मेरठ से नौ घंटे पहले अंबाला छावनी में भड़का था क्रांति का बिगुल: अनिल विज

प्रस्तुति : चंद्र शेखर धरणी
वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंबाला छावनी की भूमिका ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने दावा किया कि मेरठ में 10 मई 1857 को विद्रोह भड़कने से करीब नौ घंटे पहले अंबाला छावनी में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह की शुरुआत हो चुकी थी। अंबाला के क्रांतिकारियों और शहीदों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार ने अंबाला छावनी में आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक तैयार किया।
अनिल विज ने स्मारक के निर्माण, इसकी तकनीकी विशेषताओं और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंबाला तथा हरियाणा के योगदान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्मारक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है औरप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसके उद्घाटन के लिए समय मांगा गया है।
अंबाला की छावनी में विद्रोह का दावा
अनिल विज ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और ब्रिटिशकालीन अभिलेखों का हवाला देते हुए कहा कि 1857 की क्रांति के इतिहास में मेरठ को शुरुआत का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है, लेकिन अंबाला छावनी में इससे पहले विद्रोह की घटनाएं हुई थीं। उनके अनुसार, अंबाला में तैनात देशी पैदल सेना के सैनिकों ने अंग्रेजी हुकूमत के आदेशों का विरोध किया और सैन्य प्रतिष्ठानों पर कब्जा करने का प्रयास किया था।
मंत्री ने कहा कि अंबाला में विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश शासन ने कठोर कार्रवाई की। उनके मुताबिक, 135 क्रांतिकारी सैनिकों ने इस संघर्ष में अपने प्राण गंवाए। उन्होंने यह भी बताया कि विद्रोहियों को पेड़ों से बांधकर गोली मारने, कुल्हाड़ियों से हमले करने और सैनिक टुकड़ियों को भंग करने जैसी घटनाएं हुई थीं।
विज ने दावा किया कि क्रांतिकारियों की मदद करने वाले आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी अंग्रेजी शासन की दमनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं और बलिदानों को व्यापक ऐतिहासिक पहचान दिलाना जरूरी है।
कांग्रेस की स्थापना से 28 वर्ष पहले हुआ था संग्राम
1857 के विद्रोह के राजनीतिक और ऐतिहासिक संदर्भ पर बोलते हुए विज ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में केवल राजनीतिक संगठनों की भूमिका तक इतिहास को सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी, जबकि 1857 में देश के सैनिकों, किसानों और आम लोगों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया था।
उन्होंने कहा कि अंबाला और हरियाणा के स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को स्मारक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा।
800 करोड़ रुपये की लागत से 22 एकड़ में निर्माण
अनिल विज के अनुसार, अंबाला छावनी में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के किनारे लगभग 22 एकड़ भूमि पर शहीद स्मारक का निर्माण किया गया है। इसकी निर्माण लागत करीब 800 करोड़ रुपये बताई गई है। स्मारक को ऐतिहासिक संग्रहालय, डिजिटल तकनीक और आधुनिक पर्यटक सुविधाओं के समन्वय से विकसित किया गया है।
परिसर के प्रमुख आकर्षणों में 63 मीटर ऊंचा कमल के आकार का टावर शामिल है। 1857 के संग्राम से जुड़े कमल और रोटी के प्रतीक को ध्यान में रखते हुए इसकी संरचना कमल के फूल जैसी बनाई गई है। टावर में कांच की लिफ्ट और शीर्ष पर स्काई कैफे की सुविधा भी प्रस्तावित की गई है।
23 डिजिटल गैलरी में दिखेगा स्वतंत्रता संग्राम
स्मारक में 23 आधुनिक गैलरी बनाई गई हैं। मंत्री के अनुसार, इन गैलरियों को विस्तार से देखने में लगभग छह घंटे लग सकते हैं। इनमें 1857 की क्रांति के कारणों, अंबाला छावनी की घटनाओं, हरियाणा के योगदान और देश के दूसरे हिस्सों में हुए संघर्षों को प्रस्तुत किया जाएगा।
हरियाणा से जुड़े राव तुलाराम, झज्जर के नवाब अब्दुर्रहमान खान और बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही रानी लक्ष्मीबाई, बहादुर शाह जफर, तात्या टोपे, मंगल पांडे और कुंवर सिंह जैसे प्रमुख क्रांतिकारियों की भूमिका को भी स्थान दिया गया है।
700 से अधिक बलिदानियों के नाम दर्ज
विज ने बताया कि इतिहासकारों, विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं की सहायता से 700 से अधिक बलिदानियों की पहचान और उनसे संबंधित जानकारियां जुटाई गई हैं। उनके अनुसार, इन शहीदों के नाम संगमरमर की दीवारों पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए गए हैं। उपलब्ध विवरण में उनके पिता के नाम और गांवों से संबंधित जानकारियां भी शामिल हैं।
स्मारक में डिजिटल श्रद्धांजलि गैलरी, टचस्क्रीन, 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो और साउंड एंड लाइट शो जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। इनके माध्यम से 1857 के घटनाक्रम को दृश्य-श्रव्य रूप में प्रस्तुत करने की योजना है।
थिएटर, ऑडिटोरियम और पर्यटक सुविधाएं
स्मारक परिसर में लगभग 2,500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर और 300 सीटों का वातानुकूलित ऑडिटोरियम बनाया गया है। इसके अतिरिक्त हेलीपैड, 33 केवी बिजली सब-स्टेशन, भूमिगत पार्किंग, स्मृति चिह्नों की दुकानें और जल संरचनाएं भी परिसर का हिस्सा हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए मोबाइल एप्लिकेशन और आधिकारिक वेब पोर्टल की व्यवस्था भी की जा रही है।
प्रधानमंत्री करेंगे उद्घाटन
अनिल विज ने कहा कि स्मारक का सिविल निर्माण, डिजिटल कार्य और कलात्मक कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्मारक के उद्घाटन के लिए समय मांगा गया है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
विज के अनुसार, स्मारक का उद्देश्य 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों, हरियाणा के योगदान और गुमनाम बलिदानियों की गाथा को देश-दुनिया के सामने लाना है। उद्घाटन के बाद यह परिसर ऐतिहासिक अध्ययन, शोध, पर्यटन और भावी पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम से परिचित कराने के केंद्र के रूप में विकसित हो सकेगा।

