जियो-फेसिंग और सीसीटीवी से खरीद पर निगरानी, फर्जी आवक पर लगा अंकुश : नायब सैनी
Apr 25, 2026, 20:30 IST

चंडीगढ़, 25 अप्रैल प्रदेश भर की मंडियों में बंपर तोड़ गेहूं की आवक हुई है। अब मंडियों में अब तक 81 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई, जोकि पिछले चार साल में सबसे ज्यादा है। मंडियों में जियो-फेसिंग और सीसीटीवी से खरीद पर निगरानी खरी जा रही है, जिससे फर्जी आवक पर अंकुश लगा है।
शनिवार को हरियाणा निवास में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री नायब सैनी गेहूं खरीद के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि गेहूं खरीद में नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। सीएम ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के चलते मंडियों में व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो रही है और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो रहा है। जियो-फेंसिंग और सीसीटीवी निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से फर्जी खरीद पर पूरी तरह अंकुश लगाया गया है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व की सरकारों के समय न डिजिटल व्यवस्था थी, न पारदर्शिता थी, न समय पर भुगतान होता था। किसानों को मंडियों में लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता था, कागजी टोकन बनते थे और भुगतान के लिए हफ्तों, कभी-कभी महीनों का इंतजार करना पड़ता था। वर्ष 2014 से अब तक फसल खरीद की प्रक्रिया में बड़ा सुधार हुआ है। इससे पहले, केवल गेहूं और धान की ही खरीद एमएसपी पर होती थी। आज हरियाणा देश का पहला राज्य है, जहां सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद होती है। अब डिजिटल सिस्टम ने पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बना दिया है। एमएसपी पर सभी फसलों की खरीद सुनिश्चित कर हरियाणा ने देश में एक नई मिसाल कायम की है, जिससे किसानों का विश्वास और मजबूत हुआ है।सरकार ने खरीद प्रबंधों को लेकर पुख्ता इंतजाम किए, जिसके चलते प्रदेश में गेहूं खरीद का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है और किसानों को समय पर भुगतान भी किया जा रहा है।
इस अवसर पर विधायक निखिल मदान, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, खाद्य आपूर्ति विभाग के आयुक्त एवं सचिव जे गणेशन, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक वर्षा खांगवाल, मनीष लोहान तथा मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
प्रदेश की 416 मंडियों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे
मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल खरीद सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने प्रदेश की सभी 416 मंडियों व 281 खरीद केन्द्रों की जियो फेंसिंग की है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि मंडी से बाहर किसी अज्ञात स्थान पर कोई भी फर्जी खरीद संभव नहीं है। इसके साथ-साथ सीसीटीवी से खरीद प्रक्रिया की निगरानी हो रही है। प्रदेश की मंडियों में 932 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने फसल खराबे पर गत 11 सालों में किसानों को मुआवजे और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 16 हजार 160 करोड़ रुपये की राशि दी है। इसी के साथ ही ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ के तहत लगभग 20 लाख 18 हजार किसानों को 22 किश्तों में 7 हजार 562 करोड़ रुपये की राशि किसानों के बैंक खातों में डाली जा चुकी है।
टूटे और सिकुड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत की गई
नायब सैनी ने कहा कि सरकार ने आढ़ती की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उनका कमीशन 33 रुपये 75 पैसे प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 55 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसके अलावा इस वर्ष बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की फसल को प्रभावित किया है। लेकिन सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गुणवत्ता मानकों में राहत दी। पहले जहां चमक में कमी बिल्कुल स्वीकार नहीं थी, अब उसे 70 प्रतिशत तक स्वीकार किया गया है। टूटे और सिकुड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है। यह निर्णय खरीद शुरू होने की तारीख से लागू किया गया, ताकि किसी भी किसान को नुकसान न हो।
शनिवार को हरियाणा निवास में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री नायब सैनी गेहूं खरीद के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि गेहूं खरीद में नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। सीएम ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के चलते मंडियों में व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो रही है और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो रहा है। जियो-फेंसिंग और सीसीटीवी निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से फर्जी खरीद पर पूरी तरह अंकुश लगाया गया है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व की सरकारों के समय न डिजिटल व्यवस्था थी, न पारदर्शिता थी, न समय पर भुगतान होता था। किसानों को मंडियों में लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता था, कागजी टोकन बनते थे और भुगतान के लिए हफ्तों, कभी-कभी महीनों का इंतजार करना पड़ता था। वर्ष 2014 से अब तक फसल खरीद की प्रक्रिया में बड़ा सुधार हुआ है। इससे पहले, केवल गेहूं और धान की ही खरीद एमएसपी पर होती थी। आज हरियाणा देश का पहला राज्य है, जहां सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद होती है। अब डिजिटल सिस्टम ने पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बना दिया है। एमएसपी पर सभी फसलों की खरीद सुनिश्चित कर हरियाणा ने देश में एक नई मिसाल कायम की है, जिससे किसानों का विश्वास और मजबूत हुआ है।सरकार ने खरीद प्रबंधों को लेकर पुख्ता इंतजाम किए, जिसके चलते प्रदेश में गेहूं खरीद का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है और किसानों को समय पर भुगतान भी किया जा रहा है।
इस अवसर पर विधायक निखिल मदान, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, खाद्य आपूर्ति विभाग के आयुक्त एवं सचिव जे गणेशन, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक वर्षा खांगवाल, मनीष लोहान तथा मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
प्रदेश की 416 मंडियों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे
मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल खरीद सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने प्रदेश की सभी 416 मंडियों व 281 खरीद केन्द्रों की जियो फेंसिंग की है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि मंडी से बाहर किसी अज्ञात स्थान पर कोई भी फर्जी खरीद संभव नहीं है। इसके साथ-साथ सीसीटीवी से खरीद प्रक्रिया की निगरानी हो रही है। प्रदेश की मंडियों में 932 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने फसल खराबे पर गत 11 सालों में किसानों को मुआवजे और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 16 हजार 160 करोड़ रुपये की राशि दी है। इसी के साथ ही ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ के तहत लगभग 20 लाख 18 हजार किसानों को 22 किश्तों में 7 हजार 562 करोड़ रुपये की राशि किसानों के बैंक खातों में डाली जा चुकी है।
टूटे और सिकुड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत की गई
नायब सैनी ने कहा कि सरकार ने आढ़ती की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उनका कमीशन 33 रुपये 75 पैसे प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 55 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इसके अलावा इस वर्ष बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की फसल को प्रभावित किया है। लेकिन सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गुणवत्ता मानकों में राहत दी। पहले जहां चमक में कमी बिल्कुल स्वीकार नहीं थी, अब उसे 70 प्रतिशत तक स्वीकार किया गया है। टूटे और सिकुड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है। यह निर्णय खरीद शुरू होने की तारीख से लागू किया गया, ताकि किसी भी किसान को नुकसान न हो।

