यूपीआई लेन-देन पर नया एमडीआर ढांचा: आम ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं, चुनिंदा बड़े व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर

नई दिल्ली। 02 अक्टूबर एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) से भुगतान करने वाले आम ग्राहकों के लिए लेन-देन शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा सितंबर 2026 में जारी जानकारी के अनुसार व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले सभी यूपीआई लेन-देन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे। इसी तरह 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान पर भी व्यापारी छूट दर (एमडीआर) नहीं लगेगी।
2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतानों पर एमडीआर
नए ढांचे के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति से व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत व्यापारी छूट दर लागू होगी। 75,000 रुपये या उससे अधिक के ऐसे लेन-देन में यह राशि अधिकतम 300 रुपये प्रति लेन-देन तक सीमित रहेगी।
महत्वपूर्ण बात यह है कि एमडीआर ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। यह व्यापारी भुगतान से जुड़े बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और यूपीआई अनुप्रयोग प्रदाता जैसे भुगतान तंत्र के प्रतिभागियों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। सरकार के अनुसार बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी इस लागत का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
छोटे दुकानदारों को राहत
छोटे व्यापारियों के लिए शून्य एमडीआर व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार यूपीआई के कुल व्यापारी लेन-देन में लगभग 96 प्रतिशत लेन-देन पर एमडीआर का प्रभाव नहीं पड़ेगा। सड़क किनारे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों की निर्धारित श्रेणी में आने वाले ऐसे व्यापारी, जो यूपीआई क्यूआर के माध्यम से महीने में एक लाख रुपये तक प्राप्त करते हैं, उनके लिए भी शून्य एमडीआर व्यवस्था जारी रहेगी।
आवश्यक सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था
2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन में आवश्यक एवं कम लाभांश वाले कुछ क्षेत्रों—जैसे रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि सामग्री—के लिए पांच रुपये प्रति लेन-देन की निश्चित एमडीआर दर रखी गई है। पूंजी बाजार से संबंधित कुछ भुगतानों के लिए एमडीआर 0.02 प्रतिशत तथा अधिकतम 300 रुपये तक निर्धारित किया गया है।
आम ग्राहक के लिए क्या बदला?
आम यूपीआई उपयोगकर्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी व्यक्ति को यूपीआई से पैसा भेजने या प्राप्त करने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। व्यापारी को 2,000 रुपये तक का भुगतान करने पर भी ग्राहक से कोई एमडीआर नहीं लिया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूपीआई पर एमडीआर को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) या सरकार द्वारा वसूला जाने वाला कर नहीं समझा जाना चाहिए।
इसलिए सोशल मीडिया पर प्रसारित यह दावा सही नहीं है कि “2,000 रुपये से अधिक का हर यूपीआई भुगतान करने पर ग्राहक से 0.4 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।” 0.4 प्रतिशत एमडीआर केवल चुनिंदा बड़े व्यापारी लेन-देन से संबंधित है और इसे ग्राहक के यूपीआई भुगतान पर सीधे लगाए जाने वाले शुल्क के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
हीना भाटिया
एम.ए. (अर्थशास्त्र)
आरंभ अकैडमी, सिरसा

