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शहीद मदनलाल ढींगरा का बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा : जगदीश चौपड़ा

  
-शहीदी दिवस पर शहीद मदनलाल ढींगरा को नागरिक परिषद सिरसा के सदस्यों व अन्य गणमान्यों ने किया नमन
 
 शहीद मदनलाल ढींगरा का बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा : जगदीश चौपड़ा

सिरसा, 17 अगस्त।
महान क्रांतिकारी शहीद मदनलाल ढींगरा का शहीदी दिवस सोमवार को नागरिक परिषद सिरसा की ओर से दिल्ली पुल स्थित शहीद मदनलाल ढींगरा चौक पर श्रद्धा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में शहर के विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक संगठनों से जुड़े गणमान्य नागरिकों ने शहीद मदनलाल ढींगरा की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश की स्वतंत्रता के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया।
कार्यक्रम में नागरिक परिषद सिरसा के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री के पूर्व राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा, नागरिक परिषद के सचिव सुरेंद्र भाटिया, कंज्यूमर फोरम के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप मेहता एडवोकेट, श्याम बजाज, नगर पार्षद रमेश मेहता, वीरभान मेहता, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रमेश मेहता, गुरु नानक चैरिटेबल ट्रस्ट के सुरेंद्र सिंह वैदवाला, अमन चोपड़ा, एडवोकेट राम सिंह बैनीवाल, प्रोफेसर रविंद्र पुरी, गुरजीत मान, मुकेश ढींगरा, पूर्व अध्यक्ष गुरदेव सिंह राही तथा हरबंस नारंग, सुनील मेहता, कृष्णा मेहता सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
शहीद मदनलाल ढींगरा की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद गुरु नानक स्कूल के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ शहीदों को नमन किया गया। बच्चों की देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों में राष्ट्रप्रेम और बलिदान की भावना का संचार किया।
इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए नागरिक परिषद के अध्यक्ष जगदीश चोपड़ा ने कहा कि शहीद मदनलाल ढींगरा का बलिदान देश कभी भुला नहीं सकता। उन्होंने कहा कि मात्र 25 वर्ष की आयु में मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले मदनलाल ढींगरा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारियों में शामिल हैं। उनका जन्म 18 सितंबर 1883 को अमृतसर में हुआ था। उच्च शिक्षा के लिए वे इंग्लैंड गए, जहां वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और क्रांतिकारी विचारधारा से प्रभावित हुए। लंदन में उनका संपर्क इंडिया हाउस तथा विनायक दामोदर सावरकर सहित अनेक राष्ट्रवादी क्रांतिकारियों से हुआ।
जगदीश चोपड़ा ने कहा कि 1 जुलाई 1909 को लंदन में मदनलाल ढींगरा ने ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हट कर्जन वायली की गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन उन्होंने अपने कदम से पीछे हटने के बजाय अदालत में भी निर्भीकता के साथ भारत की स्वतंत्रता के पक्ष में अपने विचार रखे। ब्रिटिश अदालत ने उन्हें मृत्युदंड सुनाया और 17 अगस्त 1909 को लंदन की पेंटनविल जेल में मात्र 25 वर्ष की आयु में उन्हें फांसी दे दी गई। उनका बलिदान आने वाली पीढिय़ों के क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा बना।
नागरिक परिषद के सचिव सुरेंद्र भाटिया ने कहा कि शहीद मदनलाल ढींगरा ने युवावस्था में जिस साहस और दृढ़ता के साथ ब्रिटिश शासन को चुनौती दी, वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। ब्रिटिश शासन ने मुकदमे की प्रक्रिया पूरी कर बेहद कम समय में उन्हें फांसी दे दी, लेकिन उनकी शहादत ने देश के युवाओं में स्वतंत्रता की लौ को और प्रज्वलित किया।
सुरेंद्र भाटिया ने मांग की कि शहीद मदनलाल ढींगरा के शहीदी दिवस को प्रदेश स्तर पर सरकारी रूप से मनाया जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब की धरती का इस महान क्रांतिकारी से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। नई पीढ़ी को ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के जीवन, संघर्ष तथा बलिदान से परिचित करवाना समय की आवश्यकता है। प्रदेश स्तर पर आयोजन होने से युवाओं को देशभक्ति, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिलेगी।