सफाई कर्मचारियों को दिखावा नहीं, अधिकार और सम्मान चाहिए : कुमारी सैलजा

चंडीगढ़, 10 सितंबर।
सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य तथा उत्तराखंड की प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि सफाई कर्मचारियों को प्रतीकात्मक सम्मान या दिखावे की नहीं, बल्कि सुरक्षित रोजी-रोटी, उचित वेतन, नियमित रोजगार और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार की जरूरत है। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सफाई कर्मचारी किसी से अपने पांव धुलवाना नहीं चाहते, वे चाहते हैं कि सरकार उन्हें उनका हक, सम्मान और रोजगार की सुरक्षा दे।
कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी सफाई कर्मचारियों के पांव धोकर उनके प्रति सम्मान प्रदर्शित कर चुके हैं, लेकिन वास्तविक सम्मान तभी सार्थक होगा जब इन कर्मचारियों की रोजी-रोटी सुरक्षित हो और उन्हें सम्मानजनक सेवा शर्तें मिलें। उन्होंने कहा एक ओर सफाई कर्मचारियों के रोजगार और भविष्य पर असुरक्षा बनी रहे तथा दूसरी ओर मीडिया के सामने उनके चरण धोकर सम्मान प्रदर्शित किया जाए तो इससे उनकी वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं होता। “चरण मत धोइए, सफाई कर्मचारियों को उनका हक और सम्मान दीजिए। उनका भी आत्मसम्मान है और उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीने का अधिकार है।”
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कांग्रेस कांग्रेस ठेका प्रथा समाप्त करने और कर्मचारियों को रोजगार की सुरक्षा प्रदान करने की पक्षधर
सांसद ने कहा कि कांग्रेस ठेका प्रथा समाप्त करने और कर्मचारियों को रोजगार की सुरक्षा प्रदान करने की पक्षधर है। जो कर्मचारी दिन-रात शहरों को स्वच्छ रखने का सबसे कठिन काम करते हैं, आखिर उनके हिस्से में क्या आता है? सरकार को उनकी गरीबी और मजबूरी का फायदा उठाने के बजाय उनके प्रतिनिधियों से सार्थक संवाद करना चाहिए। कर्मचारियों से बातचीत के दौरान किए गए वादों को पूरा किया जाए और उनकी उचित मांगों पर गंभीरता से निर्णय लिया जाए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कोई भी कर्मचारी अपनी इच्छा से काम छोड़कर कूड़े के बीच बैठकर आंदोलन नहीं करना चाहता। परिस्थितियां उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर करती हैं। सरकार को टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय सफाई कर्मचारियों से बातचीत करनी चाहिए और नियमितीकरण, उचित वेतन, रोजगार की सुरक्षा तथा अन्य जायज मांगों का ठोस समाधान निकालना चाहिए।
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सरकार की कमियों का खामियाजा भुगत रही है जनता
कुमारी सैलजा ने कहा कि सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से शहरों में जगह-जगह कचरे के ढेर लग रहे हैं और गंदगी बढ़ने से बीमारियों का खतरा भी पैदा हो रहा है। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। सरकार को जिद छोड़कर कर्मचारियों के साथ सार्थक बातचीत करनी चाहिए। सफाई कर्मचारियों का वास्तविक सम्मान उनके चरण धोने में नहीं, बल्कि उनकी रोजी-रोटी सुरक्षित करने, उन्हें उचित वेतन देने और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित करने में है

