LPG ला रहे भारतीय जहाज ने होर्मुज पार किया:46 हजार टन गैस लदी; ईरान बोला- भारत से सदियों पुराना रिश्ता, दोस्ती और मजबूत करेंगे
हॉर्मुज स्ट्रेट में भारत की कूटनीतिक सफलता, अभी तक कुल आठ जहाज सुरक्षित निकले, और दो जहाज निकलने की तैयारी में
Apr 4, 2026, 20:38 IST

नई दिल्ली, 04 अप्रैल पश्चिम दिशा में जारी जंग के दौरान भारत के एलपीजी टैंकर ग्रीन सानवी ने सफलता पूर्वक हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर आज एक बार फिर देश को काफी राहत वाली खबर दी है। अमेरिका और इजरायल तथा ईरान के बीच जारी जंग की वजह से हॉर्मुज स्ट्रेट के रास्ते गुजरने वाले माल वाहक जहाज और ऑयल या गैस टैंकर की आवाजाही लगभग ठप पड़ी हुई है। ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी कर देने के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा है। ऐसी स्थिति में भारत के ऑयल और गैस टैंकर्स के इस रास्ते से सुरक्षित गुजरने से भारत की कूटनीतिक सफलता जग जाहिर हो गई है।
हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के कारण वहां दुनिया भर के जहाज फंसे हुए हैं। वहीं भारत एक-एक कर अपने जहाजों को वहां से सुरक्षित निकल रहा है। ग्रीन सानवी समेत अभी तक कम से कम आठ भारतीय जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकल चुके हैं। इनमें ग्रीन सानवी के अलावा शिवालिक, नंदा देवी, जग लाड़की, पाइन गैस, जग वसंत, बीडब्ल्यू टायर और बीडब्ल्यू एल्म के नाम शामिल हैं।
इन आठ जहाजों के अलावा दो और जहाज ग्रीन आशा और जग विक्रम के भी आने वाले दिनों में हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचने की उम्मीद है। इस तरह भारत का नाम उन देशों में शामिल हो गया है, जिनके सबसे ज़्यादा जहाज युद्ध प्रभावित हॉर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरे हैं। इससे भारत की ऊर्जा सप्लाई बनी हुई है और आम लोगों की ईंधन की जरूरत पूरी हो रही है।
जानकारों का कहना है कि इन जहाजों के सुरक्षित गुजरने से यह साफ है कि भारत ने मुश्किल हालात में भी अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखा है। भारत के आठ जहाजों के सुरक्षित निकल जाने के बावजूद इस समय 15 से ज्यादा भारतीय झंडे वाले जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर मौजूद हैं, जिन पर करीब 485 भारतीय नाविक सवार हैं। उम्मीद की जा रही है कि भारत सरकार ईरान से बातचीत कर जल्दी ही इन जहाजों को भी हॉर्मुज के रास्ते सुरक्षित निकालने में सफल रहेगी।
आपको बता दें कि हॉर्मुज स्ट्रेट समुद्र का वह संकरा रास्ता है, जहां से दुनिया का लगभग 20 से 30 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद ईरान ने ये रास्ता ब्लॉक कर दिया था। हॉर्मुज का रास्ता सबसे संकरी जगह पर सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है। इसके एक तरफ ओमान है और दूसरी तरफ ईरान। ईरान के पास ऐसी मिसाइलें हैं, जो किसी भी विशाल टैंकर को यहां अपने हमले से कुछ देर में ही समुद्र में डुबो सकती हैं।
राहत की बात ये है कि युद्ध के बावजूद ईरान के साथ भारत सरकार लगातार कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखे हुए है। इसी बातचीत के कारण पिछले सप्ताह ही ईरान ने कहा था कि अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के अलावा मित्र देशों के जहाज ईरानी अधिकारियों के साथ कोऑर्डिनेशन में हॉर्मुज को पार कर सकते हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि हॉर्मुज स्ट्रेट उन देशों के लिए चालू है, जो तेहरान के साथ जुड़े हुए हैं और जिन्हें दोस्त माना जाता है। इस क्रम में उन्होंने भारत का उल्लेख भी दोस्त के रूप में किया था।
हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के कारण वहां दुनिया भर के जहाज फंसे हुए हैं। वहीं भारत एक-एक कर अपने जहाजों को वहां से सुरक्षित निकल रहा है। ग्रीन सानवी समेत अभी तक कम से कम आठ भारतीय जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकल चुके हैं। इनमें ग्रीन सानवी के अलावा शिवालिक, नंदा देवी, जग लाड़की, पाइन गैस, जग वसंत, बीडब्ल्यू टायर और बीडब्ल्यू एल्म के नाम शामिल हैं।
इन आठ जहाजों के अलावा दो और जहाज ग्रीन आशा और जग विक्रम के भी आने वाले दिनों में हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचने की उम्मीद है। इस तरह भारत का नाम उन देशों में शामिल हो गया है, जिनके सबसे ज़्यादा जहाज युद्ध प्रभावित हॉर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरे हैं। इससे भारत की ऊर्जा सप्लाई बनी हुई है और आम लोगों की ईंधन की जरूरत पूरी हो रही है।
जानकारों का कहना है कि इन जहाजों के सुरक्षित गुजरने से यह साफ है कि भारत ने मुश्किल हालात में भी अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखा है। भारत के आठ जहाजों के सुरक्षित निकल जाने के बावजूद इस समय 15 से ज्यादा भारतीय झंडे वाले जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर मौजूद हैं, जिन पर करीब 485 भारतीय नाविक सवार हैं। उम्मीद की जा रही है कि भारत सरकार ईरान से बातचीत कर जल्दी ही इन जहाजों को भी हॉर्मुज के रास्ते सुरक्षित निकालने में सफल रहेगी।
आपको बता दें कि हॉर्मुज स्ट्रेट समुद्र का वह संकरा रास्ता है, जहां से दुनिया का लगभग 20 से 30 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद ईरान ने ये रास्ता ब्लॉक कर दिया था। हॉर्मुज का रास्ता सबसे संकरी जगह पर सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है। इसके एक तरफ ओमान है और दूसरी तरफ ईरान। ईरान के पास ऐसी मिसाइलें हैं, जो किसी भी विशाल टैंकर को यहां अपने हमले से कुछ देर में ही समुद्र में डुबो सकती हैं।
राहत की बात ये है कि युद्ध के बावजूद ईरान के साथ भारत सरकार लगातार कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखे हुए है। इसी बातचीत के कारण पिछले सप्ताह ही ईरान ने कहा था कि अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के अलावा मित्र देशों के जहाज ईरानी अधिकारियों के साथ कोऑर्डिनेशन में हॉर्मुज को पार कर सकते हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि हॉर्मुज स्ट्रेट उन देशों के लिए चालू है, जो तेहरान के साथ जुड़े हुए हैं और जिन्हें दोस्त माना जाता है। इस क्रम में उन्होंने भारत का उल्लेख भी दोस्त के रूप में किया था।

