प्रधानमंत्री ने किया सीएसपीओसी का उद्घाटन, लोकतंत्र को बताया जनकल्याण का माध्यम
Jan 15, 2026, 19:58 IST

नई दिल्ली, 15 जनवरी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी, सांसद और तमाम लोग मौजूद रहे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याण का लाभ पहुंचाना है। सरकार बिना किसी भेदभाव के लोककल्याण की भावना से कार्य कर रही है और इसी दृष्टिकोण के कारण बीते कुछ वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। लोकतंत्र केवल शासन की एक प्रणाली नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह चौथा अवसर है जब भारत सीएसपीओसी की मेजबानी कर रहा है और इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी कार्यप्रणाली और जनकल्याण तक उसकी पहुंच है। उन्होंने संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की भूमिका को बताते हुए कहा कि अध्यक्ष का दायित्व स्वयं अधिक बोलने का नहीं, बल्कि सभी सदस्यों को समान अवसर देने और उनकी बात सुनने का होता है। उनका धैर्य, निष्पक्षता और संतुलन ही लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखता है।
उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। भारत में विकसित एकीकृत भुगतान प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान व्यवस्था बन चुकी है। भारत वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा टीका उत्पादक देश है और इस्पात उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप और नवाचार परिवेश है, तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार है, चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क और तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकतंत्र भारत के लिए सर्वोपरि है और सरकार जनता के सपनों और आकांक्षाओं को प्राथमिकता देते हुए नीतियों से लेकर प्रौद्योगिकी तक हर क्षेत्र में लोकतांत्रिक सोच को अपनाकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन समय में भी भारत ने न केवल अपने नागरिकों की जरूरतें पूरी कीं, बल्कि 150 से अधिक देशों को दवाइयां और टीके उपलब्ध कराए। मानवता की सेवा, जनकल्याण और वैश्विक जिम्मेदारी भारत की लोकतांत्रिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
इससे पहले स्वागत भाषण में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि तीव्र तकनीकी परिवर्तन समाज और शासन दोनों को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सोशल मीडिया ने लोकतांत्रिक संस्थानों की कार्यकुशलता और प्रभावशीलता को बढ़ाया है, लेकिन इनके दुरुपयोग से दुष्प्रचार, साइबर अपराध और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसी गंभीर चुनौतियां भी उत्पन्न हुई हैं। इन चुनौतियों से निपटना और उपयुक्त समाधान निकालना विश्वभर की विधायिकाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि संसद एवं विधानसभाओं में एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। विधायी संस्थाओं को पेपरलेस बनाया जा रहा है और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जोड़ा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और सुलभता के नए मानक स्थापित हुए हैं। उन्होंने कहा कि संसद और सरकार के संयुक्त प्रयासों से अनेक पुराने और अनावश्यक कानूनों को समाप्त किया गया है, नए जनकल्याणकारी कानून बनाए गए हैं और जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप नीतियां तैयार की गई हैं। इन विधायी सुधारों से भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम के बाद बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ऑस्ट्रेलिया और बोत्सवाना के संसदीय नेताओं से मुलाकात की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि ये मुलाकातें लोकतांत्रिक संवाद और अंतर-संसदीय सहयोग को मजबूत करने वाली हैं। ऑस्ट्रेलिया के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के अध्यक्ष मिल्टन डिक के साथ हुई बातचीत को उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी की मजबूती का प्रतीक बताया। वहीं, बोत्सवाना संसद के अध्यक्ष दिथापेलो लेफोको केओरापेत्से से मुलाकात को लोकतांत्रिक संवाद और आपसी विश्वास बढ़ाने वाला बताया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के लोकतंत्र ने विकास यात्रा में स्थिरता, गति और व्यापकता को आत्मसात किया है। उन्होंने सम्मेलन के प्रतिभागियों को आने वाले दिनों के लिए सार्थक और उपयोगी विमर्श की शुभकामनाएं दीं।
सीएसपीओसी में राष्ट्रमंडल के 53 संप्रभु देशों की राष्ट्रीय संसदों के स्पीकर और पीठासीन अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा 14 अर्ध-स्वायत्त संसदों के पीठासीन अधिकारी भी सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। कुल 42 सदस्य देशों और 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों से 61 पीठासीन अधिकारी, जिनमें 45 स्पीकर और 16 डिप्टी स्पीकर शामिल हैं, इस सम्मेलन में सहभागिता कर रहे हैं। शुक्रवार तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में पूर्ण सत्रों के दौरान संसद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, सोशल मीडिया के प्रभाव, संसद के प्रति जनसामान्य की समझ बढ़ाने और मतदान के बाद भी नागरिक भागीदारी को मजबूत करने, सांसदों और संसदीय कर्मियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने में पीठासीन अधिकारियों की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याण का लाभ पहुंचाना है। सरकार बिना किसी भेदभाव के लोककल्याण की भावना से कार्य कर रही है और इसी दृष्टिकोण के कारण बीते कुछ वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। लोकतंत्र केवल शासन की एक प्रणाली नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह चौथा अवसर है जब भारत सीएसपीओसी की मेजबानी कर रहा है और इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी कार्यप्रणाली और जनकल्याण तक उसकी पहुंच है। उन्होंने संसदीय लोकतंत्र में अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की भूमिका को बताते हुए कहा कि अध्यक्ष का दायित्व स्वयं अधिक बोलने का नहीं, बल्कि सभी सदस्यों को समान अवसर देने और उनकी बात सुनने का होता है। उनका धैर्य, निष्पक्षता और संतुलन ही लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखता है।
उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। भारत में विकसित एकीकृत भुगतान प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान व्यवस्था बन चुकी है। भारत वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा टीका उत्पादक देश है और इस्पात उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप और नवाचार परिवेश है, तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार है, चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क और तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकतंत्र भारत के लिए सर्वोपरि है और सरकार जनता के सपनों और आकांक्षाओं को प्राथमिकता देते हुए नीतियों से लेकर प्रौद्योगिकी तक हर क्षेत्र में लोकतांत्रिक सोच को अपनाकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन समय में भी भारत ने न केवल अपने नागरिकों की जरूरतें पूरी कीं, बल्कि 150 से अधिक देशों को दवाइयां और टीके उपलब्ध कराए। मानवता की सेवा, जनकल्याण और वैश्विक जिम्मेदारी भारत की लोकतांत्रिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
इससे पहले स्वागत भाषण में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि तीव्र तकनीकी परिवर्तन समाज और शासन दोनों को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सोशल मीडिया ने लोकतांत्रिक संस्थानों की कार्यकुशलता और प्रभावशीलता को बढ़ाया है, लेकिन इनके दुरुपयोग से दुष्प्रचार, साइबर अपराध और सामाजिक ध्रुवीकरण जैसी गंभीर चुनौतियां भी उत्पन्न हुई हैं। इन चुनौतियों से निपटना और उपयुक्त समाधान निकालना विश्वभर की विधायिकाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि संसद एवं विधानसभाओं में एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। विधायी संस्थाओं को पेपरलेस बनाया जा रहा है और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जोड़ा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और सुलभता के नए मानक स्थापित हुए हैं। उन्होंने कहा कि संसद और सरकार के संयुक्त प्रयासों से अनेक पुराने और अनावश्यक कानूनों को समाप्त किया गया है, नए जनकल्याणकारी कानून बनाए गए हैं और जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप नीतियां तैयार की गई हैं। इन विधायी सुधारों से भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम के बाद बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ऑस्ट्रेलिया और बोत्सवाना के संसदीय नेताओं से मुलाकात की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि ये मुलाकातें लोकतांत्रिक संवाद और अंतर-संसदीय सहयोग को मजबूत करने वाली हैं। ऑस्ट्रेलिया के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के अध्यक्ष मिल्टन डिक के साथ हुई बातचीत को उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी की मजबूती का प्रतीक बताया। वहीं, बोत्सवाना संसद के अध्यक्ष दिथापेलो लेफोको केओरापेत्से से मुलाकात को लोकतांत्रिक संवाद और आपसी विश्वास बढ़ाने वाला बताया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के लोकतंत्र ने विकास यात्रा में स्थिरता, गति और व्यापकता को आत्मसात किया है। उन्होंने सम्मेलन के प्रतिभागियों को आने वाले दिनों के लिए सार्थक और उपयोगी विमर्श की शुभकामनाएं दीं।
सीएसपीओसी में राष्ट्रमंडल के 53 संप्रभु देशों की राष्ट्रीय संसदों के स्पीकर और पीठासीन अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा 14 अर्ध-स्वायत्त संसदों के पीठासीन अधिकारी भी सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। कुल 42 सदस्य देशों और 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों से 61 पीठासीन अधिकारी, जिनमें 45 स्पीकर और 16 डिप्टी स्पीकर शामिल हैं, इस सम्मेलन में सहभागिता कर रहे हैं। शुक्रवार तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में पूर्ण सत्रों के दौरान संसद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, सोशल मीडिया के प्रभाव, संसद के प्रति जनसामान्य की समझ बढ़ाने और मतदान के बाद भी नागरिक भागीदारी को मजबूत करने, सांसदों और संसदीय कर्मियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने में पीठासीन अधिकारियों की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

