शरीर का सही माप लेने की वैज्ञानिक विधि सटीक माप ही बेहतर फिटिंग, संतुलित पैटर्न और आकर्षक परिधान का आधार

फैशन डिजाइनिंग लेखमाला — भाग 5
कंचन मेहता
एम.ए. फैशन डिजाइनिंग, इंस्ट्रक्टर, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा
परिधान निर्माण में सुंदर डिजाइन, उत्तम कपड़ा और आकर्षक रंग जितने महत्वपूर्ण हैं, उतना ही आवश्यक शरीर का सही माप लेना भी है। माप में थोड़ी-सी त्रुटि पूरे परिधान की फिटिंग, संतुलन और स्वरूप को प्रभावित कर सकती है। इसलिए फैशन डिजाइनिंग में शरीर का माप लेना केवल साधारण प्रक्रिया नहीं, बल्कि निश्चित नियमों और शारीरिक संरचना पर आधारित वैज्ञानिक विधि है।
माप लेने से पहले तैयारी
माप लेते समय व्यक्ति को स्वाभाविक मुद्रा में सीधा खड़ा होना चाहिए। उसके दोनों पैर सामान्य दूरी पर हों और शरीर तनावमुक्त रहे। बहुत मोटे, ढीले या कई परतों वाले कपड़ों के ऊपर से माप नहीं लेना चाहिए। शरीर से सटे हल्के वस्त्र पहनकर लिया गया माप अधिक सटीक होता है।
माप लेने के लिए लचीले और अच्छी गुणवत्ता वाले इंच टेप का प्रयोग करना चाहिए। टेप न तो अधिक कसा हुआ हो और न ही बहुत ढीला। कमर की वास्तविक स्थिति पहचानने के लिए वहां पतली डोरी या इलास्टिक बांधी जा सकती है। इससे लंबाई और गोलाई से संबंधित माप लेने में सुविधा होती है।
मुख्य शारीरिक माप
परिधान तैयार करने के लिए छाती, कमर, कूल्हे, कंधे, गले, बांह, आर्महोल और परिधान की लंबाई प्रमुख माप माने जाते हैं। छाती का माप उसके सबसे उभरे हुए भाग से लिया जाता है। टेप को पीठ के चारों ओर सीधा रखते हुए यह ध्यान रखना चाहिए कि वह जमीन के समानांतर रहे।
कमर का माप शरीर के सबसे पतले हिस्से से लिया जाता है, जबकि कूल्हे का माप उसके सबसे उभरे हुए भाग से लिया जाता है। कूल्हे का माप लेते समय टेप का आगे और पीछे समान स्तर पर रहना आवश्यक है। कंधे का माप गर्दन के आधार से कंधे के अंतिम बिंदु तक लिया जाता है।
आस्तीन की लंबाई कंधे के अंतिम बिंदु से कलाई तक मापी जाती है। यदि पूरी आस्तीन बनानी हो तो कोहनी को हल्का मोड़कर माप लेना चाहिए। इससे हाथ हिलाने के लिए आवश्यक सुविधा बनी रहती है। कुर्ती या ड्रेस की लंबाई कंधे के ऊपरी बिंदु से इच्छित लंबाई तक ली जाती है।
फिटिंग के लिए ईज जरूरी
शरीर के वास्तविक माप और तैयार परिधान के माप में कुछ अंतर रखा जाता है, जिसे ‘ईज’ कहा जाता है। ईज से व्यक्ति को बैठने, चलने और हाथ उठाने में सुविधा मिलती है। शरीर से सटे परिधान में कम ईज और ढीले परिधान में अधिक ईज दी जाती है। कपड़े की प्रकृति भी ईज को प्रभावित करती है। स्ट्रेचेबल कपड़े में कम, जबकि बिना खिंचाव वाले कपड़े में अपेक्षाकृत अधिक ईज रखनी पड़ती है।
माप लिखने और जांचने की विधि
प्रत्येक माप लेते ही उसे निर्धारित माप-तालिका में लिख देना चाहिए। केवल स्मरण शक्ति पर निर्भर रहने से गलती हो सकती है। छाती, कमर, कूल्हे, कंधा, आर्महोल, आस्तीन और लंबाई को स्पष्ट नामों के साथ दर्ज करना चाहिए। महत्वपूर्ण माप दो बार लेकर उनकी पुष्टि करना बेहतर रहता है।
माप लेते समय व्यक्ति की मुद्रा बदलना, टेप को तिरछा रखना, सांस रोककर माप लेना या टेप को अत्यधिक कसना सामान्य गलतियां हैं। शरीर के दोनों भागों में अंतर होने पर दाएं और बाएं हिस्से का अलग-अलग माप भी लिया जा सकता है।
सही माप से बनाया गया पैटर्न कपड़े की बर्बादी कम करता है, सिलाई में सुधार लाता है और बार-बार बदलाव की आवश्यकता घटाता है। इसलिए एक कुशल फैशन डिजाइनर के लिए वैज्ञानिक ढंग से माप लेना परिधान निर्माण की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है।

