ग्रुप डी की नौकरी के साथ एचसीएस की तैयारी, किशनपुरा के सतवीर सिंहमार ने हासिल किया 49वां रैंक

-सिरसा, 10 अक्तूबर। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना और असफलता के बाद भी लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना आसान नहीं है। जिले के ऐलनाबाद उपमंडल के गांव किशनपुरा के सतवीर सिंहमार ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से इस चुनौती को पार कर हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा में प्रदेशभर में 49वां रैंक हासिल किया है। बीसीए वर्ग में उन्होंने छठा स्थान प्राप्त किया है। फिलहाल सतवीर कृषि विभाग में ग्रुप डी के तहत फील्डमैन के पद पर कार्यरत हैं। सतवीर के लिए यह सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि इससे पहले उन्होंने वर्ष 2022 में यूपीएससी की परीक्षा दी थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी जारी रखी और आखिरकार एचसीएस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर अपनी काबिलियत साबित की।
- पिता चलाते हैं किरयाणा की दुकान, भाई पंचायत विभाग में सचिव
सतवीर सिंहमार गांव किशनपुरा निवासी राम सिंह सिंहमार के बेटे हैं। उनके पिता किरयाणा की दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। तीन भाई-बहनों में सतवीर के बड़े भाई विनोद कुमार पंचायत विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। उनका चयन लेक्चरर के पद पर भी हुआ है, हालांकि उन्होंने अभी तक इस पद पर ज्वाइन नहीं किया है। सतवीर की बहन शिक्षिका हैं।
- बस में सफर के दौरान भी जारी रखी पढ़ाई
सतवीर व उनके बड़े भाई विनोद कुमार ने बताया कि नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सतवीर ने समय का पूरा सदुपयोग किया। वह नौकरी पर आने-जाने के दौरान बस में मोबाइल से आॅनलाइन बैच की वीडियो देखते और पढ़ाई करते थे। परीक्षा के प्री और मेन्स चरण के साथ इंटरव्यू से पहले उन्होंने छुट्टियां लेकर तैयारी पर विशेष ध्यान दिया। नौकरी की जिम्मेदारियों और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए सतवीर ने लगातार मेहनत की। इसी का नतीजा रहा कि उन्होंने एचसीएस परीक्षा में प्रदेशभर में 49वां रैंक हासिल किया। सतवीर की इस उपलब्धि से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने उन्हें और उनके परिवार को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उनकी सफलता क्षेत्र के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी या अन्य जिम्मेदारियों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सतवीर ने साबित किया कि असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि नए प्रयास की शुरुआत हो सकती है।

