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‘शुद्धिकरण’ जैसी घटनाएं सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के लिए चिंताजनक : कुमारी सैलजा

 कहा-किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करने वाली सोच का लोकतांत्रिक भारत में कोई स्थान नहीं
 
 ‘शुद्धिकरण’ जैसी घटनाएं सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के लिए चिंताजनक : कुमारी सैलजा
 मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हल्द्वानी प्रकरण पर बोलीं-राजनीतिक मतभेद अपनी जगह, लेकिन सामाजिक गरिमा और समानता के संवैधानिक सिद्धांतों से समझौता स्वीकार नहीं

 चंडीगढ़, 27 अगस्त। 

सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी में हुई जनसभा के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ से जुड़े प्रकरण को गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि आधुनिक भारत में जाति के आधार पर किसी व्यक्ति को अपमानित या हीन महसूस कराने वाली मानसिकता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा है कि इससे उन्हें छुआछूत का एहसास हुआ और उनका अपमान हुआ। ऐसे में इस विषय को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित करने के बजाय इसकी गंभीरता को समझना चाहिए। सांसद ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में किसी भी व्यक्ति की जाति, धर्म अथवा सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली कोई भी घटना संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है।

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की ओर से कथित ‘शुद्धिकरण’ के समर्थन में सामने आए बयान इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। जिम्मेदार राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे समाज को जोड़ने, भेदभाव समाप्त करने और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने वाली भाषा का प्रयोग करें। यदि किसी घटना से समाज के किसी वर्ग की गरिमा आहत होती है तो उसका बचाव करने के बजाय संवेदनशीलता के साथ स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को भी इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। देश यह जानना चाहता है कि क्या भाजपा नेतृत्व सार्वजनिक स्थल के ‘शुद्धिकरण’ जैसी परंपराओं को उचित मानता है या वह जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करता है।

सांसद ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संवैधानिक व्यवस्था ने प्रत्येक नागरिक को समानता, सम्मान और गरिमा का अधिकार दिया है। भारत ने दशकों की सामाजिक और लोकतांत्रिक यात्रा में छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव के विरुद्ध लंबा संघर्ष किया है। ऐसे समय में ऐसी कोई भी घटना या बयान, जिससे पुरानी भेदभावपूर्ण मानसिकता को बढ़ावा मिलता दिखाई दे, समाज के लिए चिंताजनक है।

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मनुष्य की गरिमा और समानता पर कोई समझौता नहीं हो सकता

कुमारी सैलजा ने कहा कि यह मामला केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे या किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। सवाल देश के करोड़ों दलितों, वंचितों और उन सभी नागरिकों की गरिमा का है, जो संविधान की समानता और सामाजिक न्याय की भावना में विश्वास रखते हैं। राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन मनुष्य की गरिमा और समानता पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

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किसी भी इंसान का मूल्यांकन उसकी जाति से नहीं होता

कुमारी सैलजा ने कहा कि देश को उन जातिवादी सोच से मुक्त करने के लिए सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को जिम्मेदारी निभानी होगी। आज आवश्यकता किसी व्यक्ति या मंच के ‘शुद्धिकरण’ की नहीं, बल्कि उस सोच को समाप्त करने की है जो आज भी किसी इंसान का मूल्यांकन उसकी जाति के आधार पर करती है। भारत बाबा साहेब के संविधान, समानता, सामाजिक न्याय और भाईचारे के सिद्धांतों से ही आगे बढ़ेगा।