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नीट विवाद पर सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए, संसद में गतिरोध का भी निकले समाधान : गुरजीत सिंह मान उपशीर्षक:

 'पल-पल पॉडकास्ट विद सुरेंद्र भाटिया' में वरिष्ठ पत्रकार गुरजीत सिंह मान ने रखे विचार, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और संसद के गतिरोध पर की चर्चा
 
 नीट विवाद पर सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए, संसद में गतिरोध का भी निकले समाधान : गुरजीत सिंह मान उपशीर्षक:

 सिरसा, 23 जुलाई। देश में नीट पेपर लीक और उससे जुड़े विवाद को लेकर 'पल-पल पॉडकास्ट विद सुरेंद्र भाटिया' में वरिष्ठ पत्रकार गुरजीत सिंह मान ने कहा कि यह केवल नीट का मामला नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाहे नौकरी की परीक्षा हो या किसी संस्थान में प्रवेश की, बार-बार परीक्षाएं रद्द होने या दोबारा कराने से सबसे अधिक नुकसान मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का होता है।
गुरजीत सिंह मान ने कहा कि यदि किसी विशेषज्ञ से भी पूछा जाए तो अधिकांश का मानना है कि पहली बार परीक्षा की तैयारी के दौरान जो प्रदर्शन और आत्मविश्वास होता है, वह दोबारा उसी स्तर पर बनाए रखना आसान नहीं होता। यह बात केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि खेल और अन्य प्रतियोगी क्षेत्रों पर भी लागू होती है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक पीड़ा उन विद्यार्थियों को होती है, जो परीक्षा पास कर चुके होते हैं और बाद में दोबारा परीक्षा की प्रक्रिया में नए अभ्यर्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने को मजबूर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि नीट के समान ही संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा भी देश की सबसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाली परीक्षाओं में से एक है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि उसकी विश्वसनीयता बरकरार रहती है, जबकि अन्य परीक्षाओं में बार-बार विवाद सामने आते हैं। व्यवस्था को इस दिशा में गंभीरता से सुधारने की आवश्यकता है।
दिल्ली में पिछले चार दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बारे में पूछे गए सवाल पर गुरजीत सिंह मान ने कहा कि जब पेपर लीक का मामला सामने आया था, उस समय काकरोच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके अमेरिका में थे। वहीं से उन्होंने कहा था कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और शिक्षा मंत्री को नहीं हटाया गया तो आंदोलन और व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को शुरुआत में ही छात्रों की बात सुननी चाहिए थी, जिससे स्थिति इतनी न बढ़ती।
उन्होंने कहा कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने के बाद छात्र संगठित होकर संसद मार्च के लिए पहुंचे। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का उपद्रव करना नहीं था, बल्कि अपनी आवाज उन लोगों तक पहुंचाना था जो निर्णय लेने की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यदि जनता की आवाज नहीं सुनी जाएगी तो लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिह्न खड़े होंगे।
गुरजीत सिंह मान ने कहा कि नीट विवाद के दौरान कई विद्यार्थियों ने मानसिक तनाव झेला और कुछ ने आत्महत्या जैसा कठोर कदम भी उठाया। उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल युग में परीक्षार्थियों को अनावश्यक रूप से दूसरे शहरों में भेजने के बजाय जहां तक संभव हो, उनके अपने या निकटवर्ती शहरों में परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इससे विद्यार्थियों पर आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव कम होगा।
बीजेपी और कांग्रेस दोनों के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सबसे अधिक नुकसान छात्रों का हो रहा है। उनकी आवाज सीधे सरकार तक नहीं पहुंच पा रही, इसलिए विपक्ष उनके मुद्दे को उठा रहा है। ऐसे में केवल विपक्ष की राजनीति को दोष देना उचित नहीं होगा, बल्कि मूल मुद्दे का समाधान तलाशना अधिक आवश्यक है।
छात्रों के मुद्दे का समाधान कैसे निकले, इस सवाल पर गुरजीत सिंह मान ने कहा कि सबसे पहले संवाद की आवश्यकता है। छात्रों की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री को हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इतने बड़े स्तर पर छात्र अपनी पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं तो उनकी बात को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
इस दौरान सुरेंद्र भाटिया ने सुझाव देते हुए कहा कि दोनों राजनीतिक दलों को अपनी-अपनी जिद छोड़नी होगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शिक्षा मंत्री को हटाना नहीं चाहती, तो एक बीच का रास्ता यह हो सकता है कि उनसे शिक्षा विभाग का प्रभार वापस लेकर किसी अन्य मंत्री को यह जिम्मेदारी सौंप दी जाए। उन्होंने कहा कि संसद का मानसून सत्र केवल 21 दिनों का है और उसके शुरुआती दिनों में लगातार गतिरोध से देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों—जैसे बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील और अन्य जनहित के विषय—पर चर्चा नहीं हो पा रही है। इसलिए सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों को सकारात्मक पहल करते हुए समाधान निकालना चाहिए, ताकि संसद सुचारु रूप से चल सके और जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके।