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हरियाणा की फेल होती प्रशासनिक व्यवस्था पर कुमारी सैलजा का तीखा प्रहार

 कहा- मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है प्रदेश की जनता,
 
 हरियाणा की फेल होती प्रशासनिक व्यवस्था पर कुमारी सैलजा का तीखा प्रहार 
 चंडीगढ़, 04 मई। 

सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने हरियाणा में बिगड़ती प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। हाल ही में सामने आई घटनाओं और समाचार रिपोर्टों का हवाला देते हुए सांसद ने कहा कि प्रदेश में सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दमकल विभाग के कर्मचारियों की लंबी हड़ताल, फायर सिस्टम की विफलता और लापरवाही के चलते एक युवती की मौत होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। यह घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट उदाहरण है। जब आपातकालीन सेवाएं ही ठप पड़ जाएं, तो यह सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

कुमारी सैलजा ने सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहरों में फैली गंदगी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सड़को पर कूड़े के ढेर लगना, बीमारियों का खतरा बढ़ना और नागरिकों का जीवन प्रभावित होना दर्शाता है कि सरकार शहरी प्रबंधन में पूरी तरह विफल रही है। जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है, जो किसी भी सरकार की पहली जिम्मेदारी होती है। कुमारी सैलजा ने कहा कि दमकल विभाग और नगर निकायों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं, कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार है और उन्हें पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं। कर्मचारियों की जायज मांगों की अनदेखी कर सरकार केवल हालात बिगड़ने का इंतजार कर रही है, जो बेहद गैर जिम्मेदाराना रवैया है। 

सांसद कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की कि आपातकालीन सेवाओं को तुरंत प्रभाव से सुचारू किया जाए, कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाए, शहरी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाए जाएं। कुमारी सैलजा कहा कि अगर सरकार ने जल्द ही हालात नहीं संभाले, तो प्रदेश में स्थिति और भयावह हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस पार्टी जनता के मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी। सांसद ने कहा कि हरियाणा की जनता सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित जीवन की हकदार है, लेकिन वर्तमान सरकार की नीतियों ने उसे संकट में डाल दिया है।