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प्राकृतिक और मानव निर्मित फाइबर की पहचान

 सही वस्त्र चयन के लिए फाइबर की प्रकृति, गुण और उपयोग को समझना जरूरी
 
 प्राकृतिक और मानव निर्मित फाइबर की पहचान

 लेखमाला भाग–13

फैशन डिजाइनिंग में केवल आकर्षक परिधान का डिजाइन तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है। एक अच्छे डिजाइनर के लिए यह जानना भी आवश्यक है कि जिस कपड़े का वह उपयोग कर रहा है, वह किस प्रकार के फाइबर से बना है और उसकी विशेषताएं क्या हैं। कपड़े की मजबूती, चमक, आराम, नमी सोखने की क्षमता, गर्मी सहने की क्षमता और उसकी देखभाल काफी हद तक उसके फाइबर पर निर्भर करती है। इसलिए टेक्सटाइल की शिक्षा में प्राकृतिक और मानव निर्मित फाइबर की पहचान एक महत्वपूर्ण विषय है।

फाइबर क्या है?

फाइबर अर्थात रेशा वस्त्र निर्माण की सबसे छोटी मूल इकाई है। इन्हीं रेशों को विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा धागे में परिवर्तित किया जाता है और धागों से बुनाई या निटिंग के माध्यम से कपड़ा तैयार होता है। फाइबर को मुख्य रूप से दो वर्गों—प्राकृतिक फाइबर और मानव निर्मित फाइबर—में बांटा जाता है।

प्राकृतिक फाइबर

प्रकृति से प्राप्त होने वाले रेशों को प्राकृतिक फाइबर कहा जाता है। ये मुख्य रूप से पौधों और पशुओं से प्राप्त होते हैं।

कपास (Cotton) पौधों से प्राप्त होने वाला सबसे प्रचलित प्राकृतिक फाइबर है। यह मुलायम, आरामदायक और नमी सोखने वाला होता है। इसलिए गर्मियों के परिधानों, बच्चों के कपड़ों, कुर्तियों और दैनिक उपयोग के वस्त्रों में इसका व्यापक प्रयोग किया जाता है।

लिनेन (Linen) फ्लैक्स पौधे से प्राप्त होता है। यह मजबूत और ठंडक प्रदान करने वाला फाइबर है तथा गर्म मौसम के परिधानों के लिए उपयोगी माना जाता है।

पशु स्रोतों से प्राप्त फाइबर में ऊन (Wool) और रेशम (Silk) प्रमुख हैं। ऊन शरीर को गर्म रखने में सहायक होता है, इसलिए इसका उपयोग सर्दियों के वस्त्रों में किया जाता है। रेशम अपनी चमक, कोमलता और सुंदर ड्रेप के कारण साड़ी, सूट तथा विशेष अवसरों के परिधानों में लोकप्रिय है।

मानव निर्मित फाइबर

जिन फाइबरों का निर्माण औद्योगिक और रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा किया जाता है, उन्हें मानव निर्मित फाइबर कहा जाता है। इनमें पॉलिएस्टर, नायलॉन, एक्रिलिक और रेयॉन जैसे फाइबर शामिल हैं।

पॉलिएस्टर मजबूत, टिकाऊ और कम सिकुड़ने वाला होता है। इसकी देखभाल भी अपेक्षाकृत आसान होती है। नायलॉन हल्का और मजबूत होता है, जबकि एक्रिलिक का उपयोग कई ऐसे वस्त्रों में किया जाता है जहां ऊन जैसा स्पर्श और गर्माहट अपेक्षित हो। रेयॉन प्राकृतिक सेल्यूलोज को प्रसंस्कृत करके बनाया जाता है और इसकी सुंदर फॉल इसे अनेक फैशन परिधानों के लिए उपयोगी बनाती है।

फाइबर की पहचान कैसे करें?

फाइबर की पहचान उसके स्पर्श, चमक, बनावट, सिकुड़ने की प्रवृत्ति और नमी सोखने की क्षमता जैसे गुणों को देखकर की जा सकती है। टेक्सटाइल अध्ययन में प्रशिक्षित मार्गदर्शन और उचित सुरक्षा के साथ विभिन्न परीक्षणों द्वारा भी फाइबर की पहचान समझाई जाती है।

फैशन डिजाइनर के लिए इसका महत्व

एक कुशल फैशन डिजाइनर को डिजाइन के साथ सही फाइबर और फैब्रिक का चयन करना आना चाहिए। गर्मियों के लिए आरामदायक, सर्दियों के लिए गर्म तथा विशेष अवसरों के लिए आकर्षक कपड़े का चुनाव तभी बेहतर होगा, जब डिजाइनर को फाइबर के गुणों की जानकारी होगी।

इस प्रकार प्राकृतिक और मानव निर्मित फाइबर की सही पहचान वस्त्र विज्ञान और फैशन डिजाइनिंग की मजबूत बुनियाद है। सही फाइबर का चुनाव परिधान को केवल सुंदर ही नहीं बनाता, बल्कि उसे आरामदायक, उपयोगी और टिकाऊ भी बनाता है।

कंचन मेहता
एम.ए. फैशन डिजाइनिंग
इंस्ट्रक्टर, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा