नहरों में किसी कीमत पर नहीं डालने दिया जाएगा हिसार-घग्गर ड्रेन का पानी: मंगेज चौधरी

सिरसा 07 जुलाई हिसार-घग्गर ड्रेन किसी कीमत पर पेयजल सप्लाई की नहरों में नहीं डालने दिया जाएगा। सरकार की मंशा हरियाणा-राजस्थान के किसानों के बीच दीवार बनवाकर उन्हें आपस में लड़वाने की है, लेकिन हरियाणा-राजस्थान का किसान जागरूक है और सरकार की इस मंशा को किसी कीमत पर पूरा नहीं होने देगा। उपरोक्त बातें अखिल भारतीय किसान सभा हनुमानगढ़ के जिलाध्यक्ष मंगेज चौधरी ने सिरसा में मीडिया से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सरकार ने हिसार-घग्गर ड्रेन का पानी निकालने के लिए 35 लाख रुपए का टेंडर निकाला, जिसके तहत इस डेÑन के पानी को चोपटा क्षेत्र से होकर जाने वाली पेयजल सप्लाई करने वाली नहरों में डालने की योजना तैयार की गई। उन्होंने कहा कि हिसार-घग्गर डेÑन में रोहतक तक का पानी आता है, जिसमें फैक्ट्रियों के साथ-साथ अपशिष्ट पदार्थ भी होते हैं। इस पानी को नहरों में डालने का सीधा-सीधा मतलब है कैंसर को बुलावा। या यूं कहें कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। चौधरी ने कहा कि एक तो सेम की समस्या के कारण पहले ही पैंतालिसा के किसान परेशान हैं, उपर से सरकार ने इस प्रोजेक्ट का टेंडर लगाकर किसानों की सिरदर्दी को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को अगर व्यवस्था करनी ही है तो हिसार-घग्गर ड्रेन का पानी ट्रीट करके घग्गर में डाले, या फिर ड्रेन के साथ माइनर बनाकर राजस्थान सीमा तक पानी पहुंचाए, जिसे राजस्थान लेने के लिए तैयार है। इस मौके पर का. स्वर्ण सिंह विर्क ने कहा कि पहले यह ड्रेन रोहतक थी, जिसे अब विस्तार कर दिल्ली तक तैयार किया जा रहा है। दिल्ली तक का केमिकल युक्त पानी अब यहां आएगा, जिसे पेयजल सप्लाई की नहरों में डालना लोगों को मौत के मुंह में पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद इस प्रकार के मुद्दे छेड़कर मुख्य मुद्दों महंगाई, रोजगार से ध्यान हटाना है, ताकि लोग इसी में उलझे रहें। इस मौके पर अखिल भारतीय किसान सभा के जिला संगठन कमेटी सदस्य सुरजीत सिंह ऐलनाबाद ने कहा कि सरकार के इस फैसले से किसानों को नुकसान हो न हो, लोग पानी में बहेंगे या नहीं, लेकिन बिमारियों की भरमार होगी। इस प्रकार के प्रोजेक्ट से सरकार की मंशा साफ है कि वो दोनों राज्यों के लोगों को आपस में भिड़वाना चाहती है। इस मौके पर तहसील प्रधान नाथूसरी चोपटा अभिमन्यू सहारण ने कहा कि इस ड्रेन से सबसे अधिक चोपटा क्षेत्र है। हर बार बरसाती मौसम में लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने सेम की समस्या के कारण पानी का स्तर पहले ही काफी उपर है। सेम के कारण अनेक बिमारियों की चपेट में पैंतालिसावासी हैं, लेकिन अगर इस ड्रेन का पानी नहरों में छोड़ा गया तो इलाकावासी कहीं के नहीं रहेंगे। मीडिया कर्मियों द्वारा राजस्थान सरकार के रवैये को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मंगेज चौधरी ने कहा कि पहले तो सरकार ने इस मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया, लेकिन किसानों द्वारा इस मसले को उठाने के बाद अब सरकार जागी है और हरियाणा व राजस्थान के अधिकारियों की उच्च स्तरीय मीटिंंग बुलाई है। उन्होंने कहा कि हालांकि सरकार ने प्रोजेक्ट बंद कर दिया है, लेकिन उन्हें विश्वास नहीं है कि सरकार इसके पानी को नहरों में न डाले। उन्होंने कहा कि 13 जुलाई को चोपट में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक चोपट में आयोजित होगी, जिसमें दोनों राज्यों के किसानों के साथ-साथ आमजन भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने इस प्रोजेक्ट के तहत नहरों में ड्रेन का पानी डालने की कोशिश की तो किसान बड़े आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। इस मौके पर राजेंद्र रूपावास, हमजिंद्र सिद्धू, मांगेराम पनिहारी सहित अन्य किसान नेता उपस्थित थे।

