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जंतर-मंतर आंदोलन की जीत डॉ. भीमराव अंबेडकर के लोकतांत्रिक विजन की ऐतिहासिक विजय: लाल बहादुर खोवाल

 धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट ने जताई खुशी, कहा - युवाओं के संघर्ष और लोकतंत्र की जीत
 
 जंतर-मंतर आंदोलन की जीत डॉ. भीमराव अंबेडकर के लोकतांत्रिक विजन की ऐतिहासिक विजय: लाल बहादुर खोवाल

  हिसार, 26 जुलाई

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफे के बाद कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट हरियाणा ने खुशी व्यक्त की है। कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट हरियाणा के स्टेट चेयरमैन एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल और स्टेट मीडिया कॉर्डिनेटर एडवोकेट बजरंग इंदल ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि हठधर्मी मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा जंतर-मंतर पर संघर्षरत लाखों युवाओं, भारतीय लोकतंत्र और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संवैधानिक विजन की ऐतिहासिक जीत है। यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं बल्कि संविधान की उस शक्ति का प्रमाण है जिसके सामने अंततः सत्ता और अहंकार को झुकना ही पड़ता है। एडवोकेट खोवाल और एडवोकेट इंदल ने कहा कि पिछले कई सप्ताह से देशभर के युवा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक, पारदर्शी भर्ती,जवाबदेही,धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा की मांग को लेकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन कर रहे थे।लेकिन मोदी सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय दमन, लाठीचार्ज, गिरफ्तारी और बल प्रयोग का रास्ता चुना। इसके बावजूद युवा डटे रहे और अंततः सरकार को झुकना पड़ा। यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है कि जनता की आवाज़ अंत में सत्ता से बड़ी साबित होती है।कांग्रेस पार्टी पहले दिन से युवाओं के साथ पूरी मजबूती से खड़ी रही। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा सहित कांग्रेस के सभी सांसदों ने काले वस्त्र पहनकर संसद परिसर में विरोध दर्ज कराया और संसद के भीतर लगातार छात्रों की आवाज़ बुलंद की। पूरा देश देख रहा था कि जब छात्र जंतर-मंतर पर संघर्ष कर रहे थे तब कांग्रेस उनकी आवाज़ संसद में बनकर लड़ रही थी। इस जनदबाव और संसदीय संघर्ष ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया।उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्वर देने, युवाओं की मांगों को पूरे देश तक पहुँचाने और सरकार को जवाबदेह बनाने में राहुल गांधी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कांग्रेस ने इस संघर्ष को केवल एक परीक्षा या एक संगठन तक सीमित नहीं रहने दिया बल्कि इसे देश के भविष्य, शिक्षा और युवाओं के सम्मान का प्रश्न बनाया। आज जो जीत दिखाई दे रही है वह लाखों युवाओं के संघर्ष और कांग्रेस द्वारा संसद से सड़क तक किए गए निरंतर समर्थन का परिणाम है।खोवाल और इंदल ने कहा कि जंतर-मंतर आंदोलन ने देश के युवाओं को बहुत बड़ी सीख दी है। युवाओं ने सीखा कि संविधान पर भरोसा रखकर, लोकतांत्रिक तरीके से, संगठन और एकता के बल पर सबसे शक्तिशाली सरकार को भी झुकाया जा सकता है।छात्रों ने आंदोलन की संस्कृति, सामाजिक एकता, जनसंवाद, संवैधानिक अधिकारों, अनुशासन और लोकतांत्रिक संघर्ष की शक्ति को महसूस किया। यह आंदोलन आने वाले समय में देश के सामाजिक आंदोलनों की नई पाठशाला बन चुका है। खोवाल और इंदल ने कहा कि इस आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि हर जाति, हर धर्म, हर भाषा और हर प्रदेश के युवा एक मंच पर आए। वे किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि देश, लोकतंत्र, संविधान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़े। यह भारत की लोकतांत्रिक चेतना का सबसे सुंदर उदाहरण है।अब “जय भीम” का नारा केवल एक सामाजिक अभिवादन नहीं रहा बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर, संवैधानिक अधिकारों और शिक्षा में बराबरी के संघर्ष का केंद्र बिंदु बन चुका है। जंतर-मंतर ने बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर के विचारों को नई पीढ़ी के बीच और अधिक मजबूत किया है।बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को उद्धृत करते हुए एडवोकेट बजरंग इंदल ने कहा कि शिक्षा शेरनी का दूध है जो पिएगा वो दहाड़ेगा। जंतर-मंतर पर युवाओं ने अपने ज्ञान, अधिकारों की चेतना और लोकतांत्रिक संघर्ष से यह साबित कर दिया है कि जब देश का शिक्षित युवा अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ दहाड़ता है तो तानाशाह सरकारों की नीवें हिल जाती हैं और उन्हें झुकना ही पड़ता है।उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा संघर्ष का अंत नहीं बल्कि व्यापक शिक्षा सुधार की शुरुआत है। एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने कहा की कांग्रेस की स्पष्ट रणनीति है कि देशभर में युवाओं के बीच संवाद अभियान चलाया जाएगा, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाकर छात्रों की समस्याएं सुनी जाएंगी, प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित कराने के लिए संघर्ष होगा, पेपर लीक रोकने के लिए कठोर एवं प्रभावी कानून सरकार पर दबाव डालकर बनवाया जाएगा, भर्ती परीक्षाओं को समयबद्ध किया जाए और शिक्षा व्यवस्था को रोजगारपरक, वैज्ञानिक तथा आधुनिक बनाया जाए ताकि डिग्री के साथ युवाओं को सम्मानजनक रोजगार भी मिल सके।जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को अत्यंत गंभीर बताते हुए इसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने तथा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों में पेलेट गन जैसे हथियारों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षा और संविधान की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष कर रहे युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार किया गया। लोकतांत्रिक आंदोलनों में अत्यधिक बल प्रयोग पर गंभीर प्रश्न उठते हैं और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अब भारी जनदबाव में है।धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में भाजपा के बड़े नेताओं द्वारा दिए जा रहे बयान यह दर्शाते हैं कि सरकार अपनी राजनीतिक क्षति को लेकर चिंतित है। देश के युवाओं में शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती घोटालों को लेकर व्यापक असंतोष है।जनता अब जवाब चाहती है बहाने नहीं।खोवाल ने कहा कि आज देश की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। भाजपा की नीतियों से आम जनता, किसान, मजदूर, कर्मचारी और युवा लगातार निराश हुए हैं। जनता का भरोसा सरकार से कमजोर हुआ है क्योंकि वह संवाद की बजाय दमन को प्राथमिकता देती रही। जंतर-मंतर आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश का युवा अब चुप रहने वाला नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से जवाब मांगना जानता है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट हरियाणा जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल प्रत्येक छात्र, युवा, शिक्षक, अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता और लोकतांत्रिक ताकत को सलाम करता है। यह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि संविधान की रक्षा, शिक्षा के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए किया गया शांतिपूर्ण संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिली यह जीत किसी दल या व्यक्ति की नहीं बल्कि भारत के संविधान, लोकतंत्र और युवाओं की सामूहिक चेतना की जीत है।अब देश ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहता है जिसमें पेपर लीक न हो, भर्ती समय पर हो, शिक्षा रोजगार से जुड़े और हर युवा को समान अवसर मिले। यही जंतर-मंतर आंदोलन का वास्तविक संदेश और भविष्य की दिशा है।