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छात्रों पर कार्रवाई का सच संसद में बताए सरकार, जवाबदेही से बचना लोकतंत्र के हित में नहीं : कुमारी सैलजा

 गृहमंत्री सदन में स्पष्ट करें किसके आदेश पर छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग हुआ
 
 छात्रों पर कार्रवाई का सच संसद में बताए सरकार, जवाबदेही से बचना लोकतंत्र के हित में नहीं : कुमारी सैलजा
 राहुल गांधी को बार-बार बोलने का अवसर न देना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं : सैलजा

 चंडीगढ़, 12 अगस्त। 

सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्लूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि संसद के वर्तमान मानसून सत्र में छात्रों के आंदोलन के दौरान दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का केंद्र सरकार को सदन के भीतर स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जवाबदेही से बचने के कारण संसद का बहुमूल्य समय बर्बाद होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष लगातार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों पर गृहमंत्री से बयान दिलाने की मांग की है। दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम के तथ्य सामने रखने की जिम्मेदारी सरकार की है।

सांसद ने कहा कि यदि सरकार छात्रों के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है तो गतिरोध समाप्त करने का सबसे सरल रास्ता यही है कि गृहमंत्री सदन में आकर बताएं कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ किस प्रकार के बल का प्रयोग किया गया, पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की वास्तविकता क्या है और कार्रवाई के आदेश किस स्तर पर दिए गए। यदि सरकार विपक्ष के आरोपों को गलत मानती है तो उसे तथ्यों और रिकॉर्ड के साथ संसद में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। सरकार का पक्ष और विपक्ष के सवालों का जवाब यहीं आना चाहिए। यह भी गंभीर चिंता का विषय है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बार-बार अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया जाता। विपक्ष की आवाज सुनना संसदीय लोकतंत्र की बुनियादी भावना है। सरकार यदि सदन की गरिमा की बात करती है तो उसे स्वयं भी संसदीय परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। विपक्ष की आवाज को बाधित करना संसद की गरिमा को कमजोर करता है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि इसी मुद्दे को लेकर लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित होना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि संसद चले, लेकिन सदन चलाने की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार की होती है। गंभीर सवालों का स्पष्ट जवाब देकर गतिरोध समाप्त किया जा सकता है। जवाब टालने से अविश्वास और गहरा होता है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह देश के सर्वोच्च संवैधानिक दायित्वों वाले पदों पर हैं। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का उत्तर संसद में देना सरकार की कमजोरी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मजबूती का प्रमाण होगा। कांग्रेस का सवाल सीधा है छात्रों के खिलाफ कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई, किसने आदेश दिए और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की सच्चाई क्या है? यदि किसी स्तर पर ज्यादती हुई है तो निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि देश के युवा रोजगार, परीक्षाओं की पारदर्शिता और अपने भविष्य को लेकर पहले ही चिंतित हैं। छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनसे संवाद होना चाहिए। संसद प्रचार और आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, देश के प्रति जवाबदेही का सर्वोच्च मंच है। सरकार गृहमंत्री का स्पष्ट बयान करवाकर गतिरोध समाप्त करे, ताकि महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, किसान और जनता से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सार्थक चर्चा हो सके।