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एसजीटीयू में रामानुजन रिसर्च सेंटर का शुभारंभ

 गणितीय मेधावी छात्रों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण 
 
 एसजीटीयू में रामानुजन रिसर्च सेंटर का शुभारंभ 

 गुरुग्राम 21 सितंबर। एसजीटी यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम ने गणित विभाग, स्कूल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंसेज तथा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सहयोग से  रामानुजन रिसर्च सेंटर (आरआरसी) का शुभारंभ (उद्घाटन) किया। गणितीय शोध, अंतर-विषयक सहयोग, नवाचार एवं जनसंपर्क को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम में विद्यालयों के प्राचार्यों, प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने भारत की समृद्ध गणितीय विरासत का उत्सव मनाने हेतु भाग लिया।
कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ ,इसके पश्चात् माननीय प्रो-वाइस चांसलर डॉ. अतुल नासा का स्वागत भाषण हुआ। सम्मानित अतिथियों द्वारा एक परिचयात्मक वीडियो के माध्यम से केंद्र का उद्घाटन किया गया, इसके बाद रामानुजन रिसर्च सेंटर की माननीय निदेशक डॉ. अनिता शर्मा ने केंद्र के दृष्टिकोण—शोध, सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्‍होंने विद्यार्थियों की शीघ्र पहचान और उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने पर बल दिया। आरआरसी ने गणितीय रूप से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की शीघ्र पहचान हेतु "रामानुजन प्रतिभा खोज" पहल का शुभारंभ किया। प्रत्येक वर्ष 15 लाख से अधिक विद्यार्थी जेईई प्रवेश परीक्षा में बैठते हैं, परंतु जागरूकता एवं समुचित प्रशिक्षण के अभाव में नेशनल बोर्ड ऑफ हायर मैथमेटिक्स द्वारा आयोजित ओलंपियाड में मात्र 20,000 या उससे भी कम विद्यार्थी ही भाग ले पाते हैं। इस क्रम में अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थी पीछे छूट जाते हैं। रामानुजन अनुसंधान केंद्र इस दिशा में पहल कर गणितीय मेधावी छात्रों को समुचित प्रशिक्षण देगा।
आरआरसी स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी विद्यार्थियों में शोध को प्रोत्साहित करते हुए इस अंतर को पाटने की पहल करेगा। आरआरसी का उद्देश्य युवाओं और प्रतिष्ठित गणितज्ञों, वैज्ञानिकों तथा शोधकर्ताओं के बीच संवाद को भी सशक्त बनाना है।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन को मात्र औपचारिक  रूप से स्मरण करना ही सच्ची श्रद्धांजलि नहीं है; आज की आवश्यकता उनके कार्य को आगे बढ़ाते हुए उस पर और अधिक शोध करने की है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार डॉ. वेदवीर आर्य ने "वैदिक युग से रामानुजन तक: भारत की प्रतिभा की सतत कालक्रम-परंपरा की पुनर्स्थापना" विषय पर मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने श्रीनिवास रामानुजन को प्राप्त विरासत को उजागर करते हुए भारत की गणितीय परंपरा और बौधायन, आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य द्वितीय, माधव, नीलकंठ तथा श्रीनिवास रामानुजन जैसे विद्वानों के योगदान पर प्रकाश डाला। इसमें अंकगणित, ज्यामिति, बीजगणित, त्रिकोणमिति, कलन (कैलकुलस) और संख्या सिद्धांत जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ शतपथ ब्राह्मण से लेकर आज के डिजिटल युग तक, प्राचीन काल से π (पाई) की खोज की चर्चा भी शामिल रही।
कार्यक्रम में श्री विशाल भाटिया ने "गणितीय चिंतन के विकास को प्रोत्साहित करना" विषय पर अपने विचार रखे और श्रोताओं के समक्ष कई रोचक एवं चुनौतीपूर्ण प्रश्न प्रस्तुत किए। डॉ. अग्रज गुप्ता ने "विस्फोटक डेटा युग में डेटा को समझने का कौशल" विषय के महत्व पर बात करते हुए गणितीय चिंतन को डेटा एवं विश्लेषणात्मक कौशल से जोड़ा।
जेएनयू के गणित विभाग से प्रो. गजेंद्र सिंह ने रामानुजन रिसर्च सेंटर के नाम में छिपे रोचक अंक-प्रतिरूपों, रामानुजन मैजिक स्क्वेयर तथा रामानुजन के जीवनकाल के कुल दिनों की गणना से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया और चर्चा को अभाज्य संख्याओं (प्राइम नंबर्स) की ओर आगे बढ़ाया।
समारोह का समापन डॉ. प्रदीप मलिक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, इसके पश्चात् राष्ट्रगान, सामूहिक छायाचित्र, नेटवर्किंग सत्र और भोजन का आयोजन हुआ।
यह उद्घाटन श्रीनिवास रामानुजन और भारतीय गणित से प्रेरित शोध उत्कृष्टता, गणितीय विरासत, अंतर-विषयक सहयोग, नवाचार और युवा गणितीय प्रतिभाओं के पोषण हेतु समर्पित एक नई शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत है। उद्घाटन कार्यक्रम के सहयोगी संस्थान कोफाल्ट ग्लोबल तथा आई-विन रहे। कोफाल्ट ग्लोबल की निदेशक सुश्री विभा गुप्ता ने बताया कि वैदिक गणित किस प्रकार पैटर्न पहचानने और अंकों के साथ खेल के माध्यम से विद्यार्थियों को गणित के भय से मुक्त होने में सहायक होता है। इस कार्यक्रम में 25 से अधिक विद्यालय प्राचार्यों, निदेशकों, विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों तथा एससीईआरटी, एनसीईआरटी और अन्य सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।