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दिशा संस्थान में बौद्धिक दिव्यांगता, मनोविज्ञान और समाज सेवा पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, इंटर्नशिप विद्यार्थियों को मिला व्यवहारिक ज्ञान

 डॉ. मदन बेनीवाल व डॉ. संदीप सिंह ने दिव्यांग बच्चों की पहचान, मूल्यांकन और शिक्षण पद्धतियों पर डाला प्रकाश
 
 दिशा संस्थान में बौद्धिक दिव्यांगता, मनोविज्ञान और समाज सेवा पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, इंटर्नशिप विद्यार्थियों को मिला व्यवहारिक ज्ञान

 सिरसा 17 जुलाई 
दिशा संस्थान, सिरसा के सहयोग से लाड़ी बाई करियर काउंसलिंग सेंटर द्वारा संचालित विशेष शिक्षा इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिशा संस्थान के सचिव सुरेन्द्र भाटिया द्वारा आमंत्रित जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. मदन बेनीवाल एवं डॉ. संदीप सिंह ने इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों को बौद्धिक दिव्यांगता (Intellectual Disability) के विभिन्न पहलुओं से विस्तारपूर्वक अवगत कराया।
दोनों विशेषज्ञों ने बताया कि बौद्धिक दिव्यांग बच्चों की समय पर पहचान करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि उन्हें उनकी आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि ऐसे बच्चों में सीखने की गति सामान्य बच्चों की तुलना में धीमी होती है, दैनिक जीवन के कार्यों में कठिनाई आती है तथा संप्रेषण, सामाजिक व्यवहार और समस्या-समाधान जैसी क्षमताओं में भी चुनौतियाँ देखने को मिलती हैं। उन्होंने इन स्थितियों के संभावित कारणों में आनुवंशिक कारक, गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताएँ, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, संक्रमण, कुपोषण तथा मस्तिष्क संबंधी अन्य कारणों का उल्लेख किया।
व्याख्यान के दौरान डॉ. मदन बेनीवाल एवं डॉ. संदीप सिंह ने केस हिस्ट्री तकनीक, निरीक्षण विधि, व्यवहार मूल्यांकन तथा व्यक्तिगत अध्ययन के माध्यम से बच्चों की क्षमताओं का आकलन करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को धैर्य, सकारात्मक प्रोत्साहन, गतिविधि-आधारित शिक्षण तथा व्यक्तिगत शिक्षण योजना के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से सिखाया जा सकता है।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. दलजीत सिंह ने दोनों अतिथि वक्ताओं का स्वागत किया। दिशा संस्थान के सचिव सुरेन्द्र भाटिया ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को समाज सेवा के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।
काउंसलर कंचन मेहता ने इंटर्नशिप विद्यार्थियों के साथ मनोविज्ञान के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि किसी भी विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को समझने के लिए उसके व्यवहार, भावनाओं, सीखने की शैली और मानसिक विकास को जानना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर ही बच्चों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझा जा सकता है और उनके समग्र विकास के लिए प्रभावी हस्तक्षेप किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में सुरेन्द्र भाटिया ने दोनों विशेषज्ञों को दिशा संस्थान की ओर से स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। काउंसलर कंचन मेहता ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा साझा किया गया व्यवहारिक ज्ञान इंटर्नशिप विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा और भविष्य में विशेष बच्चों के साथ कार्य करने में उन्हें महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
दिशा संस्थान समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण एवं विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित करता रहता है, जिससे विशेष शिक्षा के विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभव प्राप्त हो सके। संस्थान में दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पुनर्वास एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।