गुणवत्ता बनेगी विकसित हरियाणा की पहचान : डॉ. चौहान

करनाल 10 सितंबर सरकारी विकास कार्यों की गुणवत्ता केवल तकनीकी मानकों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह कार्य के प्रति जिम्मेदारी, सकारात्मक सोच और जनसेवा की भावना से भी जुड़ी है। प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपने कार्य को पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक बेहतर गुणवत्ता के साथ पहुंचे। यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान, नीलोखेड़ी के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे संस्थान में गुणवत्ता आश्वासन प्राधिकरण, हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. चौहान ने कहा कि जापान की पहचान उसकी तकनीक के साथ-साथ गुणवत्ता के लिए है और इसी प्रकार विकसित भारत एवं विकसित हरियाणा की पहचान भी गुणवत्तापूर्ण कार्यों से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार द्वारा करवाए जाने वाले विकास कार्य सीधे लोगों के जीवन से जुड़े होते हैं, इसलिए इन कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। तकनीकी अधिकारियों और अभियंताओं को अपनी जिम्मेदारी को केवल नौकरी का हिस्सा न मानकर जनसेवा के महत्वपूर्ण दायित्व के रूप में निभाना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षु अभियंताओं का आह्वान किया कि वे मुखमंडल पर मुस्कान रखते हुए, सकारात्मक सोच के साथ और पूरी ईमानदारी से कार्य करें। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर सकारात्मक वातावरण से कार्यक्षमता बढ़ती है और इसका सीधा प्रभाव सरकारी कार्यों की गुणवत्ता पर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने व्यवहार और कार्यशैली से आमजन के बीच सरकार के प्रति विश्वास को मजबूत करने का प्रयास करें।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने सरकारी कामकाज और दैनिक कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का भी आह्वान किया। डॉ. चौहान ने कहा कि हिंदी हमारी सहज और सरल संपर्क भाषा है तथा सरकारी कामकाज को अधिक से अधिक हिंदी में करने से आमजन के साथ संवाद और कार्यों की समझ को और बेहतर बनाया जा सकता है। डॉ. चौहान ने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से अभियंताओं को गुणवत्ता आश्वासन, तकनीकी निरीक्षण, निर्माण कार्यों की निगरानी तथा निर्धारित मानकों के अनुपालन से जुड़ी नई जानकारियां प्राप्त होंगी। उन्होंने प्रशिक्षुओं से कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लागू करना ही इस कार्यक्रम की वास्तविक सफलता होगी।
संस्थान के सहायक आचार्य एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुशील मेहता ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायती राज विभाग से जुड़े तकनीकी अधिकारियों एवं कनिष्ठ अभियंताओं की क्षमता में वृद्धि करना तथा उन्हें गुणवत्ता आश्वासन से संबंधित नवीन तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं से परिचित करवाना है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को गुणवत्ता मानकों, निरीक्षण प्रक्रिया, निर्माण कार्यों की निगरानी और तकनीकी गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी विशेषज्ञों द्वारा प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम में गुणवत्ता आश्वासन प्राधिकरण से अरुण भाटिया उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशिक्षण के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की तकनीकी प्रक्रिया, निरीक्षण के महत्वपूर्ण पहलुओं तथा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के प्रभावी अनुपालन के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तकनीकी अधिकारियों की सतर्कता और सही निरीक्षण प्रक्रिया से विकास कार्यों की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सकता है। इस दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न तकनीकी विषयों पर चर्चा करते हुए अपने अनुभव भी साझा किए।
इस अवसर पर संस्थान से सहायक आचार्य संदीप कुमार के साथ कनिष्ठ अभियंता आसिफ अली, कनिष्ठ अभियंता अनिल यादव, कनिष्ठ अभियंता दीपक, कनिष्ठ अभियंता देवेंद्र तथा कनिष्ठ अभियंता प्रदीप सहित संबंधित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में शामिल सभी प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी में सक्रिय सहभागिता की तथा गुणवत्ता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को अपने कार्यक्षेत्र में आने वाली तकनीकी चुनौतियों, विकास कार्यों की निगरानी तथा गुणवत्ता मानकों के अनुपालन से संबंधित विषयों पर संवाद का अवसर भी मिला।

