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प्लीट, गेदर और काउल ड्रेपिंग : परिधान में बनावट और आकर्षण

 
 प्लीट, गेदर और काउल ड्रेपिंग : परिधान में बनावट और आकर्षण

 फैशन डिजाइनिंग लेखमाला — भाग 11

डिजाइनिंग बाय कंचन मेहता
एम.ए. फैशन डिजाइनिंग, इंस्ट्रक्टर, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा

फैशन डिजाइनिंग में कपड़े को केवल शरीर के आकार के अनुसार तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है। किसी परिधान को आकर्षक, रचनात्मक और विशिष्ट बनाने के लिए उसमें प्लीट, गेदर और काउल जैसी ड्रेपिंग तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। ये तकनीकें कपड़े में सुंदरता, वॉल्यूम, लय और विशेष दृश्य प्रभाव उत्पन्न करती हैं। सही तकनीक का चुनाव परिधान के डिजाइन, कपड़े की प्रकृति और पहनने वाले व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार किया जाता है।

प्लीट ड्रेपिंग क्या है?

प्लीट (Pleat) कपड़े को एक निश्चित दिशा में मोड़कर बनाई गई व्यवस्थित तह होती है। प्लीट्स का प्रयोग स्कर्ट, ड्रेस, ट्राउजर, कुर्ती और विभिन्न प्रकार के फैशन परिधानों में किया जाता है। प्लीट्स कई प्रकार की हो सकती हैं, जैसे नाइफ प्लीट, बॉक्स प्लीट, इनवर्टेड प्लीट और सनबर्स्ट प्लीट।

प्लीट बनाते समय कपड़े की चौड़ाई, तह की गहराई और उनके बीच की दूरी का सही अनुपात रखना आवश्यक है। नियमित और समान प्लीट परिधान को व्यवस्थित तथा आकर्षक रूप देती हैं, जबकि असमान या रचनात्मक प्लीट्स आधुनिक और प्रयोगात्मक लुक प्रदान कर सकती हैं।

गेदर ड्रेपिंग

गेदर (Gather) कपड़े को धागे या सिलाई की सहायता से एकत्रित करके बनाई गई छोटी-छोटी सिलवटों की संरचना है। इसमें कपड़े की अधिक चौड़ाई को कम स्थान में समेटा जाता है। गेदर का प्रयोग विशेष रूप से स्कर्ट, स्लीव, नेकलाइन, कमर और बच्चों के परिधानों में किया जाता है।

गेदर की मात्रा परिधान के अंतिम रूप को प्रभावित करती है। हल्का गेदर सादगीपूर्ण लुक देता है, जबकि अधिक गेदर परिधान में वॉल्यूम और फ्लो बढ़ाता है। कपड़े की मोटाई और उसकी गिरावट को ध्यान में रखते हुए गेदर की मात्रा तय करनी चाहिए।

काउल ड्रेपिंग

काउल (Cowl) एक ऐसी ड्रेपिंग तकनीक है जिसमें कपड़े को ढीली, मुलायम और प्राकृतिक रूप से गिरने वाली सिलवटों के रूप में व्यवस्थित किया जाता है। काउल नेकलाइन इसका लोकप्रिय उदाहरण है। इसके अतिरिक्त काउल का प्रयोग ड्रेस, टॉप, स्कर्ट और विभिन्न क्रिएटिव फैशन परिधानों में भी किया जाता है।

काउल के लिए सामान्यतः ऐसे कपड़े अधिक उपयुक्त होते हैं जिनमें अच्छी फ्लो और ड्रेप हो। कपड़े की मात्रा और कटिंग की दिशा बदलने से काउल की गहराई और सिलवटों का प्रभाव भी बदल जाता है।

तीनों तकनीकों में अंतर

प्लीट में तह को व्यवस्थित रूप से मोड़ा जाता है, गेदर में कपड़े को एकत्रित करके सिलवटें बनाई जाती हैं, जबकि काउल में कपड़े को ढीले और प्राकृतिक रूप से गिरने दिया जाता है। इसलिए तीनों तकनीकें अलग-अलग प्रकार का सौंदर्य प्रभाव पैदा करती हैं।

फैशन डिजाइनिंग में महत्व

इन तकनीकों का सही प्रयोग डिजाइनर को एक ही बेसिक पैटर्न से कई अलग-अलग परिधान तैयार करने की स्वतंत्रता देता है। प्लीट से संरचना, गेदर से वॉल्यूम और काउल से सॉफ्ट एवं फ्लोइंग प्रभाव प्राप्त किया जा सकता है।

एक सफल फैशन डिजाइनर के लिए यह समझना जरूरी है कि किस कपड़े पर कौन-सी ड्रेपिंग तकनीक उपयुक्त होगी और उसे परिधान के डिजाइन के साथ किस प्रकार संतुलित किया जाए। यही समझ एक सामान्य परिधान को रचनात्मक और आकर्षक फैशन डिजाइन में बदल सकती है।