दिशा संस्था में इंटर्नशिप छात्राओं के लिए मनोचिकित्सक डॉ. अमित नारंग का प्रेरक सेमिनार

सिरसा, 15 जुलाई।
दिशा संस्था में इंटर्नशिप कर रही छात्राओं के लिए एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के मुख्य वक्ता नारंग मनोरोग अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. अमित नारंग रहे। इस अवसर पर दिशा संस्था के सचिव सुरेंद्र भाटिया, डॉ. दलजीत सिंह कालड़ा, काउंसलर कंचन मेहता तथा दिशा स्कूल की प्राचार्या नीरज चुघ भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बताया गया कि दिशा संस्था में चल रही इस इंटर्नशिप का संचालन काउंसलर कंचन मेहता द्वारा किया जा रहा है, जबकि इस इंटर्नशिप के संयोजक डॉ. दलजीत सिंह कालड़ा हैं।
सेमिनार को संबोधित करते हुए डॉ. अमित नारंग ने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब वे सिरसा में मनोचिकित्सक के रूप में आए थे, तब उनका पहला सामाजिक व्याख्यान दिशा संस्था में ही हुआ था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में सरकार द्वारा मानसिक दिव्यांग बच्चों को लेकर आयोजित एक बड़े कार्यक्रम के दौरान भी उन्हें दिशा संस्था आने का अवसर मिला था।
उन्होंने कहा कि जब तक हम स्वास्थ्य (Health) की सही परिभाषा को नहीं समझेंगे, तब तक स्वस्थ जीवन की कल्पना अधूरी रहेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ होना नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्ण स्वस्थ होना ही वास्तविक स्वास्थ्य है। यदि इन तीनों में से कोई एक पक्ष भी कमजोर है तो व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं माना जा सकता।
डॉ. नारंग ने मानसिक दिव्यांगता (मेंटल रिटार्डेशन/बौद्धिक दिव्यांगता) पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि ऐसे बच्चों का आईक्यू सामान्य बच्चों की अपेक्षा कम होता है। कई बार जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी अथवा अन्य चिकित्सकीय कारणों से उनका मानसिक विकास प्रभावित हो जाता है। ऐसे बच्चों के प्रति समाज को दया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, धैर्य और समझ के साथ व्यवहार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दिशा संस्था में प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा इन बच्चों की जिस समर्पण भावना से देखभाल की जा रही है, वह सराहनीय है। प्रत्येक छात्र-छात्रा को इन बच्चों को पहले समझना चाहिए, तभी उनकी सही सहायता की जा सकती है। उन्होंने बताया कि आज के समय में विशेष बच्चों की केयर, काउंसलिंग और पुनर्वास की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
डॉ. नारंग ने कहा कि पहले मनोचिकित्सा (Psychiatry) विषय को बहुत कम लोग चुनते थे, लेकिन आज मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दिव्यांग अथवा मानसिक रूप से विशेष बच्चे में ईश्वर द्वारा कोई न कोई विशेष प्रतिभा अवश्य दी जाती है, जिसे पहचानने और विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं से भविष्य में अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी काउंसलिंग करते हुए समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर दिशा संस्था के सचिव सुरेंद्र भाटिया ने छात्राओं को संस्था की कार्यप्रणाली, विशेष बच्चों के पुनर्वास, दिव्यांगता के विभिन्न प्रकार तथा समाज सेवा के महत्व की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिशा संस्था वर्षों से विशेष बच्चों के सर्वांगीण विकास, शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है तथा समाज के सहयोग से इन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित छात्राओं ने डॉ. अमित नारंग से मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग तथा विशेष बच्चों की देखभाल से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। सेमिनार सभी प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

