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सरकारी आवास मिला, फिर भी हरविंद्र कल्याण ने किया विनम्रता से इनकार

 पुलिस कॉम्प्लेक्स का अनुशासन न बिगड़े, इसलिए स्पीकर ने छोड़ा आवंटित मकान; संवैधानिक पद की मर्यादा का दिया संदेश
 
 सरकारी आवास मिला, फिर भी हरविंद्र कल्याण ने किया विनम्रता से इनकार

चंडीगढ़ 28 अगस्त
   हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने संवैधानिक पद की गरिमा और प्रशासनिक मर्यादा का एक और उदाहरण पेश किया है। कुटेल के मूल रूप से निवासी जी टी रोड पर स्थित  उनके 70 वर्ष से अधिक पुराने पैतृक आवास ‘कल्याण फार्म’ के जर्जर ढांचे को देखते हुए सरकार की ओर से उन्हें अस्थायी रूप से रहने के लिए मधुबन पुलिस कॉम्प्लेक्स में हाउस नंबर-2 आवंटित किया गया था। कल्याण फार्म हॉउस 1950 के लगभग इनके पिता स्वर्गीय देवी सिंह रोड ने बनाया था।कुटेल गांव मे यह परिवार 125 वर्षो से अधिक से रह रहा है।

पिछले दिनों कल्याण ने अपनी इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री के संज्ञान मे डाला था  की वेकलपिक रूप से  रेस्ट हॉउस मे कुछ रुम्स या अन्य कोई आवसीय वेकल्पिक व्यवस्था की सहयता की जाए । जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सहर्ष यह अनुरोध स्वीकार कर लिया।कल्याण रेस्ट हॉउस या अन्य कोई जगह चाहते थे।
  उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से की गई इस सहयोगपूर्ण पहल के लिए वह हृदय से कृतज्ञ हैं, लेकिन पुलिस कॉम्प्लेक्स में आवासीय उपयोग के लिए आवंटित मकान को स्वीकार करना उनके लिए उचित नहीं होगा।
सरकारी सुविधा से अधिक प्राथमिकता संस्थागत मर्यादा को
हरविंद्र कल्याण के इस निर्णय को उनके सार्वजनिक जीवन की कार्यशैली से जोड़कर देखा जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए उन्होंने व्यक्तिगत सुविधा की बजाय संस्थागत व्यवस्था और प्रशासनिक अनुशासन को प्राथमिकता दी है।
मधुबन पुलिस कॉम्प्लेक्स मूल रूप से पुलिस विभाग की गतिविधियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए निर्धारित परिसर है। ऐसे में उनका वहां बतौर विधानसभा अध्यक्ष निवास करना पुलिस परिसर की सामान्य कार्यप्रणाली और अनुशासन पर प्रभाव डाल सकता था। कल्याण का मानना है कि उनके पद और सार्वजनिक दायित्वों के कारण उनकी मौजूदगी से पुलिस कॉम्प्लेक्स में अनावश्यक प्रोटोकॉल या व्यवस्थागत बदलाव की स्थिति बन सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने केवल वर्तमान परिस्थिति को नहीं देखा, बल्कि भविष्य की संभावित परंपरा को भी ध्यान में रखा। उनका तर्क है कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति के लिए पुलिस कॉम्प्लेक्स में आवास की व्यवस्था को सामान्य उदाहरण नहीं बनना चाहिए। यही सोच उनके निर्णय को महज सरकारी मकान छोड़ने की घटना से आगे ले जाती है।
‘मेरे कारण कोई असुविधा न हो’—कल्याण की सोच
सूत्रों के अनुसार, हरविंद्र कल्याण ने संबंधित स्तर पर यह भी स्पष्ट किया कि उनके वहां रहने से पुलिस परिसर की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। वह नहीं चाहते कि उनके कारण पुलिस कॉम्प्लेक्स में ऐसा वातावरण बने जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके प्रोटोकॉल के अनुरूप अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ें।
उनकी यह सोच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह स्वयं लगातार तीसरी बार घरौंदा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और लंबे समय से सक्रिय सार्वजनिक जीवन में हैं। क्षेत्र की जनता से सीधा संपर्क उनकी राजनीतिक कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसके बावजूद उन्होंने अपने लिए उपलब्ध कराई गई सरकारी सुविधा को केवल इसलिए स्वीकार नहीं किया कि वह संवैधानिक पद पर हैं।
पैतृक ‘कल्याण फार्म’ से जुड़ा है परिवार और सार्वजनिक जीवन
कुटेल स्थित ‘कल्याण फार्म’ हरविंद्र कल्याण के लिए केवल एक आवास नहीं, बल्कि परिवार की पुरानी विरासत और सामाजिक जुड़ाव का केंद्र है। यह पैतृक मकान सात दशक से अधिक पुराना बताया जाता है और समय के साथ इसका ढांचा कमजोर हो चुका है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए मकान को गिराकर नए सिरे से निर्माण की आवश्यकता है।
निर्माण कार्य पूरा होने में लगभग एक वर्ष लगने की संभावना को देखते हुए सरकार ने उनकी अस्थायी आवासीय जरूरत को ध्यान में रखते हुए मधुबन पुलिस कॉम्प्लेक्स में हाउस नंबर-2 उपलब्ध कराया था। सरकार की ओर से यह व्यवस्था उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए की गई थी।
लेकिन हरविंद्र कल्याण ने इसे स्वीकार करने की बजाय यह संदेश दिया कि सरकारी सुविधा तभी उचित है, जब उससे संबंधित संस्थान की सामान्य व्यवस्था प्रभावित न हो।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का जताया आभार
सूत्र बताते हैँ की अपने पत्र में हरविंद्र कल्याण ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता और सहयोग के लिए विशेष रूप से आभार जताया है। उन्होंने सरकार की ओर से उनके आवास की स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की पहल की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह हाउस नंबर-2, मधुबन पुलिस कॉम्प्लेक्स को आवासीय उपयोग के लिए स्वीकार नहीं करना चाहते।
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के बीच बेहतर समन्वय की तस्वीर भी सामने आती है। सरकार ने जहां संवैधानिक पद की आवश्यकताओं को देखते हुए सुविधा उपलब्ध कराने की पहल की, वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने अपनी ओर से यह सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी कि उस सुविधा के कारण किसी प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
तीसरी बार विधायक, अब विधानसभा की कार्यवाही की जिम्मेदारी
हरविंद्र कल्याण घरौंदा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार विधायक हैं। लंबे राजनीतिक और सार्वजनिक अनुभव के बाद उन्हें हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष की महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी मिली है। अध्यक्ष के रूप में सदन की कार्यवाही को निष्पक्षता, अनुशासन और संसदीय मर्यादा के अनुरूप चलाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है।
उनके आवास से जुड़ा यह निर्णय भी उसी कार्यशैली का विस्तार माना जा रहा है, जिसमें व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर संस्थागत मर्यादा को महत्व दिया गया है।

‘कल्याण फार्म’ रहेगा संपर्क का केंद्र
माना जा रहा है कि पैतृक आवास के पुनर्निर्माण के दौरान भी ‘कल्याण फार्म’ का कार्यालय और जनसंपर्क संबंधी गतिविधियां अपनी जगह बनी रहेंगी। क्षेत्र की जनता से संपर्क बनाए रखना उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे उल्लेखनीय पहलू यही है कि जहां सरकार ने विधानसभा अध्यक्ष की आवासीय आवश्यकता को देखते हुए एक वर्ष के लिए वैकल्पिक सरकारी आवास उपलब्ध कराने की पहल की, वहीं हरविंद्र कल्याण ने व्यक्तिगत सुविधा से अधिक पुलिस विभाग की संस्थागत व्यवस्था को महत्व दिया।
एक ओर सात दशक पुराने पैतृक मकान का पुनर्निर्माण उनके सामने पारिवारिक आवश्यकता के रूप में खड़ा है, तो दूसरी ओर संवैधानिक पद की जिम्मेदारी उन्हें हर निर्णय में व्यापक प्रशासनिक प्रभाव को देखने की प्रेरणा देती है। मधुबन पुलिस कॉम्प्लेक्स का मकान छोड़ने का उनका फैसला इसी सोच का परिचायक माना जा रहा है।