमिकों और राज्य से बाहर पढ़ाई कर रहे छात्रों को बड़ी राहत दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं, उन्हें सुनवाई के लिए शारीरिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं होगा।
निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ऐसे प्रवासी श्रमिक जो रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में रह रहे हैं तथा वे छात्र जो पश्चिम बंगाल से बाहर पढ़ रहे हैं, उनके परिवार के सदस्य उनकी ओर से सुनवाई केंद्र पर पहुंचकर आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकेंगे। इन दस्तावेजों के आधार पर आयोग को मतदाता से जुड़े संदेहों का समाधान किया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल से बाहर काम करने वाले श्रमिकों और अन्य राज्यों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या काफी अधिक है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने नियमों में यह व्यावहारिक ढील देने का फैसला किया है, ताकि वास्तविक मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस बीच, बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) जब मतदाताओं के घर नोटिस देने पहुंचेंगे, तब वे मतदाता या उनके परिवार के सदस्यों को यह भी समझाएंगे कि ‘प्रोजेनी मैपिंग’ प्रक्रिया के दौरान उनके नाम को किस कारण से ‘तार्किक विसंगति’ के रूप में चिन्हित किया गया है।
निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार के कर्मचारियों से भी एक घोषणा पत्र मांगा है, जिसमें उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि वे दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूचियों में पंजीकृत नहीं हैं। आयोग का उद्देश्य दोहरे मतदाता पंजीकरण की किसी भी संभावना को समाप्त करना है।
आयोग सूत्रों के अनुसार, ‘अनमैप्ड’ श्रेणी के मतदाताओं की सुनवाई प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। राज्य में ऐसे मतदाताओं की संख्या 30 लाख से अधिक बताई जा रही है। वहीं, ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी में चिन्हित मतदाताओं की संख्या करीब 92 लाख है।
इन ‘तार्किक विसंगति’ मामलों की सुनवाई 13 जनवरी से शुरू होगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। इसका मतलब है कि आयोग को एक महीने से भी कम समय में इन सभी मामलों की सुनवाई पूरी करनी होगी।
ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद जल्द ही भारतीय निर्वाचन आयोग का पूर्ण पीठ कोलकाता आएगा और पूरी स्थिति की समीक्षा करेगा। इसके बाद ही इस साल होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों की मतदान तिथियों की घोषणा की जाएगी।

