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नेपाल बाढ़ त्रासदी : 469 लोगों की मौत और 2381 लापता, तबाही का खतरा बरकरार

 
  नेपाल बाढ़ त्रासदी : 469 लोगों की मौत और 2381 लापता, तबाही का खतरा बरकरार

काठमांडू, 28 अगस्त  नेपाल में विनाशकारी भोटेकोशी बाढ़ के बाद तबाही का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार सुबह तक आठ जिलों से 469 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 2,381 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 644 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इस बीच अधिकारियों ने एक और संभावित बाढ़ को लेकर चेतावनी जारी की है। सैटेलाइट तस्वीरों में रसुवागढ़ी के ऊपर ल्हेन्डे धारा के रुकने और वहां एक झील बनने के संकेत मिले हैं। यदि यह प्राकृतिक बांध टूटता है तो निचले इलाकों में फिर से भारी बाढ़ आ सकती है।
नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक आठ ज़िलों से शव बरामद किए गए हैं, जिनमें सबसे ज़्यादा संख्या चितवन (178) और नवलपरासी ईस्ट (110) में है। चितवन में शवों की पहचान शुरू हो गई है, जबकि रसुवा में खोज अभियान तेज़ कर दिया गया है। पुलिस ने बताया कि 2,381 लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चला है, जिनमें 644 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें 178 भारतीय, 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 35 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 25 कनाडाई नागरिक शामिल हैं। विदेश में रहने वाले 127 नेपाली नागरिक भी लापता हैं जो यहाँ घूमने आए थे।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने चेतावनी दी है कि भले ही बाढ़ का तत्काल असर कम हो रहा हो, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। गुरुवार को ली गई एक सैटेलाइट तस्वीर में रसुवागढ़ी के ऊपर ल्हेन्डे धारा के रुकने और एक झील बनने का पता चला।
अधिकारियों ने चेतावनी दी कि बांध टूटने से एक और बड़ी बाढ़ आ सकती है और ल्हेन्डे, भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे नीचे की ओर रहने वाले लोगों से नदी के जलस्तर पर नज़र रखने और चेतावनियों पर ध्यान देने का आग्रह किया। सरकार ने खोज, बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए 13,295 सुरक्षाकर्मी और 15 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। इस तैनाती में 7,250 नेपाल पुलिस, 4,200 नेपाली सेना और 1,845 आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान शामिल हैं। एनडीआरआरएमए के शुरुआती आंकड़ों में 1,976 लोगों को बचाने की बात कही गई है।
एनडीआरआरएमए के मुताबिक, यह आपदा 10 सितंबर को आई, जब नेपाल-चीन सीमा के पास बर्फ और चट्टान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इससे लगभग एक वर्ग किलोमीटर का इलाका प्रभावित हुआ और 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका महसूस किया गया। इस घटना के कारण भारी मात्रा में पानी भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में बह गया, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई।
फिलहाल, सड़क और बिजली व्यवस्था को ठीक करने के साथ-साथ राहत कार्य भी जारी है। धुंचे-ग्रांग, बिदुर-त्रिशूली-धुंगे और बैरेनी-मुगलिन हिस्सों में भारी मशीनरी तैनात की गई है, जबकि देवीघाट में रुकावट को हटा दिया गया है।
सरकार ने तत्काल राहत के लिए रसुवा और नुवाकोट में एक करोड़ रुपये और धाडिंग को 50 लाख रुपये जारी किए हैं। भोजन, पानी, टेंट, कंबल, सोलर लैंप, जनरेटर और पावर बैंक जैसी आपातकालीन सामग्रियां बांटी जा रही है। ईंधन की आपूर्ति भी जारी है और प्रभावित इलाकों में 18,000 लीटर डीजल और पेट्रोल भेजा गया है। इस बीच, काठमांडू घाटी के अस्पतालों में 60 घायल लोगों का इलाज चल रहा है।