तीन हजार से ज्यादा हीटर आरडब्ल्यूए, फॉरेस्ट गार्ड और मजदूरों को उपलब्ध कराएगी सरकार : सिरसा
Sep 12, 2025, 20:21 IST

नई दिल्ली, 12 सितंबर । दिल्ली सरकार ने सर्दियों के प्रदूषण को काबू करने के लिए 3,000 से अधिक रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) फॉरेस्ट गार्ड और मजदूरों को इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराएगी।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शुक्रवार को एक उच्च-स्तरीय वर्चुअल बैठक में डिविजनल कमिश्नर, दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी), पर्यावरण विभाग और डीपीसीसी के अधिकारियों ने मिलकर हीटर वितरण की पारदर्शी प्रक्रिया तय की। मंत्री ने डिविजनल कमिश्नर को निर्देश दिया कि सभी आरडब्ल्यूए का नया आकलन किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सके।
मंत्री सिरसा ने कहा कि दिल्ली के इतिहास में यह अहम कदम है। पिछली सरकारों की तरह केवल आदेश जारी करने के बजाय हम असली समाधान दे रहे हैं। जब हीटर सीधे लोगों को मिलेंगे, तो अलाव जलाने के मामले कम होंगे और प्रदूषण भी कम होगा। इस पहल के जरिए हम लोगों में एक व्यावहारिक बदलाव लाना चाहते हैं जिसके बाद वे खुले में आग जलाने से खुद बचें।
डीएसआईआईडीसी करीब 4.2 करोड़ रुपये की राशि अपने सीएसआर फंड से खर्च कर हीटर की व्यवस्था करेंगे। जमीन पर अमल की जिम्मेदारी डिविजनल कमिश्नर ऑफिस की होगी और पर्यावरण विभाग लगातार इसकी मॉनिटरिंग करेगा।
सरकार ने प्राथमिकता तय की है—पहले आरडब्ल्यूए, फॉरेस्ट गार्ड और असंगठित इलाकों के मजदूरों को हीटर दिए जाएंगे, ताकि किसी को भी ठंड से बचने के लिए प्रदूषण फैलाने वाली आग जलाने की जरूरत न पड़े। यह कदम दिल्ली की समग्र प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का हिस्सा है। इसमें खुले में आग पर सख़्त निगरानी, रोजाना निरीक्षण, जागरूकता अभियान और कचरा प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर बड़े बदलाव हो रहे हैं। गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल पर रोजाना 10,000 टन से ज़्यादा वेस्ट की प्रोसेसिंग हो रही है। वैज्ञानिक तरीके से बायोमाइनिंग, सीसीटीवी कैमरे, गैस डिटेक्टर और नियमित फायर ड्रिल की व्यवस्था ने इस साल लैंडफिल साइट्स किसी बड़े आगजनी को होने से रोका है
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शुक्रवार को एक उच्च-स्तरीय वर्चुअल बैठक में डिविजनल कमिश्नर, दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी), पर्यावरण विभाग और डीपीसीसी के अधिकारियों ने मिलकर हीटर वितरण की पारदर्शी प्रक्रिया तय की। मंत्री ने डिविजनल कमिश्नर को निर्देश दिया कि सभी आरडब्ल्यूए का नया आकलन किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सके।
मंत्री सिरसा ने कहा कि दिल्ली के इतिहास में यह अहम कदम है। पिछली सरकारों की तरह केवल आदेश जारी करने के बजाय हम असली समाधान दे रहे हैं। जब हीटर सीधे लोगों को मिलेंगे, तो अलाव जलाने के मामले कम होंगे और प्रदूषण भी कम होगा। इस पहल के जरिए हम लोगों में एक व्यावहारिक बदलाव लाना चाहते हैं जिसके बाद वे खुले में आग जलाने से खुद बचें।
डीएसआईआईडीसी करीब 4.2 करोड़ रुपये की राशि अपने सीएसआर फंड से खर्च कर हीटर की व्यवस्था करेंगे। जमीन पर अमल की जिम्मेदारी डिविजनल कमिश्नर ऑफिस की होगी और पर्यावरण विभाग लगातार इसकी मॉनिटरिंग करेगा।
सरकार ने प्राथमिकता तय की है—पहले आरडब्ल्यूए, फॉरेस्ट गार्ड और असंगठित इलाकों के मजदूरों को हीटर दिए जाएंगे, ताकि किसी को भी ठंड से बचने के लिए प्रदूषण फैलाने वाली आग जलाने की जरूरत न पड़े। यह कदम दिल्ली की समग्र प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का हिस्सा है। इसमें खुले में आग पर सख़्त निगरानी, रोजाना निरीक्षण, जागरूकता अभियान और कचरा प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर बड़े बदलाव हो रहे हैं। गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल पर रोजाना 10,000 टन से ज़्यादा वेस्ट की प्रोसेसिंग हो रही है। वैज्ञानिक तरीके से बायोमाइनिंग, सीसीटीवी कैमरे, गैस डिटेक्टर और नियमित फायर ड्रिल की व्यवस्था ने इस साल लैंडफिल साइट्स किसी बड़े आगजनी को होने से रोका है

